पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दफ्तर में चल रहे कथित भ्रष्टाचार के मामले ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब पुलिस को तीसरा पत्र लिख कर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा है। इस मामले में 3 सितंबर को पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। आरोप है कि पंजाब के सीएम हाउस में ट्रंसफर-पोस्टिंग, टेंडरों के आवंटन जैसे सरकारी कामों को लेकर एक सिस्टमेटिक तरीके से भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा था।
क्या है ईडी का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ) का आरोप है कि सीएम ऑफिस से कथित भ्रष्टाचार का खेल चल रहा था। ईडी ने 200 पन्नों की रिपोर्ट सबूत के साथ सौंपी। इसमें आरोप है कि जांच के दौरान पंजाब पुलिस ने ईडी का सहयोग नहीं किया। सीएम के ओएसडी राजीव घुम्मन पर भी आरोप हैं। रिपोर्ट के अनुसार सीएम ऑफिस से पैसे का लेन-देन भी हुआ है।
इन नामों का जिक्र
रिपोर्ट में आरोप है कि पंजाब पुलिस ने ईडी के तीन पत्र मिलने के बावजूद नितिन गोहल, जितिन गोहल, राजबीर घुमन, बीर दविंदर, रोमी राजा महाजन और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की। ईडी ने इन सब पर निजी फायदे के लिए आपराधिक साजिश रचने, ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए रिश्वत लेने और गोपनीय सरकारी जानकारी लीक करने के आरोप लगाए। पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई।
रिपोर्ट में बिचौलियों के माध्यम से पंजाब सरकार में कथित भ्रष्टाचार पर बड़े खुलासे किए गए हैं। ईडी ने 7 मई 2026 से 10 मई 2026 तक पंजाब में अजय सहगल, नितिन गोहल, सुरेश कुमार बजाज और अन्य के परिसरों पर तलाशी ली थी। नितिन गोहल के घर से ईडी ने बालकनी से फेंका गया नोटों से भरा बैग मिला था। बैग में 21 लाख रुपए थे। नितिन गोहल भगवंत मान के ताकतवर ओएसडीराजबीर सिंह घुम्मन का दोस्त है। ईडी ने कहा गोहल के घर से बरामद मोबाइल फ़ोन के चैट और दस्तावेजों से पंजाब सीएम ऑफिस में फैले कथित भ्रष्टाचार का पता चला। ईडी ने हाईकोर्ट को उसके सभी व्हॉट्स एप चैट की ट्रांसक्रिप्ट, जानकारियां और स्क्रीन शॉट्स भी सौंपे हैं।
तबादलों-टेंडर आवंटन, सीएलयू देने में भ्रष्टाचार के आरोप
ईडी के रिपोर्ट में जो आरोप लगाए गए हैं उसके अनुसार पंजाब में ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर अलॉटमेंट , बिल्डरों को सीएलयू देने, पॉलिसी मैटर्स की शर्तें तय करने, आर्म्स लाइसेंस जारी करने में दख़लंदाज़ी और पैसे के लेनदेन का पता चला है। ईडी का दावा है कि नितिन गोहल के संबंध सीएम के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन के साथ हैं। नितिन गोहल ने अपने करीबी की नियुक्ति सीएम ऑफिस में करवाई।
इन राजों का भी पर्दाफाश
आरोप है कि सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग में दखल हैं। रिपोर्ट में 21 ट्रांसफर और पोस्टिंग की टैली दी गई। जांच के दौरान, नितिन गोहल के डिवाइस से मिली अलग-अलग व्हट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, डॉक्यूमेंट और बातचीत से पता चला कि वे कई सरकारी विभागों में ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामलों में सक्रिय रूप से शामिल थे। रिकॉर्ड से पता चलता है कि नितिन गोहल इच्छुक अधिकारियों और राजबीर घुमन के बीच बिचौलिए का काम कर रहे थे, जबकि नितिन गोहल अपने पसंदीदा लोगों की पोस्टिंग पक्की करने के लिए ड्राफ्ट ऑर्डर बाहर निकालते थे। चैट से प्रस्तावित ट्रांसफर, पसंदीदा पोस्टिंग, अधिकारियों की आवाजाही, विभागीय बदलाव और ट्रांसफर से जुड़ी गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक होने से पहले ही शेयर करने के बारे में बातचीत का भी पता चलता है। आरोप है कि सरकारी काम के लिए मिले पेमेंट, किकबैक और दूसरे फायदे- 11 मामलों की लिस्ट दी गई है। रिकवर की गई चैट और डिजिटल सबूतों से पता चलता है कि नितिन गोहल और उनके साथी कथित तौर पर पैसे ले रहे थे, पेमेंट का इंतजाम कर रहे थे, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन में मदद कर रहे थे, यात्रा की बुकिंग कर रहे थे और ट्रांसफर/पोस्टिंग के मामलों, जमीन के लेन-देन, पॉलिसी से जुड़े कामों और सरकारी फायदों के बदले दूसरी सुविधाएँ दे रहे थे।
व्यवस्थित ढंग से चल रहा भ्रष्टाचार
रिपोर्ट के अनुसार बातचीत के तरीके से एक व्यवस्थित सिस्टम का पता चलता है, जिसमें सरकारी अधिकारियों तक पहुँच और उनके प्रभाव का इस्तेमाल करके आर्थिक फायदा उठाया जाता था। लैंड डील्स, पॉलिसी मैटर, सरकारी गोपनीय जानकारी तक अनधिकृत पहुँच और उसका लीक होना-18 मामलों का जिक्र है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच से पता चला है कि नितिन गोहल और उनके सहयोगियों के पास ट्रांसफर प्रस्तावों, पोस्टिंग ऑर्डर, पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स, प्रशासनिक मंजूरी और अन्य आंतरिक सरकारी संचार से जुड़ी गोपनीय जानकारी मौजूद थी, जबकि यह जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई थी। इससे संकेत मिलता है कि आधिकारिक रिकॉर्ड तक अनधिकृत पहुंच हो सकती है और ऐसे रिकॉर्ड तक पहुंच रखने वाले लोगों द्वारा संवेदनशील सरकारी जानकारी लीक की गई हो सकती है। जांच में हथियार लाइसेंस के मामलों, सिफारिशों, मंजूरियों, नवीनीकरण और अन्य संबंधित कार्यों से जुड़ी कई बातचीत/संपर्क सामने आए हैं। रिपोर्ट इशारा करती है कि नितिन गोहल कथित तौर पर सरकारी तंत्र में आधिकारिक पदों और प्रभाव रखने वाले लोगों के माध्यम से ऐसे मामलों में मदद और समन्वय कर रहे थे।
आम आदमी पार्टी की ओर से बयान
पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को लेकर भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी के माध्यम से आम आदमी पार्टी की लीडरशिप को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। अरोड़ा ने कहा कि ईडी की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को तीसरा पत्र भेजकर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा गया है, जबकि पंजाब पुलिस पहले ही ईडी से उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों और सामग्री को लेकर सवाल उठा चुकी है। अमन अरोड़ा के मुताबिक, पंजाब पुलिस ने ईडी को बताया है कि एजेंसी की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री स्पष्ट रूप से पढऩे योग्य नहीं है और उसकी प्रमाणिकता भी स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने दोबारा साक्ष्य और तथ्य उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि उनकी जांच के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके। इसके बावजूद तीसरा पत्र भेजे जाने पर उन्होंने सवाल उठाए।















