बिश्केक में गूंजा 'मनास और महाभारत' का शंखनाद: भारत-किर्गिज़स्तान के बीच रचा गया नया इतिहास!
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बिश्केक में गूंजा ‘मनास और महाभारत’ का शंखनाद: भारत-किर्गिज़स्तान के बीच सांस्कृतिक समझौता, सुनील आंबेकर ने कही बड़ी बात

किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में अंतरराष्ट्रीय सभ्यतागत अध्ययन केंद्र 'मनास और महाभारत' का भव्य उद्घाटन किया गया। साथ ही प्रसिद्ध किर्गिज़ महाकाव्य 'मनास' के पहले हिंदी अनुवाद का विमोचन भी हुआ।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jul 11, 2026, 06:48 pm IST
inभारत, विश्व, धर्म-संस्कृति
Manas and Mahabharata Center Bishkek India Kyrgyzstan Relations Sunil Ambekar CSIR

बिश्केक (किर्गिज़स्तान)। भारत और किर्गिज़स्तान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में अंतरराष्ट्रीय सभ्यतागत अध्ययन केंद्र “मनास और महाभारत” (‘इंटरनेशनलセンター फॉर सिविलाइज़ेशनल स्टडीज़: मनास एंड महाभारत‘) का औपचारिक उद्घाटन किया गया है.

इस ऐतिहासिक अवसर पर किर्गिज़ लोकमानस की आत्मा कहे जाने वाले प्रसिद्ध महाकाव्य “मनास” के प्रथम हिंदी अनुवाद का गरिमामय विमोचन भी संपन्न हुआ. यह अनूठी पहल दोनों देशों के बीच मानवीय कूटनीति, अकादमिक विमर्श और सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करेगी.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा और त्रिपक्षीय अकादमिक समझौता

इस भव्य आयोजन में भाग लेने के लिए एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 4 से 7 जुलाई 2026 तक किर्गिज़स्तान का आधिकारिक दौरा किया. इस नए अंतरराष्ट्रीय केंद्र की स्थापना मनास राष्ट्रीय अकादमी द्वारा भारत की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR), नई दिल्ली के सहयोग से की गई है.

उद्घाटन समारोह के दौरान द्विपक्षीय शैक्षिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया. इसके तहत सीएसआईआर (CSIR), मनास राष्ट्रीय अकादमी और किर्गिज़स्तान के सात प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों (जिनमें केएनयू, बीएसयू, एयूसीए और अला-टू शामिल हैं) के बीच त्रिपक्षीय सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. इस पूरे वैश्विक आयोजन को भारत में किर्गिज़ दूतावास और किर्गिज़स्तान में स्थित भारतीय दूतावास ने अपना सक्रिय सहयोग प्रदान किया.

“महाभारत और मनास दोनों देशों की केंद्रीय सांस्कृतिक शक्ति” : सुनील आंबेकर

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने दोनों राष्ट्रों के गहरे सभ्यतागत जुड़ाव पर बल दिया. उन्होंने कहा कि भारत और किर्गिज़स्तान की जनता के पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों में मानव मूल्यों को लेकर उल्लेखनीय समानताएं हैं.

“जिस प्रकार महाभारत ने भारतीय संस्कृति, दर्शन और जीवन पद्धति पर अपना गहरा प्रभाव डाला है, ठीक उसी प्रकार ‘मनास’ महाकाव्य भी किर्गिज़ जनता के लिए हज़ारों वर्षों से एक केंद्रीय सांस्कृतिक और नैतिक शक्ति रहा है। यह अनुवाद दोनों संस्कृतियों को करीब लाएगा।” – सुनील आंबेकर, मुख्य अतिथि

सुनील आंबेकर ने इस महाकाव्य के सफल अनुवाद के लिए भारतीय विद्वानों की सराहना की और इसे राष्ट्रीय अकादमी मनास की एक ऐतिहासिक पहल बताया. उन्होंने राष्ट्रीय अकादमी “मनास” की अध्यक्ष प्रोफेसर नाज़ीरा आली किज़ी और गुलज़ात के अथक प्रयासों को भी रेखांकित किया.

यूरेशियाई संस्कृतियों के बीच सभ्यतागत संवाद का बनेगा मंच

सीएसआईआर के मानद निदेशक डॉ. पुनीत गौड़ ने केंद्र के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह नया संस्थान भारत और किर्गिज़स्तान के बीच वैज्ञानिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा. उन्होंने कहा कि यह केंद्र भारतीय प्रधानमंत्री के उस वैश्विक विज़न के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने यूरेशियाई संस्कृतियों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए एक ‘सभ्यतागत संवाद मंच’ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था.

केंद्र के अध्ययन के मुख्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र-

  • महाकाव्य धरोहर, इतिहास, सभ्यतागत प्रक्रियाओं और संस्कृति का गहन अध्ययन.
  • अंतरसंस्कृति संवाद, तुलनात्मक सभ्यतागत अध्ययन और मानवीय कूटनीति का विकास.
  • महाभारत और मनास की महाकाव्य परंपराओं पर केंद्रित शोध.
  • अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना और उभरते हुए युवा शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करना.

रूसी काव्यात्मक पुनर्कथन पर आधारित है “मनास” का हिंदी अनुवाद

इस पूरे समारोह का मुख्य आकर्षण भारतीय भाषाविदों द्वारा तैयार किया गया महाकाव्य “मनास” का हिंदी पाठ था. प्रख्यात भाषाविद् प्रो. हेमचंद्र पांडे (पूर्व निदेशक, रूसी भाषा केंद्र, JNU) और प्रो. रमाकांत द्विवेदी (अध्यक्ष, इंडिया-सेंट्रल एशिया फाउंडेशन) ने इसे तैयार किया है.

प्रोफेसर द्विवेदी ने बताया कि यह प्रथम हिंदी अनुवाद किर्गिज़ गणराज्य के प्रसिद्ध जन लेखक मार बैज़ीएव द्वारा रूसी भाषा में किए गए काव्यात्मक पुनर्कथन पर आधारित है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस हिंदी संस्करण में महाकाव्य की तीनों प्रमुख कड़ियाँ – “मनास,” “सेमेटेई” और “सेइतेक” पूरी तरह से शामिल हैं. यह प्रकाशन भारतीय पाठकों को मध्य एशिया की समृद्ध महाकाव्य परंपरा से सीधे परिचित कराएगा.

द्विपक्षीय बैठकें और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा:
यात्रा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बिश्केक में किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति प्रशासन में रणनीतिक योजना एवं सुधार विश्लेषण प्रभाग के प्रमुख ओक्तयाबर कपालबायेव के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी की. इस दौरान किर्गिज़ गणराज्य के विज्ञान एवं उच्च शिक्षा उप मंत्री दुरुसबेक कोज़ुएव, संस्कृति उप मंत्री साल्किन सार्नोगोएवा और भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव भी उपस्थित रहे. अपने दौरे के अंतिम चरण में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने किर्गिज़स्तान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के प्रतीक चिंगिज़ ऐत्मातोव हाउस संग्रहालय और अता-बेयित राष्ट्रीय ऐतिहासिक एवं स्मारक परिसर का भी दौरा किया.

Topics: CSIR India Kyrgyzstan MoUsInternational Relations NewsPanchjanya newsमनास और महाभारत अध्ययन केंद्रManas and Mahabharata Center Bishkekसुनील आंबेकर किर्गिज़स्तानमनास महाकाव्य हिंदी अनुवादभारत किर्गिज़स्तान सांस्कृतिक संबंध
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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