भारत लगातार और तेजी से अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करता जा रहा है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्यों के बीच जमीन और हवा में ही नहीं, पानी में भी भारत अपनी ताकत को और मजबूत करने की दिशा में कर रहा रहा है। इसी क्रम में जर्मनी के राजदूत जैस्पर वीक ने कहा कि जर्मनी भारत के साथ 8 अरब डॉलर का सौदा जल्द साइन करने को तैयार है। इस सौदे के तहत भारत को छह अगली पीढ़ी की पारंपरिक पनडुब्बियां मिलेंगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वीक बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने बताया कि दस्तावेज पहले ही फाइनल हो चुके हैं और जर्मन पक्ष ने इस पर सहमति दे दी है। अब भारतीय पक्ष को अपनी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। उन्होंने कहा कि जर्मनी कल भी इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है। इस डील में जर्मन डिफेंस कंपनी टीकेएमएस एडवांस्ड पनडुब्बी डिजाइन और तकनीक ट्रांसफर करेगी। भारत की तरफ से मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) इसके साथ पार्टनर बनेगी।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच रिश्ते
राजदूत ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए जर्मनी और भारत के रिश्तों की अहमियत और बढ़ गई है। दोनों देश व्यापार, रक्षा और लेबर मोबिलिटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने मौजूदा समय को “अनिश्चितता का युग” बताया। उनके मुताबिक रूस ने भरोसा और शांति को नुकसान पहुंचाया है, जबकि अमेरिका लगातार नियमों को बदल रहा है। इसलिए भारत और जर्मनी के बीच करीबी सहयोग जरूरी हो गया है।
राजदूत की प्राथमिकताएं
जैस्पर वीक हाल ही में भारत और भूटान के लिए जर्मनी के राजदूत बने हैं। उनसे पूछे जाने पर उन्होंने अपनी तीन मुख्य प्राथमिकताएं बताईं। पहली, भारत-यूरोपीय संघ के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर औपचारिक हस्ताक्षर। दूसरी, लेबर माइग्रेशन यानी कामगारों की आवाजाही। तीसरी, रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना।
रूसी तेल खरीद पर टिप्पणी
भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के सवाल पर वीक ने कहा कि जर्मनी समझता है कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश को ऊर्जा की जरूरत है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर रूसी तेल की खरीद कम की जाए तो मॉस्को के लिए यूक्रेन युद्ध का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा। उनके शब्दों में, “अगर हम रूस से कोई तेल नहीं खरीदेंगे तो युद्ध का वित्तपोषण रुक जाएगा।” इसके साथ ही उन्होंने लंबित स्टूडेंट वीजा के मुद्दे पर बताया कि जर्मनी इस समस्या को सुलझाने की दिशा में काम कर रहा है।












