सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : महमूद गजनवी का जिहाद
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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : महमूद गजनवी का जिहाद

महमूद गजनवी ने भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ दिया था। उसने सोमनाथ को कब्जाने और नष्ट करने के लिए बहुत प्रयास किए। उसे लगता था कि हिंदुओं को मुसलमान बना देगा।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 13, 2026, 07:36 pm IST
in भारत, विश्लेषण, गुजरात, धर्म-संस्कृति

वर्ष 997 में सबुक्तिगिन ने छोटे बेटे इस्माइल को गजनी का उत्तराधिकारी बनाया, किंतु दूसरे बेटे महमूद (27 वर्षीय) ने गृहयुद्ध में उसे हराकर गद्दी हथिया ली। महत्वाकांक्षी महमूद ने खलीफा की मान्यता मिलने पर प्रतिज्ञा की कि वह ‘हर साल भारत के काफिरों पर आक्रमण करेगा।’ 1030 में अपनी मृत्यु तक उसने उत्तर भारत, खासकर पंजाब पर 17 हमले किए, जिससे मुस्लिम प्रभाव स्थापित हुआ। एचएम. इलियट के अनुसार, “उसने (महमूद) भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ दिया था। उसने सोमनाथ को कब्जाने और नष्ट करने के लिए बहुत प्रयास किए। उसे लगता था कि हिंदुओं को मुसलमान बना देगा।”

महमूद का सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती अभियान जयपाल के विरुद्ध था। 1000-01 में पेशावर के पास उसने जयपाल को हराया। मुस्लिम इतिहासकार अल-उत्बी लिखता है, “अभी दोपहर भी नहीं हुई थी कि मुसलमानों ने अल्लाह के शत्रु (जयपाल) के विरुद्ध बदला लिया और 15,000 लोगों को काटकर जमीन पर कालीन की भांति बिछा दिया, ताकि जंगली जानवर और पक्षी उन्हें अपना भोजन बना सकें। अल्लाह की कृपा से हमें लूट का इतना माल मिला कि उसकी गिनती भी संभव नहीं है। इसमें अनगिनत पुरुष और महिलाएं भी गुलाम के रूप में शामिल हैं।” इस युद्ध में महमूद ने जयपाल को बंदी बनाया और 50 हाथियों की मांग की। आनंदपाल ने मांग पूरी कर पिता को मुक्त कराया। इस पूरे घटनाक्रम से जयपाल को गहरा सदमा लगा और एक म्लेच्छ का स्पर्श होने के चलते उन्होंने दोबारा शासन चलाना नैतिक रूप से स्वीकार नहीं किया और अपने केश कटवाकर स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया। (एच.एम. इलियट एवं जॉन डॉनसन, द हिस्ट्री ऑफ इंडिया ऐज टोल्ड बाई इट्स ओन हिस्टोरियंस, भाग-2, पृ. 27)

आनंदपाल गद्दी पर बैठा। उधर, महमूद ने पंजाब के आसपास के क्षेत्र अधीन कर लिए, जिससे खतरा बढ़ा। आनंदपाल ने वर्षों तक महमूद का मुकाबला किया। हर बार महमूद लूटमार करके गजनी लौट जाता था। बाद में आनंदपाल के उत्तराधिकारियों ने वर्षों तक महमूद को पंजाब सीमाओं से आगे बढ़ने नहीं दिया, किंतु लगातार हमलों से हिंदूशाही साम्राज्य संकुचित हो गया। तब गजनवी को पंजाब के आखिरी छोर यानी गंगा-यमुना के मैदानी इलाकों तक घुसने का रास्ता मिल गया। इतिहासकार एच.एम. इलियट के अनुसार, इस अवधि में महमूद ने नगरकोट, भठिंडा और थानेश्वर में भयंकर लूट मचाई। अपार धन लूटा, जिसे ले जाने के लिए जानवर कम पड़ गए। इस्लाम न स्वीकारने वाले हिंदुओं को मार डाला। थानेश्वर के प्रसिद्ध चक्रस्वामी (संभवतः भगवान श्रीकृष्ण) मंदिर को लूटा और मूर्ति को गजनी ले जाकर सड़क किनारे फेंक दिया।

थानेश्वर के बारे में अल-उत्बी लिखता है, “थानेश्वर के सरदार ने अल्लाह को स्वीकार नहीं किया। सुलतान की आज्ञा से हिंदू-बौद्धों का रक्त इस प्रकार बहा कि नदी का पानी पीने योग्य न रहा। यदि रात न हुई होती तो न जाने और कितने लोगों का नरसंहार होता।” इस नरसंहार पर एक अन्य मुस्लिम इतिहासकार फरिश्ता लिखता है, “महमूद की सेना 2 लाख लोगों को गजनी बंदी बनाकर ले गई, जिससे गजनी भारतीय नगर जैसा लगने लगा था।”

महमूद ने लूट, नरसंहार और जबरन कन्वर्जन अभियान के तहत मथुरा-कन्नौज को भी रौंद दिया। इस दौरान उसका सामना अजमेर के चौहान, अन्हिलवाड़ा (पश्चिम भारत) के चालुक्य और कन्नौज के गहड़वार राजाओं से हुआ। लेकिन उसका सबसे विध्वंसकारी हमला सोमनाथ मंदिर पर हुआ। वह 17 अक्तूबर, 1024 को गजनी से निकला और 20 नंवबर को मुल्तान पहुंचा। फिर राजपूताना का मरुस्थल पार कर 6 जनवरी, 1026 को सोमनाथ पहुंचा। महाराजा भीमदेव के साथ कई दिनों तक चले युद्ध में 50,000 योद्धा मंदिर को बचाने के लिए बलिदान हुए। महमूद ने सोमनाथ की मूर्ति के कई टुकड़े कर मंदिर को जला दिया। मिन्हाज सिराज के अनुसार, उसने मूर्ति के चार टुकड़े किए थे। एक को गजनी की जामा मस्जिद में, दूसरे को शाही महल की सीढ़ियों पर, तीसरा मक्का और चौथा टुकड़ा मदीना भेज दिया। (एच.एम. इलियट एवं जॉन डॉनसन, द हिस्ट्री ऑफ इंडिया ऐज टोल्ड बाई इट्स ओन हिस्टोरियंस, भाग-2, पृ. 271)

मंदिर के गर्भगृह में स्थित इस मूर्ति की गिनती संसार की आश्चर्यजनक वस्तुओं में की जाती थी। यह नीचे या ऊपर बिना किसी सहारे के टिकी हुई थी। हालांकि महमूद को जल्दी ही भागना पड़ गया, क्योंकि वह काठियावाड़ में फंस गया था। एक ओर राजा परम देव थे और दूसरी तरफ समुद्र। जैसे-तैसे महमूद 2 अप्रैल, 1926 को गजनी पहुंचा। इसके बाद उसने भारत के विरुद्ध अभियान रोक दिया।
(के.एम. मुंशी, सोमनाथ : द श्राइन इटर्नल, पृ. 39)

ऐसे हुआ था सोमनाथ मन्दिर का विध्वंस

Topics: पाञ्चजन्य विशेषबुतशिकनहिंदूशाही वंशआनंदपाल. महाराजा भीमदेवगजनवी युद्धराजा परम देवपेशावर युद्धनगरकोटज्योतिर्लिंगM जिहादहिंदूशाही साम्राज्यमहमूद गजनवी
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