राजनीति में नैरेटिव बनाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में किसी व्यक्ति के नाम से ऐसा बयान गढ़ देना, जो उसने कभी दिया ही नहीं, ऐसा वीडियो साझा कर देना जो उसका है ही नहीं, तो यह केवल राजनीतिक आलोचना नहीं रह जाता। यह सीधे-सीधे सूचना की विश्वसनीयता का सवाल बनता है। छात्रहित के कथित आंदोलन से जन्मी कॉकरोच जनता पार्टी पर फेक न्यूज और झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करने के आरोप लग रहे हैं। ताजा मामला सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास का है।
अभिजीत दीपके ने राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ जितेंद्र मिश्रा के नाम पर एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें एक व्यक्ति फिल्मी गाने ‘जमाल कुडू’ पर डांस करता दिख रहा है। पोस्ट में दावा किया गया था कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा हैं। यह दावा गलत था। मामला बढ़ा तो उन्होंने सफाई दी, लेकिन तब तक झूठी सूचना पूरी तरह से फैल चुकी थी।
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास और भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया से जुड़े ताजा विवाद ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जो संगठन दूसरों से जवाबदेही मांगता है, क्या वह स्वयं अपने सोशल मीडिया दावों के प्रति उतना ही जवाबदेह है? ऐसे कई तथ्य हैं जो सीजेपी साबित नहीं कर पाई।
सौरभ दास ने गौरव भाटिया के खिलाफ फेक न्यूज फैलाई
सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने 4 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक ऐसी पोस्ट साझा की, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया के हवाले से स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सल’ बताए जाने का दावा किया गया था। पोस्ट में भाटिया की तस्वीर और उनके नाम का इस्तेमाल किया गया था। दास ने पोस्ट के साथ ‘नो कमेंट्स अगेन’ लिखा था। गौरव भाटिया ने इसे फर्जी बताते हुए दास को 24 घंटे के भीतर पोस्ट हटाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की चेतावनी दी। इसके बाद दास ने पोस्ट डिलीट कर दी और बताया कि वह एआई से बनाई गई थी, लेकिन उन्होंने इसके लिए सार्वजनिक तौर से माफी नहीं मांगी। असली सवाल यहीं से शुरू होता है। यदि पोस्ट एआई से बनाई गई थी तो उसे प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता की जांच क्यों नहीं की गई? और अगर यह जानते हुए पोस्ट की गई कि वह वास्तविक बयान नहीं है, तो मामला और गंभीर हो जाता है। राजनीतिक प्रवक्ता के सोशल मीडिया अकाउंट से प्रसारित सामग्री को महज मजाक, मीम या एआई जनरेट कहकर जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता।

सुर्खियों में बने रहने के लिए एक और झूठा दावा
तथाकथित कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जुलाई 2026 में दावा किया कि उन पर बीजेपी में शामिल होने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है और इनकार करने पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। दीपके ने कहा कि यदि वे भाजपा में शामिल नहीं होते हैं, तो उन्हें गोली मार दी जाएगी। दीपके का यह बयान सोशल मीडिया पर आने के बाद सवाल उठाए गए कि आखिर भाजपा के किस नेता ने उन्हें पार्टी ज्वॉइन करने का ऑफर दिया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने भाजपा नेता का नाम क्यों नहीं लिया? ऐसे में दो तरह की बातें सामने आई। पहली यह कि क्या अभिजीत सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह का बयान दे रहे हैं या सच में भाजपा की तरफ से उन्हें किसी किस्म का ऑफर दिया गया था। अगर सच में उनको किसी नेता ने ऐसा प्रस्ताव दिया था तो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर मीडिया के समक्ष उसके नाम का खुलासा क्यों नहीं किया? वह खुद को मुखर और जनता हितैषी बताते हैं, विरोधियों का खुलकर विरोध करते हैं तो सबके सामने नाम लेने से परहेज क्यों?
‘मोदी ने 12 वर्षों के कार्यकाल में कुछ नहीं किया’
अभिजीत दीपके ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 12 वर्षों के कार्यकाल में कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया। साथ ही प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री को लेकर भी तंज कसा है और सवाल उठाया है कि इतने वर्षों तक इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? सरकार की आलोचना करना गलत नहीं है। बेरोजगारी, परीक्षा प्रणाली, शिक्षा, महंगाई या सरकारी नीतियों पर सवाल पूछना लोकतंत्र का अधिकार है। दीपके को पता होना चाहिए कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 12 वर्षों के शासन में बुनियादी ढांचे, डिजिटल भुगतान, जनधन योजना, 6 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी, ग्रामीण महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत, सड़क और रेल नेटवर्क, रक्षा उत्पादन और अंतरिक्ष क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इसके अलावा वह अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सार्वजनिक तौर पर सभी प्रमाण प्रस्तुत कर चुके हैं।
लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन सवाल पूछने वाले की विश्वसनीयता भी उतनी ही जरूरी है। सीजेपी को भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ झूठा नैरेटिव गढ़ने से पहले तथ्यों की पूरी तरह से जांच कर लेनी चाहिए। यह किसी से छिपा नहीं है कि सीजेपी ने नीट परीक्षा लीक मामले पर छात्रों के विरोध का इस्तेमाल अपनी कथित राजनीति चमकाने के लिए किया है। एआई से बनाई गई तस्वीर को राजनीतिक हथियार बनाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि मतदाताओं की सूचना-विश्वसनीयता के साथ खिलवाड़ है। वह दिन दूर नहीं जब उसे उसे लोग कॉकरोच जनता पार्टी के बजाय झूठ और भ्रम फैलाने वाली पार्टी के नाम से जाना जाएगा।
















