चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी थे अधीश जी, जो भी एक बार मिलता उन्हीं का होकर रह जाता
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चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी थे अधीश जी, जो भी एक बार मिलता उन्हीं का होकर रह जाता

4 जुलाई, 2007 को वे बेहोश हो गये। इससे पूर्व उन्होंने अपना सब सामान दिल्ली संघ कार्यालय में कार्यकर्त्ताओं को दे दिया। बेहोशी में भी वे संघ की ही बात बोल रहे थे।

Written byके.पी. मलिकके.पी. मलिक
Jul 5, 2023, 01:05 pm IST
inसंघ @100, श्रद्धांजलि
फाइल फोटो

फाइल फोटो

पश्चिम उत्तर प्रदेश के शामली में साल 1985 के दौरान अपने कॉलेज के दिनों के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने का मौका मिला, उसी दौरान इस महान विभूति से मिलने और उनके विचार सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। अधीश जी चुंबकीय व्यक्तित्व के मालिक थे और उनकी वाणी में एक अजीब किस्म के खिंचाव का आभास होता था, जिसने मेरे जैसे युवा को भी प्रभावित किया। सही मायने में शामली के किसान डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर देवराज जी के बाद अधीश जी दूसरे ऐसे व्यक्तित्व थे जिनसे प्रभावित होकर संघ की विचारधारा से जुड़ा था। आज तत्कालीन जिला कार्यवाह मुजफ्फरनगर के कस्बे सिसौली के निवासी आदरणीय जयपाल जी ने अधीश जी के विषय में विस्तृत जानकारियां दी है। जिसके लिए मैं जयपाल जी का हार्दिक धन्यवाद करता हूं और उसी का विवरण नीचे प्रस्तुत करता हूं जिससे हमें अधीश जी के विषय में और अधिक जानने को मिलता है।

कहते हैं कि अच्छे और प्रतिभाशाली लोगों की आवश्यकता ऊपर वाले को भी है इसीलिए वह इस प्रकार की महान विभूतियों को जल्द से जल्द अपने पास बुला लेता है, संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री अधीश जी के साथ भी ऐसा ही हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए उन्होंने जीवन अर्पण किया; पर विधाता ने 52 वर्ष की अल्पायु में ही उन्हें अपने पास बुला लिया।

अधीश जी का जन्म 17 अगस्त, 1955 को आगरा के एक अध्यापक जगदीश भटनागर एवं उषादेवी के घर में हुआ। बालपन से ही उन्हें पढ़ने और भाषण देने का शौक था। 1968 में विद्या भारती द्वारा संचालित एक इण्टर कॉलेज के प्राचार्य श्री लज्जाराम तोमर ने उन्हें स्वयंसेवक बनाया। धीरे-धीरे संघ के प्रति प्रेम बढ़ता गया और बीएससी, एलएलबी करने के बाद साल 1973 में उन्होंने संघ कार्य हेतु घर छोड़ दिया।

अधीश जी ने सर्वोदय के सम्पर्क में आकर खादी पहनने का व्रत लिया और उसे आजीवन निभाया। साल 1975 में आपातकाल लगने पर वे जेल गये और भीषण अत्याचार सहे। आपातकाल के बाद उन्हें विद्यार्थी परिषद में और 1981 में संघ कार्य हेतु मेरठ भेजा गया। मेरठ महानगर, सहारनपुर जिला, विभाग, मेरठ प्रान्त बौद्धिक प्रमुख, प्रचार प्रमुख आदि दायित्वों के बाद उन्हें 1996 में लखनऊ भेजकर उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख का काम दिया गया।

प्रचार प्रमुख के नाते उन्होंने लखनऊ के ‘विश्व संवाद केन्द्र’ के काम में नये आयाम जोड़े। अत्यधिक परिश्रमी, मिलनसार और वक्तृत्व कला के धनी अधीश जी से जो भी एक बार मिलता, वह उनका होकर रह जाता। इस बहुमुखी प्रतिभा को देखकर संघ नेतृत्व ने उन्हें अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख और फिर प्रचार प्रमुख का काम दिया। अब पूरे देश में उनका प्रवास होने लगा। अधीश जी अपने शरीर के प्रति प्रायः उदासीन रहते थे। दिनभर में अनेक लोग उनसे मिलने आते थे, अतः बार-बार चाय पीनी पड़ती थी। इससे उन्हें कभी-कभी शौचमार्ग से रक्त आने लगा। उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जब यह बहुत बढ़ गया, तो दिल्ली में इसकी जाँच करायी गयी। चिकित्सकों ने बताया कि यह कैंसर है और काफी बढ़ गया है।

यह जानकारी मिलते ही सब चिन्तित हो गये। अंग्रेजी, पंचगव्य और योग चिकित्सा जैसे उपायों का सहारा लिया गया; पर रोग बढ़ता ही गया। मार्च 2007 में दिल्ली में जब फिर जाँच हुई, तो चिकित्सकों ने अन्तिम घण्टी बजा दी। उन्होंने साफ कह दिया कि अब दो-तीन महीने से अधिक का जीवन शेष नहीं है। अधीश जी ने इसे हँसकर सुना और स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने एक विरक्त योगी की भाँति अपने मन को शरीर से अलग कर लिया। अब उन्हें जो कष्ट होता, वे कहते यह शरीर को है, मुझे नहीं। कोई पूछता कैसा दर्द है, तो कहते, बहुत मजे का है। इस प्रकार वे हँसते-हँसते हर दिन मृत्यु की ओर बढ़ते रहे। जून के अन्तिम सप्ताह में ठोस पदार्थ और फिर तरल पदार्थ भी बन्द हो गये।

चार जुलाई, 2007 को वे बेहोश हो गये। इससे पूर्व उन्होंने अपना सब सामान दिल्ली संघ कार्यालय में कार्यकर्त्ताओं को दे दिया। बेहोशी में भी वे संघ की ही बात बोल रहे थे। घर के सब लोग वहाँ उपस्थित थे। उनका कष्ट देखकर पाँच जुलाई शाम को माता जी ने उनके सिर पर हाथ रखकर कहा- बेटा अधीश, निश्चिन्त होकर जाओ। जल्दी आना और बाकी बचा संघ का काम करना। इसके कुछ देर बाद ही अधीश जी ने देह त्याग दी। आज 5 जुलाई को आदरणीय अधीश जी की पुण्यतिथि है। मैं उनको याद करते हुए उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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