राष्ट्रीय एकता दिवस: युवा भारत के लौह मार्गदर्शक हैं सरदार पटेल
September 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

राष्ट्रीय एकता दिवस: युवा भारत के लौह मार्गदर्शक हैं सरदार पटेल

सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस: दूरदर्शिता, संकल्प और समावेशी नेतृत्व से प्रेरित होकर युवा पीढ़ी भारत की एकता को नई ऊर्जा दे। बारडोली से हैदराबाद तक की कहानी पढ़ें।

Written byडॉ शिवानी कटाराडॉ शिवानी कटारा — edited by कुलदीप सिंह
Oct 31, 2025, 06:00 am IST
inभारत
Sardar Vallabhbhai patel quotes

राष्ट्रीय एकता दिवस केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का क्षण है। इस दिन हम उस अदम्य नेता को नमन करते हैं जिसने सैकड़ों रियासतों को जोड़कर भारत की आत्मा गढ़ी — सरदार वल्लभभाई पटेल। आधुनिक और अखंड भारत के शिल्पकार। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाड में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के उपरांत वे वकालत की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। भारत लौटने के बाद वे स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हुए और खेड़ा, बारडोली तथा असहयोग आंदोलन का नेतृत्व किया। स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश के प्रशासनिक ढाँचे को सुदृढ़ किया। सरदार पटेल की 150वीं जयंती आज पूरे देश में एकता, देशभक्ति और जनभागीदारी के महोत्सव के रूप में मनाई जा रही है। आज का युवा (Gen Z), जो तकनीक, नवोन्मेष और संस्कृति के संगम पर खड़ा है, सरदार पटेल से नेतृत्व और जीवन के शाश्वत सूत्र सीखकर चुनौतियों को दृढ़ता व विवेक से पार कर सकता है — जिसमें प्रथम है-

दृष्टि और रणनीति: दूरदर्शिता से दिशा

सरदार वल्लभभाई पटेल एक व्यावहारिक दूरदर्शी (practical visionary) थे, जिनका लक्ष्य स्पष्ट था — एक मज़बूत, अखंड और आत्मनिर्भर भारत। उन्होंने राजनीतिक दबाव, आर्थिक प्रोत्साहन और सैन्य शक्ति का संतुलित प्रयोग कर हैदराबाद के निज़ाम को भारत में विलय के लिए राज़ी किया। यह उनकी दूरदर्शिता और रणनीतिक कौशल (strategic brilliance) का उदाहरण था, जहाँ स्थायी स्थिरता को प्राथमिकता मिली। उनका अदम्य संकल्प (iron will) सिखाता है कि जब लक्ष्य राष्ट्रहित से जुड़ा हो, तब रणनीति स्वयं दिशा बन जाती है। आज के युवा यदि अपने कार्यों में यह दृष्टि अपनाएँ—चाहे स्टार्टअप, सामाजिक पहल या प्रशासनिक जिम्मेदारी—तो वे भारत की एकता को नई ऊर्जा देंगे।

संकल्प और निर्णय: प्रतिकूलता में अडिगता

सरदार पटेल के नेतृत्व की सबसे बड़ी पहचान थी उनका अटूट निर्णय-साहस। जुनागढ़ और हैदराबाद जैसे संकटों में उन्होंने न भय दिखाया, न दुविधा—सिर्फ देश के प्रति अटूट समर्पण के साथ अडिग रहे। आज के युवा, चाहे नवाचार के अग्रदूत हों, खिलाड़ी हों या नीति-निर्माण के उभरते नेता, उनके जीवन से यह प्रेरणा ले सकते हैं कि निर्णय तभी सार्थक होते हैं जब उनमें स्पष्ट दृष्टि (clarity of vision), नैतिकता (integrity) और सामूहिक कल्याण (collective good) का भाव हो। जो कठिन निर्णयों से पीछे हटता है, वह अवसर खो देता है; जो दृढ़ संकल्प से बढ़ता है, वही इतिहास की दिशा बदलता है।

समावेश और टीमवर्क: नेतृत्व का वास्तविक स्वरूप

21 सितंबर 1929 को सरदार पटेल ने कहा — “एकजुट हो जाओ, और तुम्हें लड़ना नहीं पड़ेगा।” उन्होंने भारत की विविधता को उसकी शक्ति माना और सबको साथ लेकर चले। बस्तर में वनवासी नेताओं से संवाद कर उन्होंने दिखाया कि एकीकरण आदेश से नहीं, विश्वास और सहभागिता से होता है। यह दर्शाता है कि समावेशी नेतृत्व (inclusive leadership) ही स्थायी परिवर्तन की नींव है, जहाँ हर व्यक्ति राष्ट्र का भागीदार बनता है। यही दृष्टि आज के युवाओं को सिखाती है कि सच्चा नेता आदेश नहीं, बल्कि प्रेरणा से जोड़ता है।

