बर्लिन/तेहरान। ईरान में प्रदर्शनकारियों को दी जा रही मौत की सजा और फांसी के खिलाफ 32 देशों ने संयुक्त रूप से आवाज उठाई है। यूरोप के 29 देशों के अलावा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने ईरान की सरकार से प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करने और मौत की सजा के इस्तेमाल पर रोक लगाने की अपील की है।
जर्मनी के विदेश मंत्रालय की ओर से साझा किए गए संयुक्त बयान में कहा गया कि ईरान के लोगों को बिना किसी डर के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने की आजादी मिलनी चाहिए। देशों ने ईरानी नेतृत्व से जनता की आवाज सुनने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद देश में फांसी और मौत की सजा के मामले लगातार सामने आए हैं। उनके मुताबिक, 19 मार्च के बाद कम से कम 56 लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों में फांसी दी गई, जिनमें इस साल की शुरुआत में हुए व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों से कथित तौर पर जुड़े 27 लोग भी शामिल हैं।
इस साल अब तक 916 लोगों की फांसी का दावा
ईरान में मानवाधिकारों की निगरानी करने वाले अब्दोर्रहमान बोरूमंद सेंटर के अनुसार, 2026 की शुरुआत से अब तक 916 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। संगठन का दावा है कि अगस्त में अब तक 15 लोगों को मृत्युदंड दिया गया है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि हालांकि संभव नहीं हो सकी है।
यूरोपीय संघ की विदेश नीति और सुरक्षा मामलों की राजनयिक इकाई यूरोपियन एक्सटर्नल एक्शन सर्विस ने अप्रैल में भी ईरान में फांसी की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई थी। ईयू ने उस समय मृत्युदंड की दर को बेहद चिंताजनक बताते हुए प्रदर्शन के आरोप में गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग की थी।

















