एम्नेस्टी इंटरनेशनल की जाँच में 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुर्द इलाकों में मारे गए लोगों के बारे में जानकारी सामने आई है। यह रिपोर्ट ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ आंदोलन से जुड़ी है, जो तेहरान में नैतिकता पुलिस की हिरासत में कुर्द महिला महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुआ था।
एम्नेस्टी ने कुरदिस्तान, करमांशाह और वेस्ट अज़रबैजान प्रांतों के 17 काउंटियों में 95 कुर्द प्रदर्शनकारियों और आम लोगों की गैरकानूनी हत्या का दस्तावेजीकरण किया है। इनमें 13 बच्चे भी शामिल हैं। जाँच में बताया गया है कि सुरक्षा बलों ने नागरिकों पर नजदीक से गोली चलाई, भाग रहे लोगों का पीछा किया और घायलों की मदद रोकने की कोशिश की।
घायलों को मदद नहीं मिलने के मामले
सनांदज में 8 अक्टूबर 2022 को 30 साल के यहया रहीमी की गाड़ी में गोली मार दी गई। वे ट्रैफिक में फँसे थे और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में हॉर्न बजा रहे थे। गवाहों के अनुसार सादे कपड़ों वाले एजेंटों ने गाड़ी की खिड़कियाँ तोड़ीं और लगभग आधे मीटर की दूरी से शॉटगन से धातु के छर्रे उनके सिर पर दागे। एम्नेस्टी ने पाँच वीडियो और दफन प्रमाणपत्र जाँचे, जिसमें दिमाग को भारी नुकसान और खोपड़ी की हड्डियाँ टूटी हुई बताई गईं।
17 नवंबर 2022 को सनांदज में ही 36 साल के शाहू बहमानी को गोली लगी। वे पहले मारे गए लोगों की याद में जमावड़े के बाद प्रदर्शन में थे। गवाहों ने बताया कि वे 30 से 40 मिनट तक खून बहते रहे, जबकि सुरक्षा बल मदद करने वालों पर भी गोली चलाते रहे। बल हटने के बाद लोग उन्हें अस्पताल ले गए, जहाँ उनकी मौत हो गई। एक गवाह ने कहा, “एजेंट अपनी नजर में आने वाले किसी भी व्यक्ति पर गोली चला देते थे।”
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करमांशाह में 20 सितंबर को मीनू मजीदी पुलिस के स्पेशल कोहोर्ट्स से भागते हुए मारी गईं। एजेंट मोटरसाइकिलों पर पीछा करते हुए शॉटगन से धातु के छर्रे दागते रहे और नजदीक से उन्हें मारा। बनेह में 27 अक्टूबर को फेरेदून फराजी अपने कार्यस्थल की खिड़की से बाहर देख रहे थे जब सुरक्षा बलों की गोली लग गई। वे भाग रहे लोगों पर फायरिंग कर रहे थे।
ज्यादा सैन्य तरीके से कार्रवाई
एम्नेस्टी ने कुरदिस्तान प्रांत में 35, करमांशाह में 19 और वेस्ट अज़रबैजान में 41 गैरकानूनी हत्याएँ दर्ज कीं। इन तीन प्रांतों में सुरक्षा बलों ने बाकी जगहों की तुलना में ज्यादा सैन्य तरीके अपनाए। प्रदर्शन शुरू होते ही असाल्ट राइफल, मार्कसमैन राइफल, सबमशीन गन और पिकअप ट्रकों पर लगे भारी मशीन गन जैसे हथियार इस्तेमाल किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, इन हत्याओं में घातक ताकत का इस्तेमाल किसी आसन्न खतरे से बचाव के लिए नहीं, बल्कि प्रदर्शन फैलाने, डराने या सजा देने के लिए किया गया। एम्नेस्टी ने कुल 326 मौतों का रिकॉर्ड रखा, जिनमें से लगभग 62 प्रतिशत कुर्द और बलूच पीड़ित थे। सिस्तान और बलूचिस्तान में 106 बलूच प्रदर्शनकारियों और आम लोगों की मौत हुई।
एम्नेस्टी ने कहा कि यह ऊँचा आँकड़ा सिर्फ प्रदर्शनों के आकार से नहीं समझाया जा सकता। उसने पाया कि कुर्द और बलूच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हत्या और यातना राजनीतिक और जातीय आधार पर भेदभावपूर्ण इरादे से की गई, जो मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में उत्पीड़न के तत्व पूरे करती है। एम्नेस्टी ने अपनी जाँच 16 सितंबर 2026 को प्रकाशित करने से पहले ईरान के नेतृत्व और वरिष्ठ अधिकारियों से टिप्पणी माँगी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

















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