भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के साथ ऑस्ट्रेलिया के ऐतिहासिक मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में एक और नया अध्याय जुड़ा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन के साथ यहां आयोजित विशेष खेल कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान दोनों देशों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया खेल सहयोग रोडमैप जारी किया। इसका उद्देश्य खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, खेल प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण, खेल उद्योग में निवेश और युवा खिलाड़ियों के आदान-प्रदान को नई गति देना है। दोनों देशों ने भविष्य में भारत-ऑस्ट्रेलिया युवा खेल महोत्सव आयोजित करने पर भी सहमति जताई है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित खेल मैदानों में शुमार मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड का इतिहास 170 वर्ष से भी ज्यादा पुराना है।
वर्ष 1853 में स्थापित यह स्टेडियम में करीब एक लाख से ज्यादा दर्शकों के बैठने की क्षमता है। एमसीजी स्टेडियम से एक दिन पहले मार्बल स्डेडियम में आयोजित मोदी के कार्यक्रम में मौजूद रहे भारतीय मूल ऑस्ट्रेलियन नागरिक एवं थिंक हैचक्यू के ब्रांड अंबेसडर पुनीत सिंह ठाकुर के अनुसार यहां मोदी के आकर्षण का नतीजा था कि यहां तीन से चार डिग्री तापमान में भी लोग 30 हजार से ज्यादा संख्या में पहुंचे थे,जो ऑस्ट्रेलिया में उनके पिछले आगमनों के मुकाबले इस बार रिकार्ड तोड़ संख्या रही। शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया के जिस स्टेडियम में कार्यक्रम था, उसे ऑस्ट्रेलिया में प्यार से “द जी” (The G) कहा जाता है और यहां के नागरिक एमसीजी स्टेडियम को खेल संसद कह कर गौरव महूसस करते हैं।

एमसीजी का नाम क्रिकेट इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 1877 में दुनिया का पहला आधिकारिक टेस्ट मैच इसी मैदान पर खेला गया था। इसके बाद 1971 में पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ओडीआई) मैच भी यहीं आयोजित हुआ। इतना ही नहीं, यह मैदान केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। 1956 के मेलबर्न ओलंपिक का मुख्य स्टेडियम भी यही था, जबकि 2006 राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन और समापन समारोह की मेजबानी भी इसी ने की। हर वर्ष 26 दिसंबर को खेला जाने वाला बॉक्सिंग डे टेस्ट इसी मैदान की सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में शामिल है, जिसका इंतजार दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमी करते हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी का मजबूत संकेत
थिंक हैचक्यू के ब्रांड अंबेसडर पुनीत सिंह ठाकुर के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी का इस ऐतिहासिक मैदान पर पहुंचना केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी का मजबूत संकेत माना जा रहा है। कार्यक्रम में दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त रूप से खेल सहयोग रोडमैप जारी किया, जिससे खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, तकनीक, कोचिंग, प्रतिभा विकास और खेल उद्योग में साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।
दोनों नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि समाजों और देशों को जोड़ने वाली सबसे प्रभावी ताकतों में से एक है।
भारत 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा और ऑस्ट्रेलिया 2032 के ब्रिस्बेन ओलंपिक की — एमसीजी में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया खेलों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दशक में प्रवेश कर रहे हैं। भारत वर्ष 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 के ब्रिस्बेन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खेल अवसंरचना, खेल विज्ञान और खेल उद्योग के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।कार्यक्रम के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने कबड्डी, ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल और क्रिकेट के प्रदर्शनी मुकाबलों में भाग ले रहे युवा खिलाड़ियों से भी मुलाकात की। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के महान खिलाड़ी स्टीव वॉ और पूर्व क्रिकेटर लिसा स्थलेकर सहित खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं।
खेल इतिहास,सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक बना एमसीजी
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड आज केवल एक क्रिकेट स्टेडियम नहीं, बल्कि खेल इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी का यहां दौरा इस बात का संकेत है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अब अपनी रणनीतिक साझेदारी को केवल व्यापार और सुरक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि खेल, युवाओं और जन-जन के रिश्तों के माध्यम से इसे और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

















