ब्रिटेन के बॉर्नमाउथ में जमेई मस्जिद को लेकर हंगामा मचा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे ठीक से सो नहीं पाते हैं। सुबह से पहले की नमाज और अजान से उनकी नींद खराब होती है और उसके बाद ग्रैवल कार पार्क पर टायरों की आवाज और परेशान करती है।
डेली मेल की खबर के अनुसार इमाम नमाज पढ़ने के लिए एक माइक्रोफोन का प्रयोग करता है और वहां आने वाले लोग मस्जिद के बाहर बहुत तेज आवाज में बातें करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नमाज के लिए आने वाले लोग पूरे रास्ते पर अपनी गाड़ियां पार्क कर देते हैं, जिसके चलते यातायात प्रभावित होता है। अब इस मस्जिद के विस्तार के लिए भी योजना बन रही है।
जमेई मस्जिद में पहले से ही 600 लोग आ सकते हैं। अब और नमाजियों के लिए कमरा बनाने के लिए योजना बनाई जा रही है। इस निर्माण योजना में एक नया मीटिंग रूम और महिलाओं और बच्चों के लिए एक फ्लोर शामिल है। लेकिन इसे लेकर स्थानीय लोग सहज नहीं हैं। उनका कहना है कि वे न तो मस्जिद और न ही किसी रिलीजन के खिलाफ हैं। वे बस उस असुविधा के खिलाफ हैं, जो उन्हें इस मस्जिद के कारण हो रही है। उनकी नींद पूरी नहीं होती है और उन्हें तड़के ही उठना पड़ता है। कानून के हिसाब से सबकुछ होना चाहिए।
स्थानीय निवासी मिस गिबलर्ट का कहना है कि अगर वे लोग रात को 11 बजे के बाद तेज संगीत चलाएंगे तो उन्हें भी रोका जाएगा। उनका कहना था कि आधी रात तक लोग सड़क पर तेज तेज बातें करते हैं और गाड़ियां बीच मे लगा देते हैं। एक और निवासी ने बताया कि बीस साल पहले जब यह मस्जिद बनी थी, तब किसी को समस्या नहीं थी क्योंकि वह छोटी थी और इतना तामझाम नहीं था। मगर अब गैर कानूनी रूप से गाड़ियां पार्क कर दी जाती हैं, खासतौर पर शुक्रवार को और उन्हें डर था कि कभी भी कुछ भी हो सकता है। इस महिला ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उसने कहा कि उसे नहीं लगता कि जो लोग आते हैं, वे सभी ठीक लोग हैं। मस्जिद और स्थानीय निवासियों के बीच तनाव बढ़ रहा है।
यह अकेला मामला नहीं है
लीसेस्टर में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें मस्जिद के विस्तार को लेकर काउंसिल ने स्थिति स्पष्ट की है। यह मस्जिद पुराने रग्बी फुटबॉल क्लब पवेलियन में बनी है। बीबीसी के अनुसार एक पुराने रग्बी फुटबॉल क्लब की पवेलियन को लीसेस्टर सिटी काउंसिल ने उस स्थान के प्रयोग को बदलते हुए प्लेस ऑफ वर्शिप में बदलने की अनुमति दी थी। इसके बाद इसमें मस्जिद की अनुमति ले ली गई थी।
अब मस्जिद के इमाम ने इसके विस्तार के लिए अनुमति मांगी है कि वह बिल्डिंग में डेढ़ मंजिला इमारत बनाना चाहते हैं, क्योंकि अब मांग बढ़ रही है। हालांकि योजना अधिकारियों ने ऐसी किसी भी मांग को मानने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इससे यातायात की समस्या बढ़ेगी। बीबीसी के अनुसार इस मैदान में अंतिम मैच 2017 में खेला गया था, और उसके बाद बंद पड़ा था। उसकी पवेलियन तब से बेकार पड़ी थी। साल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार इस पवेलियन को मस्जिद में बदल दिया गया था। आवेदक का कहना था कि इस मस्जिद में लगभग 100 लोग आ सकते थे और इसका उद्देश्य एक शांतिपूर्ण मजहबी माहौल बनाने का था।
उस समय योजना अधिकारियों का कहना था कि चूंकि 1 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 11.3% लोग मुसलमान हैं और प्रस्तावित मस्जिद स्थानीय जनता के लिए एकदम सही है। इसमें योजना अधिकारियों ने यह भी प्रस्ताव दिया था कि इमारत के बाहर कोई भी औपचारिक निर्धारित आयोजन नहीं होंगे और नमाज के लिए आवाज बाहर नहीं आएगी। उस समय काउंसिल के अधिकारियों ने यह भी प्रस्तावित किया था कि इस स्थान को केवल सुबह 7 बजे से रात के 11 बजे तक ही इस्तेमाल किया जाएगा, रमजान के समय यह 00.30 बजे हो सकता है। लेकिन लोगों का कहना है कि सुबह 4.30 बजे ही शोर शुरू हो जाता है। क्वींस पार्क में भी 13 मंजिला इमारत के
मस्जिद बनने के प्रस्ताव पर लोगों का विरोध हुआ था
क्वींस पार्क में एक इमारत को 13 मंजिला मेगा मस्जिद बनाने का भी प्रस्ताव विचाराधीन था। इस इमारत को लेकर लोगों का विरोध किया गया था। लोगों का कहना था कि पहले से ही तीन मील के दायरे में 15 मस्जिदें हैं, तो फिर इतनी बड़ी मस्जिद की जरूरत क्या है।
क्वींस पार्क में यूके अल्बानिया मुस्लिम कम्यूनिटी और कल्चरल सेंटर का विस्तार करने के आर्किटेक्ट वर्तमान इमारत को तोड़कर नई इमारत बनाना चाहते थे। यह पहले एक पब था और जो अभी अल्बानियन मुस्लिम समुदाय के पास है और अब वहां पर वे लोग नमाज, मीटिंग्स और दावतों के लिए 13 मंजिला इमारत बनाना चाहते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जितनी बड़ी यह इमारत प्रस्तावित है, उसके हिसाब से सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोग दिन और रात में नमाज के लिए आएंगे, शादी आदि के लिए आएंगे और जिसके चलते यहां पर ट्रैफिक होगा, पार्किंग शोर होगा और इलाके का माहौल बर्बाद हो जाएगा। लोगों का कहना था कि इतनी बड़ी इमारत से चर्च आदि सभी का प्रभाव प्रभावित होगा।
इन योजनाओं को दिसंबर 2023 मे पेश किया गया था और जिनपर आपत्तियों को कुछ ही हफ्ते पहले बंद किया गया था। इसको लेकर अभी यह कहा जा रहा है कि इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि ब्रिटेन में जिस तरह से मस्जिदें बढ़ रही हैं, उसके अनुसार ही स्थानीय (ईसाई लोगों) का विरोध भी बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर स्थानीय लोग इन मस्जिदों को सांस्कृतिक कब्जा भी कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का यह स्पष्ट प्रश्न है कि क्या सरकार ने बहुसंस्कृतिवाद के चलते अपने ही नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता या निजी स्वतंत्रता को दांव पर लगा दिया है? या वह संतुलन साध रही है?
प्रश्न केवल मस्जिद नहीं
सोशल मीडिया पर लोगों का यह भी कहना है कि प्रश्न केवल मस्जिद का नहीं है, प्रश्न उससे अधिक बड़ा है। प्रश्न यह है कि मजहबी आजादी और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन कहां है। लोग कह रहे हैं कि अगर एक समुदाय अपनी मजहबी गतिविधियों का विस्तार करने का अधिकारी है, तो उसी समय वही वहां के स्थानीय लोगों को भी तो घर पर शांति से सोने, सड़क पर सुरक्षित आने-जाने और अपने पड़ोस में होने वाले बड़े बदलावों पर आपत्ति दर्ज कराने का उतना ही अधिकार होना चाहिए।















