अक्षरम-2026 : रचनात्मकता का उत्सव
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अक्षरम-2026 : रचनात्मकता का उत्सव

गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार में हुए तीन दिवसीय महोत्सव में विचार, परंपरा और रचनात्मकता का संगम देखने को मिला। इस आयोजन ने भारतीय ज्ञान परंपरा, समकालीन विमर्श और सांस्कृतिक चेतना को एक सशक्त मंच प्रदान किया

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 22, 2026, 06:34 pm IST
inभारत, धर्म-संस्कृति, हरियाणा
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति देते छात्र-छात्राएं

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति देते छात्र-छात्राएं

अक्षरम्-2026 साहित्य, संवाद और संस्कृति के महोत्सव का आयोजन दिनांक 3 से 5 अप्रैल 2026 तक गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार में विश्वविद्यालय तथा जिल्द संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में साहित्य, संस्कृति, इतिहास, राष्ट्रीय चेतना, समकालीन विमर्श और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विविध आयामों पर व्यापक संवाद हुआ।

अक्षरम-2026 : विचार, संस्कार और राष्ट्र चेतना का संगम

महोत्सव का शुभारंभ

गत 3 अप्रैल को ‘अक्षरम् स्वदेशी हाट’ के उद्घाटन के साथ इसका शुभारंभ हुआ। इस हाट का उद्घाटन स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक अश्विनी महाजन ने किया। इसी अवसर पर विभाजन विभीषिका की स्मृति, हरियाणा का इतिहास एवं संस्कृति और ‘वंदे मातरम्’ विषय पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन संगीतकार अनु मलिक, डॉ. कमल गुप्ता (पूर्व कैबिनेट मंत्री, हरियाणा), हितेश शंकर (संपादक, पाञ्चजन्य), मनोज कुमार (राष्ट्रीय संगठन मंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्) और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इसके उपरांत एक बौद्धिक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर विचार-विमर्श हुआ।

दूसरे दिन 4 अप्रैल की प्रातः हरियाणा के बिंद्र दनौदा द्वारा राम मंदिर, गुरु तेग बहादुर के बलिदान तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा से संबंधित विषयों पर व्याख्यान एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। इसके बाद सीएसआर ऑडिटोरियम के मुख्य सभागार में कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर हरियाणा सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तथा लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक श्री जे. नंदकुमार ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में हितेश शंकर (संपादक, पाञ्चजन्य), प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री (कार्यकारी उपाध्यक्ष, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी), डॉ. अमित आर्य (कुलपति, सुपवा), प्रो. बी. आर. कम्बोज (कुलपति, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार) तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विजय कुमार मंचासीन रहे और सभी ने वैचारिक सत्र में अपना योगदान दिया। इसके बाद विभिन्न तकनीकी एवं वैचारिक सत्रों में समकालीन विमर्श के अनेक पक्षों पर चर्चा हुई।

‘वर्चुअल बनाम वास्तविक नैरेटिव’ विषय पर स्तंभकार रतन शारदा, अखिलेश शर्मा, विष्णु शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। समानांतर सत्र ‘पुरखे और पुरुषार्थ : गुरु तेग बहादुर’ पुस्तक चर्चा में प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री, संत रघुबीर सिंह बाजवा तथा प्रो. कौशलेंद्र तिवारी ने विचार व्यक्त किए। ‘डेमोग्राफी परिवर्तन और देश की सुरक्षा’ विषयक सत्र में अशोक सैनी (जिलाध्यक्ष, भाजपा, हांसी), रा.स्व.संघ के प्रचारक सतीश गोकुल पांडा, भारतीय नीति प्रतिष्ठान में निदेशक कुलदीप रत्नू, श्यामप्रसाद मुखर्जी शोध संस्थान के निदेशक बिनय सिंह ने अपने विचार रखे।‘

साहित्य और सिनेमा में लोककथा’ विषयक सत्र में पद्मश्री मालिनी अवस्थी, पद्मश्री चंद्र प्रकाश द्विवेदी तथा लेखक राहुल नील ने सहभागिता करते हुए सत्र को गरिमा प्रदान की। इसके पश्चात ‘भारत विभाजन : पीड़ा और पाठ’ विषय पर प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री, श्री राजीव तुली तथा श्री कृष्णानंद सागर ने विस्तृत परिचर्चा की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अंतर्गत अदिति कॉलेज दिल्ली की डॉ. नीलम राठी की टीम द्वारा ‘बंटवारे का दर्द’ विषय पर नाट्य प्रस्तुति तथा भारती दीक्षित द्वारा ‘सुनो कहानी- वंदे मातरम्’ की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। सायंकालीन भक्ति संगीत सत्र में हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मोहनलाल बडौली की उपस्थिति रही, जिन्होंने सांस्कृतिक चेतना और स्वदेशी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में दौरान भारत के संविधान पर केंद्रित नौ महत्वपूर्ण शोध-पत्रों का वाचन देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों द्वारा किया गया। कवि सम्मेलन में राष्ट्र, देशभक्ति और रामचरित पर आधारित काव्य पाठ दस कवियों एवं कवयित्रियों द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रसिद्ध हिंदी लेखक नीलोत्पल मृणाल ने साहित्य की लेखन विधा और समकालीन विचारधारा पर व्याख्यान दिया।

