क्या है Madman Theory ? : ईरान तनाव के बीच उठे सवाल, ट्रंप ने युद्ध में इसे किया इस्तेमाल
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क्या है Madman Theory ? : ईरान तनाव के बीच उठे सवाल, ट्रंप ने युद्ध में इसे किया इस्तेमाल

डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर आक्रामक बयानों के पीछे क्या ‘मैडमैन थ्योरी’ की रणनीति है? जानिए कैसे यह मनोवैज्ञानिक खेल वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर रहा है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Apr 9, 2026, 04:40 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
Representational Image

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Donald Trump Iran controversy के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर ईरान को दी गई उनकी धमकी और उसके बाद ईरानी सभ्यता को मिटाने जैसी बातों ने कूटनीतिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए। इन बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और राजनीतिक विश्लेषकों ने कड़ी आलोचना की है।

क्या यह सोची-समझी रणनीति थी?

दरअसल Madman Theory strategy को लेकर अब रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि ट्रंप के ये आक्रामक और अस्थिर दिखने वाले बयान दरअसल एक रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। इस रणनीति का उद्देश्य विरोधी पक्ष को भ्रमित करना और उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना होता है, ताकि वह जल्दबाजी में निर्णय लेने को मजबूर हो जाए।

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मैडमैन थ्योरी क्या है?

बता दें कि What is Madman Theory के तहत कोई नेता खुद को अप्रत्याशित, गुस्सैल या ‘पागल’ जैसा प्रस्तुत करता है। इसका मकसद विरोधी को यह विश्वास दिलाना होता है कि वह किसी भी हद तक जा सकता है, यहां तक कि परमाणु युद्ध भी कर सकता है। इससे सामने वाला पक्ष डरकर झुक सकता है या समझौते की राह चुन सकता है।

रिचर्ड निक्सन से जुड़ी है यह रणनीति

इस Richard Nixon Madman Theory की जड़ें वियतनाम युद्ध के समय तक जाती हैं, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इस रणनीति का इस्तेमाल किया था। उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा था कि दुश्मन को यह संदेश दिया जाए कि वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसका मकसद था दुश्मन में भय और अनिश्चितता पैदा करना, ताकि वह दबाव में आ जाए।

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ईरान के खिलाफ ट्रंप की बदलती रणनीति

इसी Trump Iran war strategy के तहत ट्रंप के बयानों में लगातार बदलाव देखने को मिला। कभी उन्होंने ईरान को “पाषाण युग में भेजने” और “सभ्यता खत्म करने” की धमकी दी, तो कुछ ही घंटों बाद बातचीत और सीजफायर की बात भी की। इस तरह के विरोधाभासी रुख ने ट्रंप की छवि एक अप्रत्याशित नेता के रूप में पेश की।

‘गुड कॉप, बैड कॉप’ जैसी नीति

बता दें कि इस रणनीति को Good cop bad cop diplomacy के रूप में भी देखा जा रहा है। ट्रंप कभी सख्त और आक्रामक रुख अपनाते हैं, तो कभी नरम पड़कर बातचीत की पेशकश करते हैं। इससे विरोधी पक्ष के लिए उनकी अगली चाल का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है, जो मैडमैन थ्योरी का मुख्य उद्देश्य है।

वैश्विक राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

इसे Global geopolitics impact के नजरिए से देखें तो इस तरह की रणनीति अल्पकालिक दबाव बनाने में कारगर हो सकती है, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम खतरनाक भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी भाषा और रणनीति से तनाव बढ़ सकता है और कूटनीतिक संबंधों में अस्थिरता आ सकती है।

बरहाल International politics analysis के इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक वैश्विक राजनीति में केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक रणनीतियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। ‘मैडमैन थ्योरी’ इसी का एक उदाहरण है, जो डर और अनिश्चितता के जरिए कूटनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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