हिंदुओं की प्रमुख एकमात्र मातृभूमि भारत है। आठवीं शताब्दी के दौरान और उसके बाद भारत पर इस्लामिक आक्रांताओं ने हमले किए। अठारहवीं शताब्दी के दौरान अंग्रेजी शासन के अधीन आया। इसके पश्चात जब भारत का धर्म के नाम पर विभाजन किया गया तो पाकिस्तान का उद्भव हुआ। एक मुहिम कट्टरपंथी मुस्लिमों और ईसाई मिशनरियों की ओर से चली वो थी जनसांख्यिकी परिवर्तन की।
आज जब हम डेमोग्राफी चेंज यानी की जनसांख्यिकी परिवर्तन की बात करते है तो हम पाएंगे कि कैसे भारत की स्वतंत्रता के पश्चात हिंदुओं के विरुद्ध कैसे-कैसे षड्यंत्र रचे गये, और इसके द्वारा भारत में जनसंख्या बढ़ाकर सरकारी तंत्र को अपने नियंत्रण में लिया जा सके।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक आकड़ों के अनुसार, 1950 से 2015 के बीच भारत की जनसंख्या में हिंदुओं की हिस्सेदारी 7.82% कम हुई और यह 84.68% से घटकर 78.06% रह गई। एक नई रिपोर्ट आई है कि भारत में जन्म दर भी घटकर पचास साल पहले के स्तर पर 1.9 पर पहुंच गई है।
जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के प्रमुख निष्कर्ष (1950–2015)
हिंदुओं की हिस्सेदारी: 1950 में 84.68% से घटकर 2015 में 78.06% हो गई।
मुस्लिमों की हिस्सेदारी: 43.15% की वृद्धि हुई और जनसंख्या में उनकी हिस्सेदारी 9.84% से बढ़कर 14.09% हो गई।
ईसाइयों की हिस्सेदारी: 2.24% से मामूली रूप से बढ़कर 2.36% हो गई।
सिखों की हिस्सेदारी: 1.24% से बढ़कर 1.85% हो गई।
जैन और पारसी समुदाय की हिस्सेदारी: जैनों की हिस्सेदारी 0.45% से घटकर 0.36% हो गई, जबकि पारसियों की हिस्सेदारी 0.03% से घटकर 0.004% रह गई।
भारत में इस्लामी आक्रमण
सातवीं शताब्दी में अरबों द्वारा सिंध पर आक्रमण के बाद इस्लाम भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचा। बारहवीं शताब्दी में गजनवी और गोरी की विजयों के साथ इस्लाम उत्तर भारत और पंजाब तक पहुंचा। तेरहवीं शताब्दी की शुरुआत से मुस्लिम शासकों द्वारा हिंदुओं का बलपूर्वक इस्लाम में कन्वर्जन कराया गया। भारत में हिंदू आबादी पर दबाव के माध्यम से इस्लाम थोपा गया और मुस्लिम शासकों के कारण हिंदुओं को जज़िया कर आदि जैसी विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंग्रेज़ों ने 1757 से 1947 तक भारत पर शासन किया।
क्या कहती है 2011 की जनगणना
भारत विश्व की कुल जनसंख्या का 16% से अधिक हिस्सा रखता है, जबकि इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2.4% है। भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश था। हालांकि, जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया था कि भारत अगली जनगणना (2021) में चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। हालांकि, कोविड-19 के कारण जनगणना नहीं हो सकी।
2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में मुस्लिम समुदाय कुल जनसंख्या का लगभग 14.23% था। कई राज्यों में यह अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक था। केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप, पश्चिम बंगाल और तत्कालीन अविभाजित जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक था।
1951 में हिंदुओं की संख्या भारत की कुल जनसंख्या का 84.1% थी, जो 1951 से 2011 के बीच सबसे अधिक हिस्सेदारी थी। वहीं, 1951 में कुल जनसंख्या में मुसलमानों की हिस्सेदारी सबसे कम, 9.8% थी। इसके बाद यह प्रतिशत लगातार बढ़ता गया और 1961 में 10.7%, 1991 में 12.6%, 2001 में 13.4% तथा सबसे हाल की जनगणना 2011 में 14.2% हो गया। 2011 में मुस्लिम जनसंख्या की हिस्सेदारी 1951 के बाद सबसे अधिक, 14.2% थी, जबकि सबसे कम हिस्सेदारी 1951 में 9.8% थी।
