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Putin के भारत आने से ठीक पहले रक्षा सहयोग में बड़ा कदम, Russia की संसद में पारित हुआ India से सैन्य सहयोग का प्रस्ताव

रूस भारत को एक महाशक्ति मानते हुए उससे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को नई गति दे रहा है। इस समझौते को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Dec 3, 2025, 12:17 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (File Photo)

राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (File Photo)

रूस की संसद ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत-रूस रक्षा समझौते पर मुहर लगा दी है। रूसी संसद के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ ने भारत के साथ एक ऐसे रक्षा सहयोग समझौते को मंजूरी दी है, जिससे दोनों देशों की सेनाओं और सैन्य उपकरणों को एक-दूसरे के क्षेत्र में तैनात करने की अनुमति मिल जाएगी। यह कदम राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 4-5 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित भारत दौरे से ठीक एक दिन पहले उठाया गया है, इसलिए स्पष्ट कहा जा सकता है कि रूस भारत को एक महाशक्ति मानते हुए उससे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को नई गति दे रहा है। इस समझौते को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

रूसी संसद के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ में पुतिन का भाषण

क्या है यह समझौता
यह रक्षा समझौता ‘रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट’ (RELOS) के नाम से जाना जाता है, जिस पर इस साल 18 फरवरी को मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार और रूस के उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन ने हस्ताक्षर किए थे। RELOS के तहत भारत और रूस एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर सेना, युद्धपोत, विमान और सैन्य संरचनाओं को तैनात कर सकेंगे। इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक सपोर्ट, संयुक्त अभ्यास और आपदा राहत में सहयोग बढ़ेगा। इससे ऑपरेशनल लागत घटेगी और हिंद-प्रशांत तथा आर्कटिक क्षेत्रों में रणनीतिक तालमेल मजबूत होगा।

रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी
भारत और रूस 1960 के दशक से रक्षा क्षेत्र में निकट साझेदार बने हुए हैं, जहां रूस भारत का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है। मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत रूसी कंपनियों को भारतीय उद्यमों के साथ सह-उत्पादन के अवसर दिए गए हैं। यह RELOS समझौता दोनों विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारों के बीच सैन्य सहयोग को संस्थागत रूप देता है, जो पहले से चले आ रहे संयुक्त अभ्यासों को और प्रभावी बनाएगा।

समझौते का रणनीतिक महत्व
इस महत्वपूर्ण रक्षा समझौते को पुतिन के दसवें भारत दौरे से ठीक पहले मंजूरी मिलना एक बड़ी ​बात माना जा रहा है। नई दिल्ली में पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करेंगे। इस मौके पर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग एजेंडे में शीर्ष पर रहेगा, जिससे व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा मुद्दों पर नई पहल हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में यह कदम भारत की बहुपक्षीय नीति को रेखांकित करता है, जहां भारत की विदेश नीति रूस के साथ गहरे संबंध बनाए रखने की बात करती है।

रक्षा समझौते पर इस साल 18 फरवरी को मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार और रूस के उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन ने हस्ताक्षर किए थे।

भविष्य की संभावनाएं
भारत—रूस रक्षा समझौते से मानवीय मिशनों, आपदा प्रबंधन और संयुक्त अभ्यासों में तेजी से प्रतिक्रिया करना संभव हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय अस्थिरता से निपटने में यह चीज सहायक सिद्ध होगी। साल 2025 की बात करें तो अभी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य 100 अरब डॉलर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस लक्ष्य को पाने में रक्षा सौदों से बहुत मदद मिलेगी। यहां यह बात भी ध्यान रखनी होगी कि वैश्विक भू-राजनीति में बदलावों के बीच यह समझौता भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को मजबूती ही प्रदान करेगा।

Topics: RELOSभारतModiputinपुतिनdiplomacyमोदीरक्षा सहयोगforeign affairsindo russia defence deal
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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