देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम वन गुर्जरों का अतिक्रमण: मदरसे, शिकार और डेमोग्राफी चेंज की घटनाएं बढ़ीं
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देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम वन गुर्जरों का अतिक्रमण: मदरसे, शिकार और डेमोग्राफी चेंज की घटनाएं बढ़ीं

उत्तराखंड में मुस्लिम वन गुर्जरों का अतिक्रमण मदरसे, कट्टरपंथ और डेमोग्राफी चेंज हो रहा है। वन मुस्लिम गुर्जरों के बच्चे युवा अब जमातों में जाकर इस्लामिक कट्टरपंथ की जकड़ में आ चुके हैं।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
Dec 16, 2025, 11:00 am IST
inउत्तराखंड

देहरादून: क्या उत्तराखंड के जंगलों में सुनियोजित तरीके से मुस्लिम वन गुर्जरों की घुसपैठ कराई जा रही है? क्या कभी जंगल के रखवाले माने जाते वन गुर्जरों के समुदाय में मुस्लिम जमीयत सक्रिय हो चुकी है, खबर है कि मुस्लिम वन गुर्जर उत्तराखंड की जंगल की बेशकीमती जमीन को वन विभाग की खामियों की वजह से कब्जाने में लगे हैं। वन गुर्जर न सिर्फ सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जे का रहे है बल्कि हाथी बाघ तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्यजीव प्राणियों का शिकार भी कर रहे हैं।

कभी जंगल के रखवाले कहे जाते वन गुर्जरों को शाकाहारी रहना उनके संस्कारों में शामिल था परंतु अब उनकी नई पीढ़ी मांस भी खा रही है और गलत धंधों में भी लिप्त हो चुकी है। वन मुस्लिम गुर्जरों के बच्चे युवा अब जमातों में जाकर इस्लामिक कट्टरपंथ की जकड़ में आ चुके हैं, पहले इस समुदाय में बकरे की कुर्बानी तक नहीं होती थी जब से इनके यहां जमीयत के मौलानाओं का आना जाना हुआ है और इनके मन ये बात गहरा दी गई है तुम इस्लाम को मानने वाले मुस्लिम हो और तुम्हें यही जीवन जीना है, तब से इनका सामाजिक परिवर्तन सामने आ गया है, जंगलों में इनके बच्चो को इस्लामिक शिक्षा के लिए मदरसे खोले जा रहे हैं जहां हाफिज मौलाना बाहर से आकर डेरा डाल रहे हैं और मजहबी कट्टरपंथ की तालीम दे रहे हैं।

हालात ऐसे हो गए हैं कि वन गुर्जर उत्तराखंड में लैंड जिहाद में शामिल हो चुके हैं और इसके पीछे जमीयत की योजना काम करती दिखलाई दे रही है।

जंगल की जमीन कब्जे का लक्ष्य

कॉर्बेट और राजा जी टाइगर रिजर्व से वन गुर्जरों को बाहर निकाल कर बसाने के काम में इस समुदाय के साथ हिमाचल, कश्मीर और यूपी के मुस्लिम वन गुर्जरों ने जमात के साथ मिलकर एक योजना के तहत बसावट कर ली है। ऐसा जानकारी में तब आया जब विस्थापन से पूर्व 512 परिवार ही 1998 के  सर्वे में आए किंतु जब विस्थापन हुआ तो इनकी संख्या पांच हजार से ज्यादा हो गई और आज भी कई वन गुर्जर सरकारी खामियों का फायदा उठा कर जमीन कब्जाने के दावे करने में लगे हैं। जबकि 1632 में से 1390 वन गुर्जरों का ही राजा जी से और 224 का कॉर्बेट टाइगर रिजर्व  कालागढ़ से विस्थापन किया जाना था। विस्थापन में परिवार की परिभाषा में बालिग , निकाह और शरीयत कानून के चलते इनके द्वारा बड़े पैमाने पर उत्तराखंड के जंगलों से बाहर और अंदर घुसपैठ कर ली गई है। ऐसे भी सबूत मिले है कि इनकी पत्नियों के पति भी बदलते रहे और उनके बच्चे भी और वे वन भूमि से विस्थापन होने का दावा करने लगे।

उत्तराखंड में जिस परिवार को विस्थापन होने के लिए एक हेक्टेयर जमीन और करीब साढ़े चार लाख रु की धनराशि मिली उनमें से कई लोग अपना मकान रख शेष जमीन को यूपी हिमाचल कश्मीर के गुर्जरों को दस रु के स्टांप पर बेच कर पहाड़ों की तरफ अपने पशु लेकर चले गए और वहां रिजर्व फॉरेस्ट में भी अपने डेरे डाल कर बैठ गए अब पहाड़ी जंगलों में भी बाहर के मुस्लिम गुर्जर पहुंचने लगे और वहां भी मदरसे खोल कर बैठ गए। फॉरेस्ट प्रभागों से मिली जानकारी के मुताबिक हजारों  हैक्टेयर जमीन इस समय मुस्लिम वन गुर्जरों ने कब्जा ली है और इनकी खुद की संख्या भी पंद्रह हजार से ज्यादा है।