दूसरी ओर, 1961 से 2011 के बीच कुल जनसंख्या में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी लगातार घटती गई। 1951 में हिंदुओं और मुसलमानों का अनुपात 8.69:1 था, जो 2011 में घटकर 5.62:1 रह गया।
1951 से 2011 के बीच विभिन्न धार्मिक समुदायों की जनसंख्या वृद्धि के प्रतिशत से पता चलता है कि सभी धार्मिक समूहों की जनसंख्या में वृद्धि हुई, हालांकि ईसाइयों, मुसलमानों, हिंदुओं और भारत की कुल जनसंख्या की वृद्धि दर में कमी आई है। भारत की जनसंख्या 2001 से 2011 के बीच 17.7% बढ़ी, जबकि 1991 से 2001 के बीच यह वृद्धि 21.5% थी। 1971 से 1981 के बीच वृद्धि दर अधिकतम 24.7% तक पहुँची थी।
हाल की जनगणनाओं के अनुसार, 2001 से 2011 के बीच मुसलमानों की जनसंख्या में 24.7% की वृद्धि हुई, जो इसी अवधि में हिंदुओं की 16.7% और ईसाइयों की 15.7% वृद्धि से अधिक थी। हालांकि, यह भी ध्यान देना आवश्यक है कि सिखों (1.72%), जैनों (0.37%) और बौद्धों (0.70%) की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है और 1951 से 2011 के बीच 60 वर्षों की अवधि में इनमें कमी आई है।
जनसंख्या वृद्धि के आंकड़े क्या कहते हैं
1951 से 2011 के बीच भारत की कुल जनसंख्या 3.35 गुना बढ़ी, जबकि हिंदुओं की जनसंख्या 3.18 गुना और मुसलमानों की जनसंख्या 4.91 गुना बढ़ी। विशेष रूप से, इसी अवधि में मुस्लिम जनसंख्या 1951 में 3.5 करोड़ से बढ़कर 2011 में 17.2 करोड़ हो गई, जो 491.43% की वृद्धि को दर्शाती है।
2011 में भारत की मुस्लिम जनसंख्या के राज्यवार विवरण में उल्लेखनीय अंतर था। 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से दस में मुस्लिम जनसंख्या बहुत कम थी। 17 राज्यों में मुसलमान अल्पसंख्यक थे, जबकि दो क्षेत्रों—जम्मू-कश्मीर (अविभाजित) में 68.31% और लक्षद्वीप में 96.58%—में वे बहुसंख्यक थे।
फिर भी, 2011 में असम, बिहार, केरल, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भारत की कुल मुस्लिम जनसंख्या का लगभग 58% निवास करता था, जिसकी कुल संख्या 17.225 करोड़ थी। इन पाँच राज्यों में मुस्लिम जनसंख्या की इतनी बड़ी संख्या है। इसके अतिरिक्त, 2011 में 12 राज्यों में मुस्लिम जनसंख्या का प्रतिशत लगभग 10% था। इनमें कुछ राज्यों में यह हिस्सेदारी अपेक्षाकृत अधिक थी- झारखंड में 14.53%, दिल्ली में 12.86%, महाराष्ट्र में 11.54% और उत्तराखंड में 13.95%।
मुस्लिम जनसंख्या का ग्राफ ऊपर की ओर
जनगणना के अनुसार मुस्लिम जनसंख्या की प्रतिशत हिस्सेदारी का ग्राफ ऊपर की ओर बढ़ता हुआ दिखाई देता है, जबकि हिंदू जनसंख्या की प्रतिशत हिस्सेदारी का ग्राफ नीचे की ओर जाता है। किसी भविष्य की जनगणना में दोनों रेखाएं एक-दूसरे को काट सकती हैं, जिसका अर्थ होगा कि हिंदुओं और मुसलमानों की संख्या बराबर हो सकती है या मुस्लिम जनसंख्या हिंदू जनसंख्या से अधिक होकर आगे बढ़ सकती है।
2024 में बांग्लादेश की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। वहां हिंदुओं को आज भी प्रताड़ित किया जा रहा है। हिंदू मंदिरों को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट किया गया। भारत के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए डेमोग्राफी चेंज पर अंकुश लगाने के साथ ही जबरन कन्वर्जन पर भी कड़े कदम उठाने होंगे।

















