शहजाद भट्टी नेटवर्क युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने के लिए ना कोई ट्रेनिंग कैंप लगाता था और ना कोई कोड वर्ड देता था। वह सबसे पहले ऐसे युवाओं की पहचान करता था जो आर्थिक रूप से कमजोर, नशे के आदी और गैंगस्टरों से प्रभावित होने वाले हों। इसके बाद यह नेटवर्क युवाओं को निशाना बनाता था।
आतंक की फैक्ट्री चला रहा पाकिस्तान अब केवल सीमा पार से ही घुसपैठ नहीं कर रहा है बल्कि पाक समर्थित आतंकवाद आपके स्मार्टफोन तक पहुंच चुका है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा ‘शहजाद भट्टी नेटवर्क’ को UAPA के तहत आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद ‘डिजिटल टेरर’ का एक नया और खतरनाक चेहरा सामने आया है। बिना किसी कोड वर्ड और बिना किसी गुप्त ठिकाने के, यह गैंग सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भारतीय युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था। जानिए क्या है पाकिस्तान के गैंगस्टर शहजाद भट्टी की ‘डिजिटल आतंकी फैक्ट्री’ का पूरा मॉडल और कैसे सुरक्षा एजेंसियां इसका पर्दाफाश कर रही हैं:
कौन है शहजाद भट्टी और उसका आपराधिक इतिहास क्या है?
- शहजाद भट्टी मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का गैंगस्टर है।
- वर्ष 2013 में उस पर पाकिस्तान में चोरी, डकैती और दुष्कर्म जैसे संगीन मामले दर्ज हुए थे।
- यूएई भागने के बाद वह अंतर्राष्ट्रीय आतंकी गिरोहों के संपर्क में आया और हथियारों की तस्करी, रंगदारी व सुपारी लेकर हत्याएं कराने लगा।
- भारत में 2025 में हुए पंजाब-हरियाणा ग्रेनेड हमलों में भी उसका नाम सामने आया है।
हाल ही में गृह मंत्रालय ने शहजाद भट्टी नेटवर्क पर क्या कार्रवाई की?
गृह मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को शहजाद भट्टी नेटवर्क को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन के तहत की गई है।
भट्टी नेटवर्क की ‘डिजिटल भर्ती’ का मॉडल कैसे काम करता है?
टार्गेट की पहचान: सोशल मीडिया पर ऐसे युवाओं की तलाश की जाती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हों, नशे के आदी हों या गैंगस्टर कल्चर से प्रभावित हों।
लालच देना: युवाओं को पैसे, हथियार और विदेश (विशेषकर खाड़ी देशों) में बसाने का झांसा दिया जाता है।
सुरक्षित संचार: शुरुआती संपर्क के बाद युवाओं को एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स पर ट्रांसफर किया जाता है।
शुरुआती काम: बिना किसी ट्रेनिंग कैंप या कोड वर्ड के इनसे रेकी, दीवारों पर पोस्टर/नारे लिखना और हथियार सप्लाई जैसे काम कराए जाते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस नेटवर्क को पकड़ना कठिन क्यों था?
मॉड्यूलर ढांचा: इस नेटवर्क में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग काम दिए जाते थे और वे एक-दूसरे से अनजान रहते थे।
क्लीन रिकॉर्ड वाले युवा: नेटवर्क में ऐसे स्थानीय छोटे अपराधियों या आम युवाओं को शामिल किया जाता था जिनका कोई पिछला पुलिस रिकॉर्ड नहीं होता था। इससे एक व्यक्ति की गिरफ्तारी पर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश नहीं हो पाता था।
भारत में इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक कितना बड़ा एक्शन हुआ है?
14 राज्यों में छापेमारी: 12 अगस्त को चलाए गए देशव्यापी अभियान में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया।
मामले और गिरफ्तारियां: नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 केस दर्ज किए जा चुके हैं और 200 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं।
बरामदगी: भारी मात्रा में हथियार, आईईडी (IED), ग्रेनेड और नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं।

