इसे भी पढ़ें: सऊदी अरब ने कफाला सिस्टम खत्म कर तोड़ दीं गुलामी की जंजीरें, भारत में कट्टरपंथियों को किताब नहीं हिजाब चाहिए

संवाद और संवेदना: दिल से बात करने की कला

सरदार पटेल की कार्यशैली बताती है — नेतृत्व सिर्फ वाणी नहीं, समझ और श्रवण की साधना है। जब संवाद दिल से होता है, तो वह एकता का सेतु बनता है। राजकोट समझौता (1939) इसका उदाहरण है — जहाँ पटेल ने संयम से दोनों पक्षों की बात सुनकर न्यायपूर्ण और मानवीय समाधान दिया। डिजिटल युग में, जहाँ सब अपनी बात कहने की होड़ में हैं, वहीं अर्थ खोने का खतरा भी बढ़ गया है। सरदार पटेल का सिद्धांत “Less is more (कम ही अधिक है)” आज बेहद प्रासंगिक है। आज के यूट्यूब इन्फ्लुएंसर्स, पॉडकास्टर्स और सोशल मीडिया कम्युनिकेटर्स उनके विचारों से प्रेरणा लेकर यह समझ सकते हैं कि प्रभावी संवाद की शक्ति “ज़ोर से बोलने” में नहीं, बल्कि “सही ढंग से सुनने” (active listening) और स्पष्ट सोच को सरल शब्दों में विनम्रता और संवेदनशीलता (empathetic communication) के साथ कहने में है।

सामाजिक नवाचार से महिला सशक्तिकरण

सरदार वल्लभभाई पटेल ने राजनीति को सामाजिक नवाचार (social innovation) और समाज सुधार का माध्यम बनाया, जहाँ हर वर्ग — विशेषकर महिलाएँ — राष्ट्र निर्माण से जुड़ीं। बारडोली सत्याग्रह में महिलाओं ने साहस और संगठन से इतिहास रचा। पटेल मानते थे — “स्त्रियाँ एक दृष्टि से अत्यंत साहसी होती हैं। पुरुष जितनी विपत्तियाँ नहीं सह सकते, उतनी स्त्रियाँ सह लेती हैं। जब तक स्त्रियाँ शिक्षित और राष्ट्रभाव से प्रेरित नहीं होंगी, तब तक सच्ची समृद्धि संभव नहीं।” सरदार पटेल का विश्वास था कि सामाजिक न्याय नारों से नहीं, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता, राजनीतिक सहभागिता और लैंगिक समानता से साकार होता है। उन्होंने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण (democratic decentralization) के माध्यम से महिलाओं की नेतृत्व भूमिका का समर्थन किया। यही दृष्टि आज जमीनी नारीवाद (grassroots feminism) और सामाजिक नवाचार में जीवित है, जहाँ युवा महिलाएँ और पुरुष सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स, प्रोजेक्ट उड़ान और स्थानीय स्टार्टअप्स से आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान गढ़ रहे हैं।

नागरिक उत्तरदायित्व

अक्टूबर 23, 1935 को सरदार पटेल ने कहा था — “कोई सड़कों पर थूके नहीं, खाने की चीज़ें न फेंके, जगहों को गंदा न करे।” यह केवल स्वच्छता का संदेश नहीं, बल्कि नागरिक उत्तरदायित्व (civic responsibility) का आह्वान था। उन्होंने स्वयं झाड़ू उठाकर अहमदाबाद में नागरिकों संग सफाई अभियान चलाया — यही व्यावहारिक राष्ट्रभक्ति थी जिसने आगे चलकर स्वच्छ भारत अभियान को प्रेरित किया। पटेल मानते थे कि सच्चा नागरिक वही है जो अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी पालन करे। आज देशभर में युवा समुद्र तट सफाई अभियान, प्लास्टिक-मुक्त भारत, ज़ीरो वेस्ट ज़ोन और स्मार्ट विलेज इनिशिएटिव्स जैसी पहलों से पटेल की सोच को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसी पहलें केवल सफाई नहीं, बल्कि विचारों की शुद्धि हैं — यही सच्चा देशप्रेम है, जो कर्म से प्रकट होता है।

आत्म-संयम, आर्थिक अनुशासन और आत्मनिर्भरता

सरदार पटेल का यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है —चरित्र वास्तविक सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है; जिसके पास चरित्र नहीं, वह न राजनीति में सफल हो सकता है, न वाणिज्य में। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस दौर में नैतिक तकनीक (ethical tech) केवल एक विचार नहीं, बल्कि युवा जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बनना चाहिए। आज आवश्यकता है कि तकनीक और नवाचार केवल प्रगति का माध्यम न बनें, बल्कि समाज के कल्याण से जुड़ें। चाहे युवा प्रशासनिक सेवाओं में हों या नागरिक संगठनों में, यदि वे ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ शासन के सिद्धांतों को अपनाएँ, तो समाज में विश्वास और उत्तरदायित्व स्वतः स्थापित होगा।

