राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इससे गुजरात उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है जहां यह कानून लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने इसे गजट में प्रकाशित कर दिया है। कानून की शुरुआत अलग से नोटिफिकेशन से होगी। अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों पर यह लागू नहीं होगा।
विधानसभा से पास होने का सफर
मार्च 2026 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया था। बहस के बाद बहुमत से पास हो गया। उन्होंने कहा था कि इसका मकसद समाज में सद्भाव बढ़ाना और महिलाओं के कानूनी अधिकार मजबूत करना है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में शामिल सुधारों में से एक है।
शादी और तलाक के नए नियम
अब शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो गया है। समय पर नहीं कराने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लग सकता है। शादी की रस्में अपनी धार्मिक रीति से हो सकती हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। लड़के की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल रखी गई है।
एक से ज्यादा शादी पूरी तरह बंद कर दी गई है। अगर कोई जोर-जबरदस्ती या दबाव डालकर शादी कराता है तो सात साल तक की जेल हो सकती है। कोर्ट के आदेश के बिना तलाक लेने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। हलाला जैसी प्रथाओं पर भी रोक लगा दी गई है। तलाक के बाद जोड़े बिना किसी शर्त के दोबारा शादी कर सकते हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप के प्रावधान
लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपना रिश्ता रजिस्टर कराना होगा। रिश्ता खत्म होने पर भी प्रशासन को बताना जरूरी है। एक महीने से ज्यादा बिना रजिस्ट्रेशन के रहने पर तीन महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। अगर कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है तो उसके माता-पिता या अभिभावक को सूचना दी जाएगी।
लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को कानूनी तौर पर वैध संतान माना जाएगा। अगर पार्टनर महिला को छोड़ देता है तो वह गुजारा भत्ता मांग सकती है।
विरासत के नियम एक जैसे
कानून में विरासत के नियम भी एक जैसे रखे गए हैं। बेटे-बेटी दोनों को बराबर अधिकार मिलेंगे। शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन से जुड़े मामलों को एक फ्रेमवर्क में लाया गया है। राज्य के बाहर रहने वाले गुजरात के निवासियों पर भी यह लागू हो सकता है। कानून का नाम गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026 है। राष्ट्रपति की मंजूरी 17 सितंबर को मिली थी और 1 अक्टूबर को गजट में छपा।
















