कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को लगातार सफलता मिल रही है। स्थानीय आतंकियों की संख्या में भी काफी कमी आई है। ऐसे समय में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई एक पुराने आतंकी नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई अल-उमर मुजाहिदीन को दोबारा खड़ा करने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए संगठन के पुराने नेटवर्क और उसके सरगना मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ मुश्ताक लटरम का इस्तेमाल किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस कोशिश का मकसद कश्मीर में स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती बढ़ाना और लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को स्थानीय स्तर पर मदद पहुंचाना हो सकता है।
कंधार कांड से जुड़ा रहा है लटरम
मुश्ताक अहमद जरगर का नाम 1999 के कंधार विमान अपहरण कांड से भी जुड़ा रहा है। यात्रियों की रिहाई के बदले भारत सरकार ने 31 दिसंबर 1999 को तीन आतंकियों को छोड़ा था। इनमें लटरम के अलावा मसूद अजहर और शेख उमर भी शामिल था। लटरम के पुराने संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ-साथ जैश और लश्कर से भी बताए जाते हैं। 1994 में दिल्ली में विदेशी नागरिकों के अपहरण के मामले में भी आतंकियों ने उसकी रिहाई की मांग की थी। 1995 में पहलगाम में विदेशी पर्यटकों के अपहरण के दौरान भी लटरम का नाम उन लोगों में शामिल था, जिन्हें छुड़ाने की मांग की गई थी।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, अल-उमर मुजाहिदीन का पुराना नेटवर्क श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके के साथ पुलवामा और बारामुला में भी रहा है। हालांकि संगठन लंबे समय से कमजोर है, लेकिन उसके कुछ पुराने संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। वर्ष 2000 में अल-उमर ने श्रीनगर के पुलिस नियंत्रण कक्ष पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 12 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। इसके बाद संगठन की गतिविधियां धीरे-धीरे कमजोर होती गईं और 2006 के बाद इसकी ओर से किसी बड़ी आतंकी वारदात की जानकारी सामने नहीं आई।

















