5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद से ही अवामी लीग के नेताओं पर दमनचक्र चल रहा है और इसे फासीवाद से लड़ने के नाम पर किया जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि फासीवादी ताकतों को समाप्त किया जा रहा है। उन पर हुए हमलों को यह कहकर उचित ठहराने का प्रयास किया गया कि चूंकि शेख हसीना सरकार ने 15 वर्षों में एक फासीवादी सरकार की तरह काम किया था, इसलिए अब जनता का आक्रोश है और उनके मानवता विरोधी कदमों के प्रतिकार में यह हिंसा हुई।
परंतु 2026 में सरकार बनने के बाद भी ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जिनमें अवामी लीग के कार्यकर्ताओं पर एक बार फिर से कार्यवाही की जा रही है और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं का यह कहना है कि उनके साथ राजनीतिक प्रतिशोध के कारण यह कदम उठाए जा रहे हैं।
क्या हुआ सितंबर के अंतिम सप्ताह में?
सितंबर के अंतिम सप्ताह में अचानक से ही अवामी लीग के कार्यकर्ताओं पर कार्यवाही तेज हो गई है। न केवल अवामी लीग बल्कि उसके सहयोगी संगठन के कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ भी पुलिस और सुरक्षाबलों ने कई कड़े कदम उठाए हैं।
26 सितंबर: जसोड कार्यालय पर छापा और गिरफ्तारियाँ
यह सब कार्यवाहियाँ शुरू हुईं बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाउद्दीन अहमद के पुलिस-सप्ताह 2026 के दौरान दिए गए एक बयान के बाद। अहमद ने कहा कि जो भी पुलिसकर्मी “फासीवाद और अवामी लीग ताकतों के सहयोगियों” को कानून के दायरे में लाएंगे तो उन्हें विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होनें यह भी कहा था कि ऐसे लोग काफी समय से छिपकर बैठे हैं।
उन्होनें पुलिस से यह भी कहा था कि वे अपनी खुफिया सेवाओं का प्रयोग इन लोगों को खोजने में करें।
इतना सुनते ही पुलिस ने कदम उठाने आरंभ कर दिए। और उन्होनें अवामी लीग और उसके सहयोगी दलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। स्थानीय मीडिया के अनुसार सबसे पहला कदम उन्होनें जसोड अर्थात जातीय समाजवादी दल के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर उठाया।
जसोड दरअसल एक वामपंथी झुकाव वाला दल है। और इसे अवामी लीग का सहयोगी माना जाता है। सबसे रोचक बात यह है कि जब पुलिस ने इसके कार्यालय पर छापा मारकर लगभग 50 कार्यकर्ताओं को हिरासत मे लिया तो पुलिस का कहना था कि बैठक के दौरान इसके कार्यकर्ता “जय बांग्ला” के नारे लगा रहे थे।
अब यह प्रश्न उठता है कि क्या जय बांग्ला के नारे बांग्लादेश में लगाना अपराध है? यह बात सत्य है कि जय बांग्ला के नारे को राष्ट्रीय नारे के रूप में वहाँ के कोर्ट द्वारा रद्द किया जा चुका है, मगर यह भी सच है कि यह उन लोगों का नारा है, जिन्होनें बांग्ला पहचान के लिए संघर्ष किया था।
तो क्या इससे यह समझा जाए कि बांग्लादेश में अब बांग्ला पहचान को लेकर गर्व भी अपराध बन गया है? ऐसा वहाँ पर तमाम निष्पक्ष लोग प्रश्न कर रहे हैं।
बहसें कई हो रही हैं, और सबसे बड़ी बहस इस बात को लेकर हो रही है कि क्या राजनीतिक विरोध और समर्थन ही फासीवाद जैसी बातों को तय करेगा?
28 सितंबर: शेख हसीना के जन्मदिन समारोह पर प्रतिबंध और 15 लोगों की गिरफ्तारियाँ
newagebd के अनुसार बांग्लादेश की पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का जन्मदिन मनाने की योजना बना रहे 15 नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। उत्तर डिवीजन डेप्यूटी कमिश्नर रेजाऊल करीम ने कहा इन सभी कार्यकर्ताओं को पूर्व नेता शौकत हसानूर रहमान रिमोन के आवास से शाम 5.30 बजे शाम को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के पास यह सूचना थी कि छात्र लीग के नेता और कार्यकर्ता वहाँ पर एकत्र हुए हैं। पुलिस का कहना था कि वे लोग शेख हसीना की 79वीं सालगिरह मनाने के लिए केक काटने वाले समारोह की योजना बना रहे थे।
पुलिस का कहना है कि आतंकवाद विरोधी अधिनियम के अंतर्गत उन पर मुकदमा दायर किए जाने की तैयारी है।
30 सितंबर: अवामी लीग के 40 कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी
bdnews के अनुसार ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने 30 सितंबर को “प्रतिबंधित अवामी लीग” के 40 सक्रिय कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। हालांकि पुलिस ने उनकी पहचान नहीं बताई है। पुलिस के अनुसार यह गिरफ्तारियाँ शहर में कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए की गई है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने अवामी लीग और जमात पर हाथ मिलाने का आरोप लगाया
जहां एक तरफ अवामी लीग पर प्रतिबंध है और उसके कार्यकर्ताओं की धरपकड़ हो रही है तो वहीं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अवामी लीग पर आरोंप लगाया कि प्रतिबंधित अवामी लीग और जमात ए इस्लामी एक साथ एक बार फिर से आ गए हैं।
bdnews के अनुसार उन्होनें लोगों से अनुरोध किया कि वे इस तरह की खतरनाक राजनीति से दूर रहें। उन्होनें यह बात फेनी के फुलगाजी में एक आयोजन में कही। इसमें कई जन योजनाओं के कार्ड लोगों में बांटे गए थे। उन्होनें यह भी आरोंप लगाया कि ये दोनों ही खतरनाक ताकतें 1991 और 1986 में एक थीं और ये दोनों पिछले चुनावों में भी एक थीं।
अवामी लीग ने राजनीतिक प्रतिशोध का लगाया आरोंप
जहां एक तरफ बीएनपी की सरकार प्रतिबंधित अवामी लीग के कार्यकर्ताओं पर दमनचक्र को कानून व्यवस्था का विषय बता कर जारी रख रही है, तो वहीं बांग्लादेश की अवामी लीग ने सरकार पर यह आरोंप लगाया कि वह राजनीतिक प्रतिशोध ले रही है।
अवामी लीग ने जसोड के कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और उसके दफ्तर पर हमले के बाद एक्स पर विरोध करते हुए पोस्ट किया था। उसमें लिखा था कि जसोड के कार्यकर्ताओं पर पुलिस की आड़ में जूबों दल कार्यकर्ताओं और बीएनपी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए थे।
इसमें लिखा था लोकतंत्र के बैनर के नीचे बीएनपी एक गैर लोकतान्त्रिक तरीके से काम कर रही है और यह उन्होनें बार-बार कहा है। इसमें लिखा था कि अवामी लीग का यह मानना है कि बीएनपी कभी भी लोगों के लोकतान्त्रिक और संवैधानिक अधिकारों में विश्वास नहीं करती है।
बीएनपी पर ही फासीवादी होने का आरोंप लगाते हुए लिखा था कि वह लाख छुपा ले, उसका फासीवादी चरित्र छिप नहीं सकता है।



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