अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन और बड़े मीडिया संस्थान एक बार फिर आमने-सामने हैं। व्हाइट हाउस से कुछ प्रमुख मीडिया संस्थानों के पत्रकारों का प्रवेश रोके जाने के बाद अब ट्रंप प्रशासन ने अपना अलग डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म शुरू कर दिया है। इसे ‘TRUMP TV: The Essentials Station’ नाम दिया गया है। इस नए प्लेटफॉर्म को 24 घंटे चलने वाली डिजिटल वीडियो स्ट्रीम के तौर पर शुरू किया गया है। व्हाइट हाउस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर शुरू हुई इस स्ट्रीम में राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण, प्रशासन की घोषणाएं, सरकारी कार्यक्रमों के वीडियो और दूसरे महत्वपूर्ण फुटेज दिखाए जाएंगे। व्हाइट हाउस का कहना है कि इसका उद्देश्य प्रशासन से जुड़ी अहम जानकारियों और वीडियो को लोगों तक सीधे पहुंचाना है।
मीडिया से क्यों बढ़ा विवाद?
‘Trump TV’ की शुरुआत ऐसे समय हुई है, जब व्हाइट हाउस और CNN, MS NOW तथा Politico जैसे मीडिया संस्थानों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। 19 सितंबर को इन संस्थानों के कुछ पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश नहीं दिया गया और उनके प्रेस क्रेडेंशियल्स को लेकर भी कार्रवाई की गई। इसके बाद तीनों मीडिया संस्थानों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया। उनका कहना है कि पत्रकारों को उनकी रिपोर्टिंग के कारण व्हाइट हाउस से बाहर करना प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का सवाल उठाता है।
प्रशासन का तर्क है कि प्रेस की स्वतंत्रता का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी खास मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस में हर समय प्रवेश का अधिकार मिल जाता है। ट्रंप भी इन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते रहे हैं और कई बार उन्हें गलत या भ्रामक खबरों के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। इस विवाद का असर दूसरे मीडिया नेटवर्कों पर भी पड़ा है। टीवी पूल कवरेज को लेकर कई बड़े नेटवर्कों ने अपनी भागीदारी रोक दी है। ऐसे में Trump TV अब व्हाइट हाउस के कार्यक्रमों के वीडियो उपलब्ध कराने का एक नया माध्यम बन गया है। फिलहाल मामला अदालत में है और आगे की सुनवाई में यह साफ होगा कि मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश मिलता है या नहीं। इस बीच Trump TV की शुरुआत ने अमेरिका में सरकार और मीडिया के बीच चल रहे विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

















