देहरादून: राजधानी देहरादून के पुरकुल, गुनियाल गांव में निर्मित सैन्य धाम केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत माता के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को समर्पित एक पावन तीर्थ स्थापित होने जा रहा है।
शौर्य, राष्ट्रसेवा और प्रेरणा के अद्भुत संगम, सैन्य धाम का भव्य प्रवेश द्वार उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला एवं सांस्कृतिक विरासत का सुंदर परिचय कराता है। परिसर में प्रवेश करते ही दोनों ओर भारतीय सेना के दो महान वीरों अमर शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह (जसवंत बाबा) और हरभजन सिंह (हरभजन बाबा) के स्मारक भारतीय सैन्य परंपरा, आस्था और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।
यहां स्थित ऑडिटोरियम, संग्रहालय, ओपन एयर थिएटर तथा विभिन्न युद्धों में वीरगति को प्राप्त शहीदों के शिलापट्ट तथा वीर योद्धाओं की प्रतिमाएँ मन में राष्ट्रप्रेम, कृतज्ञता और गर्व की भावना जागृत करती हैं।
देवभूमि है वीरभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को सदैव ‘देवभूमि और ‘वीरभूमि’ के रूप में सम्मान दिया है। उत्तराखंड के सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति उनका सम्मान अनेक अवसरों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनकी प्रेरणा से निर्मित सैन्य धाम रूपी यह पहल भारतीय वीरों के प्रति राष्ट्रीय कृतज्ञता की भावना प्रकट महत्वपूर्ण प्रयास है। पूर्व कर्नल अजय कोठियाल का कहना है कि इस भव्य सैन्य धाम को इसकी गरिमा और उत्कृष्ट व्यवस्था को बनाए रखते हुए शीघ्र ही आम नागरिकों के लिए खोला जाए।
पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी का कहना है कि जल्द ही इसका लोकार्पण किया जाएगा उससे पूर्व पूरे राज्य में शहीद कलश यात्रा निकाली जाएगी और देशभर से आने वाले लोग यहां आकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें और उनके बलिदान की गाथाएं जान सकें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि ये सैन्य धाम हमारी विरासत का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत मां की रक्षा में बलिदान करने वालों की गाथा यहां दर्ज की गई है जो कि राष्ट्र समर्पण का भाव पैदा करती है।













