स्कूल आफ एमिनेंस, जिस पर पंजाब सरकार अपनी पीठ थपथपाते नहीं थकती उसकी असलियत सामने आने लगी है। इन स्कूलों पर आर्थिक संकट का साया है। जानकारी के अनुसार, मोगा के स्कूल ऑफ एमिनेंस की बस सेवाएं पिछले करीब 10 दिनों से पूरी तरह से ठप हैं। शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर संकट मंडरा रहा है।
उधार में भरवा रहे तेल
शिक्षा विभाग की ओर से बस संचालकों को पिछले काफी समय से लाखों रुपये के किराये का भुगतान नहीं किया गया है। बस मालिकों का कहना है कि वे पेट्रोल पंपों से उधार में डीजल डलवाकर थक चुके हैं। बकाया राशि न मिलने के कारण अब उनके लिए बसें चलाना आर्थिक रूप से नामुमकिन हो गया है।
दूसरी ओर मोगा के जिला शिक्षा अधिकारी आशीष शर्मा का कहना है कि बस मालिकों के किराये के बिल पास कर दिए गए हैं और बसें दोबारा शुरू हो चुकी हैं। इसके विपरीत, अभिभावकों का साफ आरोप है कि अधिकारियों के दावे झूठे हैं। गांवों में कोई बस नहीं पहुंच रही है और उन्हें पिछले कई दिनों से अपने निजी साधनों से बच्चों को स्कूल छोडऩा पड़ रहा है।
स्कूल में मौलिक सुविधाओं का भी टोटा
बसें बंद होने के साथ-साथ अभिभावकों ने स्कूल के खस्ताहाल पर भी रोष जताया है। लोगों का कहना है कि स्कूल की इमारत का काम अभी भी अधूरा पड़ा है। स्कूल ऑफ एमिनेंस बनने के बावजूद मेडिकल, नॉन-मेडिकल और आर्ट्स जैसी मुख्य स्ट्रीम्स में लेक्चरर और शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। लोगों का कहना है कि जब पंजाब सरकार ने पुराने सरकारी स्कूलों को स्कूल ऑफ एमिनेंस में तब्दील करने का अभियान शुरू किया था, तब इस स्कूल के दिन सुधरने की उम्मीद जगी थी। परंतु अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आरहा है।
पंजाब सरकार पीटती है ढोल
स्कूल ऑफ एमिनेंस को लेकर पंजाब सरकार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सफलता के ढोल पीटती है। हाल ही में आम आदमी पार्टी का जेबी संगठन कहलाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने एक ऐसे ही स्कूल का दौरा किया था और इन स्कूलों की प्रशंसा की थी। मोगा की उक्त घटना पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार के साथ-साथ काकरोच जनता पार्टी की पोल खोलने की लिए भी पर्याप्त है।

















