किसी भी व्यक्ति की बहादुरी, देश सेवा, समाज सेवा या अन्य किसी भी प्रकार के अच्छे काम को सलाम करने के लिए उसका धर्म या फिर राजनीति नहीं देखी जाती है। मगर स्मित मच्छार के मामले में यह कहावत भारत के लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम पर सटीक नहीं बैठती है। 30 सितंबर 2026 की रात को फ्लाई दुबई की फ्लाइट FZ 1073 पर हुई घटना पर नज़र डालते हैं तो भारत के विपक्षी लेफ्ट इकोसिस्टम और तथाकथित लिबरल इन्फ्लुएंसर्स की चुप्पी उनके असल चेहरे को उजागर कर देता है। दुनिया के अधिकतर देश कैप्टन स्मित मच्छार की हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार को ट्रू हीरो कहकर गौरवान्वित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि कैप्टन स्मित मच्छार हीरो हैं। गंभीर चोट के बावजूद भी उन्होंने सैकड़ों जिंदगियां बचाई।
कांग्रेस-लेफ्ट इकोसिस्टम में सन्नाटा
मगर भारत में विपक्षी लेफ्ट इकोसिस्टम, कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और उनके आसपास का पूरा इकोसिस्टम को जैसे सांप सूंघ गया है। सवाल है कि क्या किसी भारतीय की बहादुरी को सलाम करना भी अब वोट बैंक की तराजू पर तोलकर किया जाएगा, जैसा की ये कर रहे हैं। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट FZ 1073 (Boeing 737 MAX 8) विमान में करीब 174 यात्री थे जिनमें अधिकांश इजरायली नागरिक थे। जानकारी के मुताबिक, इनमें 27 बच्चे भी शामिल थे। उड़ान के दौरान जब एयरक्राफ्ट सऊदी अरब के ऊपर से उड़ रहा था, उसी समय इजराइल के अनुसार, ओमानी नागरिक मुस्लिम को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला करके प्लेन को क्रैश करने की कोशिश की।
फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा (जैसे Flightradar24) के अनुसार, बोइंग 737 MAX विमान जब सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र के ऊपर था तब वह करीब 34,000 फीट की ऊंचाई से अचानक गिरकर 16,600 फीट पर आ गया। विमान ने महज 2 मिनट के भीतर (और कुछ सेकंड्स के तीव्र गोते में) लगभग 17,400 फीट की ऊंचाई खो दिया था। कुछ ही सेकण्ड्स में एक बड़ा हादसा हो सकता था। लेकिन कैप्टन स्मित मच्छार ने उसी मौके पर वैसी बहादुरी दिखाई जिसे दुनिया सलाम कर रही है। कैप्टन स्मित मच्छार गंभीर रूप से घायल और खून से लथपथ होने के बावजूद भी कॉकपिट का दरवाजा खोलकर कैबिन क्रू और पैसेंजर्स को अंदर आने और हमलावर को काबू करने का मौका दिया।
जिससे कि लोगों की ज़िन्दगी को बचाया जा सके। विमान में मौजूद ऑफ ड्यूटी पायलट्स ने कंट्रोल संभाला और सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग करवाने में सफलता प्राप्त की। कैप्टन मच्छार का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। इजराइयली डिफेंस मिनिस्टर ने इसे जिहादी टेरर अटैक करार दिया है। इसके असल मकसद की जांच की जा रही है। विमान के को- पायलट को गिरफ्तार कर लिया गया है, मगर नाम सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है।
नेतन्याहू ने की तारीफ
इस घटना के सुखद अंत के बाद में तारीफों का सिलसिला शुरू है। नेतन्याहू ने लिखा कि चाकू लगने और गंभीर चोट के बावजूद भी कैप्टन ने मुकाबला किया, दरवाजा खोला और यात्रियों व क्रू को हमलावर पर काबू पाने का मौका दिया, जिससे बीच आसमान में तबाही टल गई। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार को 174 लोगों की जान बचाने का श्रेय दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सबसे बड़े खतरे के सामने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने का अटूट संकल्प दिखाया। उनकी वीरता ने सैकड़ों जिंदगियां बचाई और एक बड़ी त्रासदी टाल दी गई। भारत को उन पर गर्व है। अमेरिका से भी तारीफ की झड़ी लगी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की है।
दुनियाभर से तारीफें, लेकिन भारत का विपक्ष सन्नाटे
लेकिन सवाल है कि राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, विपक्षी दलों के नेताओं और पूरा विपक्षी मोर्चा कहां है? प्रियंका वाड्रा और कांग्रेस पार्टी हमेशा फिलिस्तीन के समर्थन में रहती हैं और रैलियों, बयानों व सोशल मीडिया पर खुलकर समर्थन करती हैं। लेकिन, जब एक भारतीय पायलट ने घायल अवस्था में 174 लोगों, जिनमे अधिकतर इजराइली और यहूदियों की जान बचाते हैं तो इनके सोशल मीडिया से एक शब्द भी नहीं निकलता है।
क्या स्मित का ब्राम्हण होना विपक्ष को रास नहीं आ रहा ?
