FCRA बिल 2026: कानून भारत में बन रहा, पर दिक्कत अमेरिका को क्यों?
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FCRA बिल 2026: कानून भारत में बन रहा, पर दिक्कत अमेरिका को क्यों?

भारत सरकार का FCRA संशोधन विधेयक 2026 अमेरिका में विवादित। वेस्ट वर्जीनिया सांसद रिले मूर ने चेतावनी दी कि इससे चर्च और धार्मिक संगठनों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा। जानें प्रस्तावित बदलाव, आंकड़े और भारत-अमेरिका संबंधों पर असर।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 5, 2026, 08:45 am IST
in विश्व
FCRA Bill 2026 relay moore

रिले मूर, अमेरिकी सांसद

भारत सरकार FCRA बिल ला रही है, लेकिन दिक्कत अमेरिका को हो रही है। इसी क्रम में अमेरिका के एक सांसद रिले मूर ने भारत के विदेशी योगदान नियम यानी FCRA में प्रस्तावित बदलावों की आलोचना की। उनका आरोप है कि ये बदलाव सरकार को चर्च और धार्मिक चैरिटी के प्रबंधन पर कब्जा करने का मौका दे सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है।

रिले मूर वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य हैं। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि भारत में ईसाई धर्म का लंबा इतिहास है। सेंट थॉमस द अपोस्टल मालाबार कोस्ट पर आए थे। इसके बावजूद संसद FCRA नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है, जिससे सरकार चर्च और धार्मिक चैरिटी का प्रबंधन ले सकती है। उन्होंने इसे ईसाइयों के खिलाफ साफ हमला बताया और कहा कि अगर बिल इसी रूप में आगे बढ़ता है तो यह द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी चिंता का विषय बन सकता है।

FCRA बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं

दरअसल, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में एक नामित प्राधिकारी बनाने का प्रस्ताव है। अगर किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाए, सरेंडर हो जाए या रिन्यू न होने से खत्म हो जाए, तो यह अथॉरिटी विदेशी योगदान और उससे बने संपत्तियों का प्रबंधन संभाल लेगी।

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बिल में साफ कहा गया है कि अगर संपत्ति में पूजा स्थल शामिल है तो अथॉरिटी को उसका धार्मिक स्वरूप बनाए रखना होगा। साथ ही अधिनियम के उल्लंघन पर अधिकतम सजा को पांच साल की जेल से घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव भी है।

FCRA क्या हैं आंकड़े

FCRA विदेशी योगदान को नियंत्रित करता है। इसमें एनजीओ, चैरिटेबल ट्रस्ट, शिक्षण संस्थान, धार्मिक संस्थाएं और अन्य संगठन शामिल हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों को 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी योगदान मिला। 15 जुलाई 2026 तक आंकड़े बताते हैं कि 14,449 सक्रिय FCRA रजिस्ट्रेशन हैं। 22,498 रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुके हैं और 15,212 की मियाद खत्म हो गई है। यह बिल अभी संसद में चर्चा के चरण में है। रिले मूर ने भारत से अपील की है कि मौजूदा रूप में इसे आगे न बढ़ाया जाए।

Topics: विदेशी योगदान विनियमन संशोधनचर्च प्रबंधन FCRAभारत अमेरिका संबंधFCRA बिल 2026रिले मूर FCRA
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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