कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची मामले में दिल्ली की विशेष अदालत के फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत ने उस ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था। अब इस मामले की दोबारा सुनवाई होगी। अदालत ने मामला एसीजेएम के पास वापस भेजते हुए कानून के अनुसार नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया है। फिलहाल इस मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। विशेष अदालत ने केवल पहले के आदेश को रद्द किया है और मामले पर दोबारा विचार करने को कहा है। अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
ट्रायल कोर्ट के फैसले पर अदालत ने क्या कहा?
राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत के न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश कानून और लगाए गए आरोपों की सही समझ पर आधारित नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि पहले के आदेश में एफआईआर की मांग खारिज करने के पर्याप्त कारण नहीं बताए गए थे। विशेष अदालत के अनुसार, ऐसे मामले में सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों से कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं। अगर मामला पुलिस जांच की मांग करता है, तो इस बारे में भी अदालत को स्पष्ट और कारणयुक्त आदेश देना चाहिए।
इस मामले में मतदाता सूची में कथित छेड़छाड़, किसी गैर-नागरिक का नाम शामिल करने और गलत घोषणा या दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए हैं। विशेष अदालत ने कहा कि इन आरोपों को देखते हुए यह तय करना जरूरी है कि क्या पुलिस जांच की जरूरत बनती है। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट को शिकायत में लगाए गए आरोपों और संभावित संज्ञेय अपराध पर ध्यान देना चाहिए था। इसके बजाय वह नागरिकता से जुड़े केंद्र सरकार के अधिकार और मतदाता सूची को लेकर निर्वाचन आयोग की शक्तियों जैसे मुद्दों पर चली गई। विशेष अदालत ने मामला दोबारा एसीजेएम के पास भेज दिया है। अब निचली अदालत शिकायत और आरोपों पर नए सिरे से सुनवाई करेगी। 29 सितंबर की सुनवाई में मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

















