अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार रखी
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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार रखी

इस आतंकी हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 246 लोग घायल हुए थे।

Written byएजेंसीएजेंसी
Jul 7, 2026, 06:31 pm IST
inभारत, गुजरात
कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत के ऐतिहासिक फैसले को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 246 लोग घायल हुए थे।

न्यायमूर्ति ए.वाई. कोगजे और एस.जे. दवे की खंडपीठ ने आज मंगलवार को यह फैसला सुनाया। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ितों और उनके परिजनों को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायलों को 01 लाख रुपये का मुआवजा 31 मार्च 2027 तक देने का आदेश दिया है।

26 जुलाई 2008 को हुए थे सिलसिलेवार धमाके

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में 70 मिनट के भीतर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस सीरियल ब्लास्ट में बमों को साइकिलों पर रखे टिफिन बॉक्स के अंदर छिपाकर प्लांट किया गया था। इसके दो दिन बाद सूरत के विभिन्न स्थानों से भी बम बरामद किए गए थे, हालांकि वे फटे नहीं थे। मामले की जांच में पुलिस ने 100 से अधिक लोगों को आरोपित बनाया था, जिनमें से 78 पर मुकदमा चला।

2022 में विशेष अदालत ने सुनाया था फैसला

फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने 77 आरोपितों में से 49 आरोपितों को दोषी ठहराया था, जबकि 28 आरोपितों को बरी कर दिया था। बरी किए गए लोगों में मुबीन शेख और मंसूर पीरभॉय भी शामिल थे, जिन पर धमाकों की साजिश रचने और धमकी भरे ई-मेल भेजने का आरोप था।

दोषियों में प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया(सिमी) के पूर्व नेता सफदर नागौरी सहित गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल समेत 11 राज्यों के आरोपित शामिल हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपितों ने बाद में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) नाम से नया आतंकी संगठन बनाया था।

यूएपीए सहित कई धाराओं में हुई सजा

सभी दोषियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया। उन पर हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का प्रयास, राजद्रोह तथा आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हुए।

इस मामले में अहमदाबाद की 20 और सूरत की 15 एफआईआर सहित कुल 35 मामलों को एक साथ जोड़कर सुनवाई की गई। लंबे समय तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने 1,163 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इनमें 26 प्रमुख गवाहों की पहचान सुरक्षा कारणों से गुप्त रखी गई थी।

 

Topics: अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्टअहमदाबाद धमाकेअहमदाबाद विस्फोट 2008फांसी की सजागुजरात हाई कोर्ट
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