कॉर्बेट पार्क: टाइगर रिज़र्व के बीच से गुजरने वाले नदियों जल धाराओं प्राकृतिक जल स्रोतों का इन दिनों परीक्षण किया जा रहा है।
पार्क के निदेशक डॉ साकेत बडोला ने बताया कि नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन की आधारभूत जीवनरेखाएँ हैं। मानव सभ्यता, कृषि, जैवविविधता, वन्यजीव और करोड़ों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नदियों पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि किसी नदी का स्वास्थ्य आंकलन मात्र उसके जल की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि उसके पूरे जलग्रहण क्षेत्र, वनों, जैवविविधता और मानवीय गतिविधियों का प्रतिबिंब होता है। इसलिए नदी की नियमित स्वास्थ्य निगरानी पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने शुरू किया था रामगंगा इनीशिएटिव
निदेशक ने बताया कि इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा ‘रामगंगा इनीशिएटिव’ की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य रामगंगा, कोसी, तथा अन्य सहायक नदियों की नियमित निगरानी एवं आकलन करना, नदी और उसके आसपास की जैवविविधता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना, तथा नदी में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण के न्यूनीकरण हेतु सामाजिक सहयोग से प्रभावी प्रयास करना है।
कॉर्बेट निदेशक के अनुसार, इस पहल के अंतर्गत, धनगढ़ी (रामनगर) में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा सहयोगी गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधियों के लिए ‘River Health Assessment’ विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन WWF-India के सहयोग से किया गया, जिसमें नदी के स्वास्थ्य के आकलन की वैज्ञानिक पद्धतियों, जैविक संकेतकों, निगरानी प्रक्रियाओं और संरक्षण प्रयासों पर प्रशिक्षण एवं विचार-विमर्श किया गया।
नदियों के स्वास्थ के द्वारा मानव एवं वन्यजीवों के स्वास्थ को बेहतर बनाने की ये पहल आगे भी जारी रहेगी। उत्तराखंड की नदियाँ, पर्वत और वन इसके सबसे बड़े assets हैं। हमें इनके संरक्षण हेतु सभी प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि पार्क कि नदिया प्राकृतिक रूप से स्वच्छ निर्मल और अविरल रहेंगी तो जलीय जीव पंनपेंगे उनके साथ साथ वन्यजीवो का भी जीवन चक्र बँधा हुआ है। जंगल में हैबिटैट कायम रहे ऐसे प्रयास जरुरी है।

