‘मीडिया : सच का झूठ’ विषयक सत्र में लेखक राजीव रंजन प्रसाद, फिल्म समीक्षक विष्णु शर्मा और पत्रकार रीमा गौतम ने युवाओं को मीडिया की वास्तविकताओं से अवगत कराया। ‘हरियाणा का साहित्य और पत्रकारिता में योगदान’ विषय पर श्री रणधीर पनिहार (विधायक, नलवा), डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान तथा प्रो. अमित आर्य ने अपने विचार प्रस्तुत किए। ‘ए.आई. लेखन और रचनात्मकता’ विषयक सत्र में श्री प्रत्यूष रंजन, श्री अनिल पांडेय तथा श्री गौरव ललित ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। ‘यात्रा एवं कहानी लेखन कार्यशाला’ में श्री आदित्य ओम, श्री राहुल चौधरी नील, पीयूष पांडेय, प्रभांशु ओझा तथा श्री अतुल गंगवार ने लेखन की सूक्ष्मताओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया। ‘किताब लेखन कार्यशाला – आप लिखेंगे तो दुनिया पढ़ेगी’ ने लेखकीय दृष्टिकोण को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। ‘साहित्य में लैंगिक विमर्श’ सत्र में श्री गोपिशंकर एम तथा डॉ. सोनाली मिश्रा ने विषय पर विस्तार से चर्चा की।

अक्षरम-2026 : ‘जनसांख्यिकी बदलने से भविष्य भी बदल जाता है’

अक्षरम-2026 : ‘बाबासाहब का दृष्टिकोण आज भी समावेशी’

सांस्कृतिक संध्या

तीनों दिनों में सांस्कृतिक संध्याओं का भी आयोजन किया गया, जिनमें अलग-अलग बैंड प्रस्तुतियों के माध्यम से विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘कहानी कैफ़े’, ‘ओपन मंच’ तथा ‘गपकही’ जैसे मंच भी स्थापित किए गए।

इस प्रकार अक्षरम्-2026 के अंतर्गत विभिन्न विधाओं पर कुल सात मंच स्थापित किए गए, जिन पर विभिन्न विधाओं से संबंधित 60 से अधिक सत्र आयोजित किए गए। इस आयोजन में विश्वविद्यालय के गुरु जम्भेश्वर जी महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान, मीडिया एवं जनसंचार विभाग, हिंदी विभाग, दत्तात्रेय ठेंगड़ी पीठ (अर्थशास्त्र विभाग), मनोविज्ञान विभाग, विश्वविद्यालय पुस्तकालय, विद्यार्थी कल्याण विभाग तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रकोष्ठ द्वारा संयुक्त रूप से सहभागिता एवं संयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजन में ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार, हरियाणा हेरिटेज एवं पर्यटन विभाग, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा दादा लखमीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (सुपवा), रोहतक की समन्वयक सहभागिता रही।

अक्षरम-2026 : ‘जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें युवा’

महोत्सव के अंतिम दिन 5 अप्रैल को तीसरे दिन दर्शकों के लिए ‘शतक’ फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इसके पश्चात ‘जेन-जी डायलॉग’ विषय पर आईपीएस अधिकारी निधिन वाल्सन और तृप्ति सिंघल सोमानी ने युवाओं से संवाद किया। ‘जलवायु परिवर्तन: विनाश बनाम विकास’ सत्र में प्रो. नरसी राम बिश्नोई और पत्रकार शिप्रा माथुर ने पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास के संदर्भ में अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन सत्र हरियाणा के माननीय राज्यपाल असीम कुमार घोष के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। इस दौरान दीपक भारद्वाज की टीम द्वारा ‘रानी अबक्का’ की वीरता और देशभक्ति पर आधारित नाट्य प्रस्तुति हुई। इसके पश्चात श्री विनीत चौहान द्वारा प्रस्तुत ‘भारत गाथा’ में भारत के गौरवशाली इतिहास, राम मंदिर निर्माण, धारा 370 की समाप्ति तथा पुलवामा हमले के बाद भारत की दृढ़ राष्ट्रीय प्रतिक्रिया को प्रभावपूर्ण ढंग से चित्रित किया गया।

अक्षरम-2026 :  ‘साहित्य का मूल तत्व राष्ट्र की एकता’

Topics: समकालीन विमर्शदेश की सुरक्षाराम मंदिर एवं राष्ट्रवादभारतीय ज्ञान परंपरासांस्कृतिक चेतनापाञ्चजन्य विशेषराष्ट्रीय चेतनाडेमोग्राफी परिवर्तनअक्षरम-2026साहित्य महोत्सवस्वदेशी हाटरचनात्मक अभिव्यक्ति
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