क्या इन लोगों की परेशानी का कारण पायलट का गुजराती नागर ब्राह्मण का होना है। नागर ब्राह्मणों के इष्टदेव और कुलदेवता हाटकेश्वर महादेव का ऐतिहासिक मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर शहर में ही स्थित है। क्या इन लोगों के लिए मोदी विरोध इतना गहरा हो गया है कि एक भारतीय की बहादुरी भी इनकी आंखों में कांटा बन गई है या तुष्टिकरण राष्ट्रीय गर्व से ऊपर हो गया है।
जानमाल पर राजनीति नहीं होनी चाहिए मगर जब दुनिया सलाम कर रही हो तब चुप्पी क्यों? अगर कैप्टन स्मित मच्छार के बदले यह जांबाज़ी का कार्य किसी मुस्लिम ने किया होता तो Twitter और प्रेस कॉन्फ्रेंस का शोर अभी तक जारी रहता। विपक्षी दल अपने मुस्लिम वोट बैंक देख के चलते चुप्पी साधे हुए हैं जो उनकी पुराणी नीति है। लेकिन ध्रुव राठी जैसे इन्फ्लुएंसर्स और पूरा लेफ्ट लिबरल क्यों चुप है? इन लोगों ने कैप्टन स्मित की हिम्मत पर एक लाइन क्यों नहीं लिखी? क्या उनकी समस्या है कि बचाने वाला हिंदू भारतीय था और हमला करने वाला मुस्लिम और बचाए गए ज्यादातर इजराइली थे। क्या इनके लिए बहादुरी का मापदंड पीड़ित की पहचान और हमलावर की पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है? हर छोटे मुद्दे पर घंटों वीडियो बनाने वाले 174 जिंदगियों के बचने पर मौन क्यों हैं? इनकी चुप्पी ही इनकी पहचान है।
हमलावर की पहचान छुपाने की कोशिशें जारी
सवाल ये है कि अगर कॉकपिट का दरवाजा नहीं खुलता और प्लेन क्रैश हो जाता तब क्या होता? आक्रमण करने वाले का नाम और राष्ट्रीयता को छुपाने की कोशिशें पहले से दिख रही थी। कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में पायलटों की पहचान को लेकर के उलझन वाले दावे किए गए थे। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद हाई जैकर की पहचान छिपाकर बचाने वाले भारतीय के नाम को आगे बढ़ाया गया जिससे कि उसकी पहचान को छुपाया जा सके। अगर त्रासदी हो जाती तो ब्लैक बॉक्स इन्वेस्टिगेशन और नैरेटिव पर सवाल खड़े करने वाले कहते मिलते कि भारतीय कैप्टन की कार्यवाही संदिग्ध थी। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पायलटों, डॉक्टरों, इंजीनियरों और नाविकों पर निशाना साधने वाले नैरेटिव देखा गया है। अधिकतर जगहों पर भारत की सफलता और भारतीयों की क्षमता को कमजोर करने का प्रयास किया जाता हैं।