सरदार पटेल का विश्वास था कि सच्ची समृद्धि केवल औद्योगिक प्रगति से नहीं, बल्कि नागरिकों की बचत, जिम्मेदार उपभोग और नैतिक आचरण से बनती है। आज के युवा वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता और सामाजिक निवेश से आत्मनिर्भर बनकर राष्ट्र को सशक्त बना सकते हैं। उन्होंने कहा — “गाँवों को सशक्त बनाओ, राष्ट्र स्वयं सशक्त होगा।” अमूल आंदोलन उनकी इसी दूरदर्शिता का परिणाम था। आज के युवा ऑर्गेनिक फार्मिंग, स्वदेशी उत्पादों को ई-कॉमर्स जैसे उपक्रमों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और नवप्राण दे रहे हैं।

सरदार पटेल की विरासत सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि एक लिविंग आइडिया है — जो सिखाती है कि लोकतंत्र केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों का अभ्यास है। उनका जीवन तीन मूल मंत्रों — चरित्र (Character), प्रतिबद्धता (Commitment) और सामूहिक चेतना (Collective Consciousness) — की अभिव्यक्ति है, जो यह दर्शाता है कि राष्ट्रनिर्माण कभी पुराना नहीं होता, बस उसकी भाषा समय के साथ बदलती रहती है। सरदार @150 आज नवपरिवर्तन का प्रतीक है — जहाँ युवा पीढ़ी पटेल के विचारों को नई ऊर्जा, दृष्टि और आधुनिक संवेदना के साथ जी रही है।

(लेखिका दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पीएच.डी. हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं)

Topics: अखंड भारतSardar Patel Jayantiसरदार वल्लभभाई पटेलIndia UnificationSardar Vallabhbhai PatelHyderabad Mergerसरदार पटेल जयंतीJunagadh Crisisunited IndiaYouth LeadershipGen Z Indiaभारत एकीकरणहैदराबाद विलयजूनागढ़ संकटराष्ट्रीय एकता दिवसयुवा नेतृत्वNational Unity DayGen Z भारत
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी से पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव ने बातचीत की।

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘वंदे मातरम्’ पर भारतवासियों को गर्व 

IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी जी

Odisha’s Udaan 2.0: पाकिस्तान को अचानक क्यों याद आई इस्लाम से पहले की विरासत, डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने बताया कारण

 वंदे मातरम् कुछ अज्ञात तथ्य

राहत शिविर में भोजन करते लोग

विभाजन की विभीषिका : लकीर खिंची, लाखों उजड़ गए

लेफ्टिनेंट जनरल एम.के. दास (सेवानिवृत्त)

विभाजन की विभीषिका : अखंड भारत होता तो सैन्य महाशक्ति होता देश

एक शिविर में राहत सामग्री का वितरण करते संघ के स्वयंसेवक (फाइल चित्र)

विभाजन की विभीषिका : संघ ने संभाला

Load More

ताज़ा समाचार

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पौधरोपण करते ब्रिक्स समूह के सदस्य।

नई दिल्ली घोषणापत्र पर मुहर: ब्रिक्स नेताओं ने खिंचवाई ‘फैमिली फोटो’, फिर एक खास पौधे से दिया दुनिया को बड़ा संदेश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (बाएं)।

प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक, सीमा सहित कई मुद्दों पर हुई बात

kisan sangh free uniforms notebooks and bags distributed to 7000 flood affected students

असम: शिवसागर में भारतीय किसान संघ की मानवीय पहल, बाढ़ प्रभावित 7,000 छात्रों को दी जा रही नि:शुल्क सहायता!

dr manmohan vaidya addresses-shikshak and taruni samvad in kashi bhu

विविधता का उत्सव मनाना ही भारतीय संस्कृति है: काशी में बोले मनमोहन वैद्य जी- भारत रूपी बगीचे के हम माली नहीं, पौधे हैं

gorakhpur rss centenary youth conference suryakund-prant pracharak ramesh address

“शाखा गंगा की तरह पवित्र और व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है”: गोरखपुर में RSS शताब्दी वर्ष पर भव्य युवा सम्मेलन

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

BRICS Summit: PM मोदी का वैश्विक सुधारों पर जोर, कहा- विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी में बदलना होगा

मोदी जी ने तप-साधना और संघर्ष से बनाई पहचान : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Lakha Sidhana Amritpal Singh Akali Dal Waris Punjab De Maur Assembly Seat Panchjanya

एक और गैंगस्टर का पंजाब की राजनीति में एंट्री : वारिस पंजाब दे ने लक्खा सिधाना को मोड़ सीट से दिया टिकट, जानिए पूरी खबर!

कल का मौसम: 13 सितंबर को भी देशभर में ‘तूफानी बारिश’, इन राज्यों को रहना होगा सर्तक; IMD का बड़ा अलर्ट

अभिजीत दीपके

‘आ गए लाशों पर राजनीति करने’, बालाघाट में पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए बिना गाड़ी लेकर भागे CJP के दीपके

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies