इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि निजी संपत्ति पर भीड़ जुटाकर नमाज पढ़वाना, कहीं से भी उचित कार्य नहीं है। शांति व्यवस्था भंग होने पर प्रशासन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। उच्च न्यायालय ने कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी संपत्ति की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और लोक शांति को खतरे में नहीं डाला जा सकता।
यह है मामला
कुछ दिन पहले बरेली जनपद में रमजान के महीने में निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी गई थी। इसके साथ ही उस निजी भूमि पर भारी संख्या में एकत्र होकर के नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई थी। प्रशासन के इस आदेश को मोहम्मद तारिक ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी मोहम्मद तारिक की याचिका पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा की आड़ में नियमों का दुरुपयोग किया जा रहा है। याचिका कर्ता अपनी निजी संपत्ति पर प्रतिदिन 50-60 लोगों को नमाज पढ़ने के नाम पर एकत्र करता है। ऐसा करने से सांप्रदायिक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है। कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए बरेली जनपद के अधिकारियों ने नमाज पढ़ने पर लगाई है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त आदेश
सुनवाई के दौरान बरेली जनपद के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक न्यायालय में उपस्थित थे। याची की ओर से कहा गया कि भविष्य में उस निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित नहीं किया जाएगा। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि फिर से याची द्वारा उस भूमि पर नमाज पढ़ने के लिए भीड़ जुटाता है तो जिला प्रशासन और पुलिस सख्त कार्रवाई के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।
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