नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार (5 अगस्त 2026) को आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और अन्य नेताओं को जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा के खिलाफ कथित “अपमानजनक” और “दुष्प्रचार” वाले सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान किया है.
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वकील ने कहा कि उन्हें अभी तक वे दस्तावेज और सामग्री प्राप्त नहीं हुई है जो इस आपराधिक अवमानना मामले का मुख्य आधार हैं. अन्य आरोपियों के वकीलों ने भी अदालत के समक्ष यही पक्ष रखा.
हाईकोर्ट का निर्देश- रजिस्ट्री उपलब्ध कराए केस की पूरी सामग्री
वकीलों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय की पीठ ने कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि मामले से जुड़ी सभी संबंधित सामग्री और दस्तावेज उत्तरदाताओं (आप नेताओं) को तुरंत उपलब्ध कराए जाएं. इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर 2026 की तिथि तय की है.
अदालत ने इसी मामले में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास को भी अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी है. इन दोनों के खिलाफ जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा के विरुद्ध एक “नियोजित सोशल मीडिया अभियान” (Orchestrated Social Media Campaign) चलाने का आरोप है.
एक नजर में जानिए दिल्ली हाईकोर्ट आपराधिक अवमानना केस के मुख्य बिंदु
| मामले का पहलू | अदालती कार्यवाही का मुख्य ब्योरा |
|---|---|
| मामला / याचिका | जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा के खिलाफ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट पर आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt). |
| मुख्य आरोपी (उत्तरदाता) | अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास. |
| सुनवाई करने वाली पीठ | न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ. |
| ताजा अदालती आदेश | जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह की मोहलत; रजिस्ट्री को दस्तावेज मुहैया कराने का निर्देश. |
| अगली सुनवाई तिथि | 21 सितंबर 2026. |
क्या है पूरा विवाद? जानिए कब और क्यों शुरू हुई अवमानना की कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि दिल्ली आबकारी नीति मामले (Delhi Excise Policy Case) से जुड़ी सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वरणा कांता शर्मा ने 14 मई को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी.
विवाद के मुख्य कारण और अदालती घटनाक्रम:
- न्यायाधीश पर राजनीतिक निष्ठा का आरोप: जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा ने उन सोशल मीडिया पोस्ट पर कड़ा एतराज जताया था, जिनमें उन पर “राजनीतिक निष्ठा” और “पक्षपात” का आरोप लगाया गया था.
- संपादित (Edited) वीडियो वायरल करने का मामला: वाराणसी के एक शिक्षण संस्थान में दिए गए न्यायमूर्ति शर्मा के भाषण के एक वीडियो को भ्रामक रूप से एडिट करके सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया था.
- सुओ मोटू (Suo Motu) नोटिस: 19 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस स्वतः संज्ञान (Suo Motu) अवमानना मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा था.
अदालत में अब उत्तरदाताओं को सामग्री प्राप्त होने के बाद अगले चार हफ्तों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण दाखिल करना होगा, जिसके बाद 21 सितंबर को इस मामले में आगे की कानूनी बहस होगी.











