एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर काफी हद तक निर्भर रहता था। हथियारों और सैन्य उपकरणों के लिए विदेशों से खरीदारी करनी पड़ती थी। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। भारत अब सिर्फ अपनी सेना के लिए आधुनिक हथियार नहीं बना रहा, बल्कि दुनिया के कई देशों को रक्षा उपकरण बेच भी रहा है। यह बदलाव बताता है कि भारत तकनीक, रिसर्च और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। पहले जब भी भारत के रक्षा निर्यात की बात होती थी, तो सबसे पहले ब्रह्मोस मिसाइल का नाम लिया जाता था। अब इसके साथ-साथ ड्रोन, रडार, स्मार्ट हथियार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे कई आधुनिक उत्पाद भी भारत की नई पहचान बन रहे हैं।
भारत की बढ़ती रक्षा ताकत
हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 63 प्रतिशत अधिक है। आज भारत 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। यही नहीं, इस क्षेत्र में काम करने वाली सरकारी और निजी कंपनियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इससे साफ है कि भारतीय रक्षा उत्पादों पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है। आज युद्ध का तरीका बदल चुका है। पहले टैंक, तोप और लड़ाकू विमान सबसे अहम होते थे, लेकिन अब ड्रोन, स्मार्ट मिसाइल और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि भारत भी इन नई रक्षा तकनीकों को तेजी से विकसित कर रहा है।
इसका एक अच्छा उदाहरण नोएडा की कंपनी आईजी डिफेंस का ‘काल’ ड्रोन है। कंपनी का दावा है कि यह ड्रोन लगभग 1,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है और 50 किलोग्राम तक का सामान या हथियार ले जाने में सक्षम है। आने वाले समय में इसे दूसरे देशों को निर्यात करने की भी तैयारी की जा रही है। यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दिखाता है। आज सिर्फ हथियार बनाना ही काफी नहीं है। उनमें इस्तेमाल होने वाले सेंसर, गाइडेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक तकनीक भी उतनी ही जरूरी होती है। यही सिस्टम किसी हथियार को अधिक सटीक और प्रभावी बनाते हैं। भारतीय कंपनियां अब इन आधुनिक तकनीकों पर भी तेजी से काम कर रही हैं, जिससे उनके उत्पाद वैश्विक बाजार में ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार और निजी कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं। भारत अब दूसरे देशों को भी अपने बनाए रक्षा उपकरण बेच रहा है। फिलीपींस ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदी है, अर्मेनिया ने पिनाका रॉकेट सिस्टम लिया है, और कई अन्य देशों ने आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, हेलीकॉप्टर तथा दूसरे रक्षा उपकरण खरीदे हैं। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
















