Archive सामाजिक कार्यकर्ता के लिए कोई भी व्यक्ति गुरु नहीं होना चाहिए, अन्यथा वह ध्येयनिष्ठ न होकर व्यक्तिनिष्ठ बन जाता है। वास्तव में संगठन ही उसके लिए गुरु है। समस्त समाज ही उसका गुरु