सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से फैला। इसमें दावा किया जा रहा था कि कोलकाता एयरपोर्ट के पास 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद (जिसे बांकड़ा मस्जिद भी कहते हैं) को बीजेपी-आरएसएस या हिंदुत्व समर्थकों ने तोड़ दिया है। कई पोस्ट में कहा गया कि इसे राम मंदिर बनाने के लिए गिराया गया। वीडियो में भीड़ को एक इमारत तोड़ते और नुकसान पहुँचाते दिखाया गया था।
असल में वीडियो कहाँ का है
फैक्ट चेक में पता चला कि यह वीडियो भारत का नहीं, बांग्लादेश का है। यह पाबना जिले के कुलुनिया गाँव का है। वहाँ मुस्तफा प्रमानिक नाम के शख्स का तीन मंजिला मकान भीड़ ने तोड़ा। यह शख्स 10 साल की लड़की कमरुन नहर कोली के रेप और मर्डर का आरोपी था। लड़की की हत्या के बाद गुस्साई भीड़ ने उसके घर पर हमला किया। फर्नीचर लूटा, दरवाजे-खिड़कियाँ तोड़ीं और छत तक नुकसान पहुँचाया। बांग्लादेश के अखबारों जैसे डेली ऑब्जर्वर, समाकल और जामुना टीवी ने 18 सितंबर 2026 के आसपास इसकी खबर दी। किसी भी रिपोर्ट में इसे मस्जिद नहीं बताया गया। यह सिर्फ आरोपी का घर था।

कोलकाता वाली मस्जिद की असल स्थिति
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास गौरीपुर जामा मस्जिद सच में मौजूद है। यह करीब 1890 के दशक में बनी थी और एयरपोर्ट की सेकेंडरी रनवे से करीब 165 मीटर दूर है। जुलाई 2026 में सुरक्षा और रनवे विस्तार के कारण वहाँ नमाज बंद कर दी गई थी। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने कहा था कि मस्जिद को शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन इसे तोड़ने या किसी भीड़ द्वारा नुकसान पहुँचाने की कोई विश्वसनीय खबर नहीं मिली। वीडियो में दिख रही इमारत और कोलकाता की मस्जिद में कोई मेल नहीं है।
खास बात ये है कि वीडियो के फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च किया गया। इससे बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट्स और पोस्ट्स निकलीं, जिनमें वही दृश्य थे। कई फैक्ट चेक संगठनों ने भी यही पाया कि वीडियो बांग्लादेश की घटना का है और कोलकाता की मस्जिद से इसका कोई नाता नहीं। यह दावा गलत तरीके से फैलाया गया था, जबकि असल घटना बांग्लादेश में एक आरोपी के घर से जुड़ी थी।
















