रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रदेश कार्यालय पर पेट्रोल बम हमले की जांच अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। 17 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड, बिहार, दिल्ली और कर्नाटक में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों की जांच के लिए हुई यह कार्रवाई बताती है कि जून में हुई घटना की जांच अब केवल हमलावरों की पहचान तक सीमित नहीं है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने में तीन महीने में जांच की कई महत्वपूर्ण कड़ियां जुड़ी हैं।
आधी रात को RSS कार्यालय निशाने पर
रांची के चुटिया थाना क्षेत्र के निवारणपुर स्थित RSS कार्यालय पर 16 जून 2026 को देर रात दो युवकों ने पेट्रोल बम फेंके थे। सीसीटीवी में दोनों की गतिविधियां कैद हुईं। जानकारी के अनुसार कार्यालय में करीब 20 लोग मौजूद थे। हमला होने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी। एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी मामला दो अज्ञात व्यक्तियों द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय की ओर बम फेंके जाने के रूप में दर्ज है। घटना के तुरंत बाद केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री और रांची सांसद संजय सेठ संघ कार्यालय पहुंच कर इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा था कि यदि हमला सफल होता तो कार्यालय में मौजूद लोग इसकी चपेट में आ सकते थे। उन्होंने सीसीटीवी में हमलावरों की गतिविधियों का हवाला देते हुए इसे सामान्य घटना न मानकर इसकी नीयत और पूरी साजिश की गहन जांच की मांग की थी ।
इसके बाद अगले दिन 17 जून को पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और एफएसएल की मदद से जांच आगे बढ़ाई। इसी दौरान झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा था कि यह किसी बड़ी घटना की तैयारी हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों को जल्द पकड़ने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की थी। इसी दिन पुलिस की जांच में हमलावरों की पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण सुराग मिले और मामले की तह तक जाने के लिए कई टीमें सक्रिय की गईं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए घटना के दो दिन के अंदर 18 जून को पुलिस ने सैफ अंसारी, अमन अंसारी और सायम सुजान को गिरफ्तार किया। जांच में हमले से पहले संघ कार्यालय की रेकी किए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने लोहरदगा से दो आरोपितों को पकड़ा और एक वाहन भी बरामद किया। इसके बाद मामला अचानक और नाटकीय हो गया। गिरफ्तार सैफ अंसारी पुलिस हिरासत से भाग निकला। पीछा करने के दौरान पुलिस से मुठभेड़ हुई और उसके पैर में गोली लगी। पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया। इस घटनाक्रम ने जांच एजेंसियों के सामने आरोपितों की गतिविधियों और उनके नेटवर्क को लेकर नए सवाल खड़े किए। इसी घटनाक्रम के बीच पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “राष्ट्रवाद पर हमला” बताते हुए विशेष जांच दल के गठन और पूरी साजिश का पर्दाफाश करने की मांग की थी ।
एनआईए ने संभाली जांच की कमान
इसके बाद 1 जुलाई 2026 को पुलिस और झारखंड एटीएस की जांच के बाद मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचा। 1 जुलाई को एनआईए ने केस टेकओवर किया। चुटिया थाने में दर्ज प्राथमिकी को एनआईए ने अपने अधीन लिया और विस्फोटक अधिनियम तथा यूएपीए सहित लागू धाराओं के तहत जांच आगे बढ़ाई। एनआईए ने हमले के पीछे संभावित आतंकी संपर्कों और अन्य कड़ियों की जांच शुरू की।
लोहरदगा में एनआईए की कार्रवाई
जुलाई में एनआईए ने रांची और लोहरदगा के कई ठिकानों पर तलाशी ली। 17 जुलाई की कार्रवाई में लोहरदगा के कई घरों की तलाशी हुई। एक आरोपित के घर का दरवाजा नहीं खुलने पर टीम को क्रेन की मदद से भवन में प्रवेश करना पड़ा। डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य सामग्री की जांच की गई।
जब जांच में आया विदेशी कनेक्शन का एंगल
एनआईए की जांच में आरोपितों के संभावित विदेश संपर्कों की भी पड़ताल शुरू हुई। मीडिया रिपोर्टों में एक आरोपित की दुबई यात्रा और कथित पाकिस्तानी संपर्कों की जांच का उल्लेख आया।
पटना तक पहुंची जांच की कार्रवाई
सितंबर में एनआईए ने पटना में गोपालगंज निवासी संदिग्ध संदीप गुप्ता से जुड़े दो फ्लैटों की तलाशी ली। जांच एजेंसी उसके संभावित वित्तीय संपर्कों और बैंक खातों की पड़ताल कर रही थी। रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि एनआईए आतंकी फंडिंग और दूसरे राज्यों से जुड़े नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार राज्यों में छापेमारी
इसके बाद जांच का सबसे नया अध्याय सामने आया है। 17 सितंबर को ED ने दिल्ली, बिहार, झारखंड और कर्नाटक में चार ठिकानों पर तलाशी ली। अब जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हमले से जुड़े लोगों तक धन कैसे पहुंचा और क्या संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का इस मामले से कोई संबंध है। यानी 16 जून की आधी रात संघ कार्यालय पर फेंके गए दो पेट्रोल बमों से शुरू हुई जांच 17 सितंबर तक पुलिस से एटीएस, एटीएस से एनआईए और फिर एनआईए की जांच से ईडी की वित्तीय पड़ताल तक पहुंच चुकी है। अब जांच के सामने तीन बड़े सवाल हैं, हमले की वास्तविक साजिश किसने रची, आरोपितों को निर्देश या संसाधन कहां से मिले और क्या इस पूरी घटना के पीछे कोई संगठित नेटवर्क या वित्तीय तंत्र था? इन सवालों के अंतिम उत्तर जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएंगे।
















