केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में जनसांख्यिकी परिवर्तन पर कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस की सरकारों में अवैध घुसपैठियों (बांग्लादेशियों और रोहिंग्यायों) को जान-बूझकर बसाया गया था, जिससे कि इन दलों का राजनीतिक अस्तित्व ज्यादा मजबूत हो सके। असम में 2001 से 2016 तक कांग्रेस के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के कार्यकाल में 2011 से 2026 तक अवैध घुसपैठ हुई। रोहिंग्यायों को जम्मू-कश्मीर जो बांग्लादेश की सीमा से काफी दूर है, वहां भी इन्हें बसाया गया। इसके कारण देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता पर खतरा हो सकता है। अपराध और आतंकी घटनाओं में ये घुसपैठिये लिप्त भी पाए गए हैं।
कांग्रेस सरकार में अवैध घुसपैठ
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठिये अपने देश को लौटने लगे हैं। वापसी करने वाले बांग्लादेशियों के पास हर प्रकार का पहचान पत्र था और उन्होंने दावा किया था कि चार बार देश में मतदान भी किया है। कांग्रेस और उससे संबंधित इकाइयों ने इन अवैध घुसपैठियों को उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश सहित कई प्रदेशों में वैसे क्षेत्रों में बसाने और पहचान पत्र दिलाने में मदद की थी, जहां उनकी स्थिति कमजोर थी। इन प्रदेशों में ऐसी विधानसभा सीटों को चिन्हित किया जहां उनकी पार्टी कम मतों के अंतर से चुनाव हार जाती थी। इन्हें वहां बसाया गया। कई राज्य सरकारें खासकर विपक्षी सरकारों वाले प्रदेश इस तरह का ब्यौरा जुटाने में असमर्थता जता रहे हैं।
15 वर्षों का जिलावार आंकड़ा मांगा
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनसंख्या असंतुलन पर गठित उच्च स्तरीय समिति राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जानकारी जुटा रही है। समिति ने अवैध घुसपैठियों और अन्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए 35 बिंदुओं की एक विस्तृत प्रश्नावली तैयार की है। इस प्रश्नावली के तहत सरकारों और स्थानीय प्रशासनों से प्रमुख क्षेत्रों का धर्मवार और जिलावार पिछले 15 वर्षों का आंकड़ा और ब्यौरा मांगा है।
समिति ने क्या-क्या डाटा मांगा
पिछले 15 वर्षों में जिलों में बने मंदिर, मस्जिद, चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों का पूरा जिलावार विवरण मांगा गया है। इसके अलावा जनजातीय (ST) इलाकों में बने सरकारी, सहायता प्राप्त या निजी धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों का ब्योरा और स्थानीय आबादी व सामाजिक ताने-बाने पर इसके असर का आकलन भी किया जा रहा है। इसके तहत आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड के पंजीकरण में अचानक या असामान्य रूप से आए बदलावों की जानकारी को भी जुटाया जा रहा है। इस रिपोर्ट में विशेषकर ऐसे लोगों के मतदाता पंजीकरण का ब्यौरा मांगा जा रहा है, जिनके पास पिछली पीढ़ी के जन्म प्रमाण पत्र या पारिवारिक विरासत के दस्तावेज नहीं हैं।
वाहन पंजीकरण का डाटा
परिवहन विभाग से पिछले 15 वर्षों में हुए वाहनों के पंजीकरण का धर्मवार ब्योरा जुटाया जा रहा है। सीमावर्ती जिलों में वाणिज्यिक वाहन के लाइसेंस जारी होने की संख्या में आई अचानक और असामान्य बढ़ोतरी की विस्तृत जानकारी भी जुटाई जा रही है।
जनजातीय क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण
अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों की जमीनों पर अवैध कब्जे, खरीद-फरोख्त और संपत्ति हस्तांतरण के प्रतिरूप खंगाला जा रहा है। वनवासी समुदायों में हो रहे धर्मांतरण से जुड़ी खुफिया रिपोर्ट और विभिन्न आयोगों के आकलन का भी विस्तार से अध्ययन किया जा रहा हैं। वर्तमान में चल रहे डिटेंशन सेंटरों की स्थिति और अवैध प्रवासियों को वापस भेजे जाने के आंकड़े को भी गौर से देखा जाएगा।

















