प्रयागराज। प्रयागराज अशोक सिंघल की कर्मभूमि रही है। महावीर भवन उनका घर रहा और उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा हिंदू समाज, भारतीय संस्कृति और धर्म के उत्थान के लिए समर्पित किया। अशोक सिंघल के बताए मार्ग पर चलना और उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उक्त बातें मंगलवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन कन्वेंशन सेंटर, म्योहाल चौराहा, स्टेनली रोड में अशोक सिंघल की जन्मशती वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता, राम दरबार और अशोक सिंघल की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। इसके बाद पर्दे पर अशोक सिंघल के जीवन के विभिन्न पहलुओं और उनके कार्यों पर आधारित प्रस्तुति दिखाई गई। एकल गीत के बाद मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया गया।

संघ प्रचारक से विश्व हिंदू परिषद तक का सफर
चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल ने मेटालर्जी साइंस से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। वर्ष 1950 में उन्होंने प्रचारक जीवन शुरू किया और सहारनपुर तथा दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में कार्य किया। वर्ष 1982 से 2015 तक उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के लिए काम किया। प्रयागराज में महावीर भवन उनका घर रहा और संघ के तत्कालीन सरसंघचालक रज्जू भैया से उनके पारिवारिक संबंध थे।
उन्होंने बताया कि अशोक सिंघल ने अपने जीवन में दो बार इंडिया गेट पर विराट हिंदू समाज का बड़ा एकत्रीकरण कराया। इसके बाद इंडिया गेट पर सभा के आयोजन पर रोक लगा दी गई। उनके प्रयासों से धर्म संसद के आयोजन को भी गति मिली।
“अस्पृश्यता जैसी सामाजिक समस्या के समाधान के लिए अशोक सिंघल ने संतों को एक मंच पर लाकर अभियान चलाया। उन्होंने मतांतरण के विरोध, सामाजिक समरसता, गौ संरक्षण और वेदों के प्रचार के लिए लगातार कार्य किया।” – चंपत राय
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और संत समाज के विचार
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
- केशव प्रसाद मौर्य: उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिनकी उंगली पकड़कर उन्होंने संगठन का कार्य सीखा, आज उन्हीं अशोक सिंघल के जन्मशती समारोह में उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के तीन संकल्पों में अयोध्या, मथुरा और काशी प्रमुख थे, और मथुरा-काशी का संकल्प पूरा होने का समय अब आ गया है।
- महंत यमुनापुरी महाराज: महा निर्वाणी अखाड़े के महामंत्री ने कहा कि वर्ष 1992 में अशोक सिंघल के आह्वान और उनके नेतृत्व को देखकर वह श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में शामिल हुए और समाज में नवचेतना पैदा हुई।
- गणमान्य उपस्थिति: मंच पर विहिप काशी प्रांत अध्यक्ष कविंद्र प्रताप सिंह, प्रांत संगठन मंत्री राजेंद्र, डॉ. राज नारायण, संजय गुप्ता, अजय गुप्ता, विनोद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल सहित अनेक पदाधिकारी, विधायक, प्रयागराज के महापौर और संतगण मौजूद रहे।
चंपत राय ने यह भी बताया कि जब पंजाब आतंकवाद की आग में जल रहा था, तब उन्होंने संतों की सद्भावना यात्रा निकालकर समाज में एकता और शांति का संदेश दिया था। श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर शिलान्यास का कार्यक्रम समाज के अनुसूचित वर्ग के व्यक्ति से कराने का निर्णय भी सामाजिक समरसता का बड़ा संदेश था।


