सेटेलाइट इमेज से खुला राज

इस बात के प्रमाण वन विभाग के पास जीपीएस और सेटलाइट चित्रों से मिले हुए है। तराई सेंट्रल, तराई वेस्ट में करीब पांच हजार वन भूमि पर कब्जा कर वन मुस्लिम गुर्जर खेती कर रहे हैं और जंगलात विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।

जीव जंतुओं के शिकार में है लिप्त

उत्तराखंड का 70 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जिसमें घूमने और पशुओं को चराने का परमिट इन मुस्लिम गुर्जरों को मिलता रहा है। कभी ये जंगल के रखवाले हुआ करते थे, किंतु अब ऐसे प्रमाण मिले हैं कि बाघ की खाल, हड्डियों और हाथी दांत के लिए शिकार में लिप्त हैं। हरिद्वार में डीएफओ रहे आकाश वर्मा के कार्यकाल में एक मुस्लिम गुर्जर के घर से बाघ की खाल और हड्डियां जमीन में गड़ी हुई मिली थी।

इसी तरह तराई के आम पोखरा रेंज में गुलाम रसूल, नाम के मुस्लिम वन गुर्जर के घर से हाथी दांत बरामद हुए और आरोपी ने कबूला था कि उसने हाथी का शिकार करंट लगा कर किया था। एक अन्य वन गुर्जर मोहम्मद कासिम भी हाथी दांत की तस्करी में पकड़ा गया, ऐसे एक दो नहीं दर्जनों मामले हैं, जिनमें मुस्लिम गुर्जर वन्य जीव जंतुओं के शिकार, वन संपदा के दोहन जैसे इमारती लकड़ी, खनन और दुर्लभ जड़ी बूटियों की तस्करी में लिप्त रहे हैं। उल्लेखनीय है वन मुस्लिम गुर्जर अभी वन्यजीवो का शिकार कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय वन्य जीव तस्करों तक पहुंचाने के रास्ते जानते हैं। बहुत से मुस्लिम गुर्जर अब तेज धारदार हथियारऔर गैर कानूनी शस्त्र भी रख रहे हैं जिन्हे वन विभाग के खिलाफ वे इस्तेमाल करते हैं।

तिब्बत चीन सीमा तक पहुंच रहे हैं

उत्तराखंड की अंतर्राष्ट्रीय सीमा तिब्बत चीन सीमा तक मुस्लिम वन गुर्जर अपने पशु लेकर पहुंच रहे हैं। कुछ साल पहले वन के अधिकारियों ने उन्हे गोविंद पशु विहार में जाने पर रोक लगा दी थी, वन अधिकारियों का कहना था कि हम यहां स्नो लेपर्ड, मोनाल, ब्रह्मकमल,भालू, कस्तूरी मृग के साथ साथ देश की सीमा  को संरक्षित और सुरक्षा देना चाहते हैं और ये गुर्जर इसके लिए बाधक बन रहे हैं। बताया जाता है कि कुछ एनजीओ और राजनेताओं के दबाव में ये आना जाना पुनः शुरू हो गया है।

जनजाति क्षेत्र में वोटर बन गए मुस्लिम

हिमाचल से लगी टोंस और यमुना घाटी के जंगलों में वन गुर्जरों की घुसपैठ से स्थानीय लोग भी चिंतित है। यहां रुद्र सेना के द्वारा लगातार वन विभाग को चेताया जा रहा है कि जंगलों में ये लोग अवैध बस्तियां बसा रहे हैं। रुद्र सेना के संयोजक राकेश तोमर उत्तराखंडी बताते हैं कि एक एनजीओ और राजनेताओं के संरक्षण में वन गुर्जरों के नाम वोटरलिस्ट में दर्ज हो गए हैं उनके बच्चे सरकारी नौकरियों में जनजाति आरक्षण की मांग करने लगे हैं ये षडयंत्र है जो अभी किसी को समझ नहीं आ रहा है हम जनजागरण अभियान शुरू कर चुके हैं।

श्री उत्तराखंडी बताते हैं कि ये उत्तराखंड के जनजाति क्षेत्र में डेमोग्राफी चेंज कराने की जुगत में है जिस के पीछे यूपी हिमाचल कश्मीर के मुस्लिम संस्थाएं काम कर रही है।

क्या कहते हैं नोडल अधिकारी डा पराग मधुकर धकाते

वन विभाग में चीफ कंजर्वेटर और अतिक्रमण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी डा पराग मधुकर धकाते का कहना है सभी वन प्रभागों से वन गुर्जरों की रिपोर्ट आ गई है, अवैध और वैध कब्जेदारो का सत्यापन का काम पूरा हो रहा है किसी भी परिवार के पास एक  हैक्टेयर से ज्यादा जमीन मिली अथवा उसके द्वारा जमीन खरीदी अथवा बेचने का काम किया गया तो उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत कानूनी कारवाई की जाएगी।

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