Donald Trump Iran controversy के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर ईरान को दी गई उनकी धमकी और उसके बाद ईरानी सभ्यता को मिटाने जैसी बातों ने कूटनीतिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए। इन बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और राजनीतिक विश्लेषकों ने कड़ी आलोचना की है।
क्या यह सोची-समझी रणनीति थी?
दरअसल Madman Theory strategy को लेकर अब रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि ट्रंप के ये आक्रामक और अस्थिर दिखने वाले बयान दरअसल एक रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। इस रणनीति का उद्देश्य विरोधी पक्ष को भ्रमित करना और उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना होता है, ताकि वह जल्दबाजी में निर्णय लेने को मजबूर हो जाए।
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मैडमैन थ्योरी क्या है?
बता दें कि What is Madman Theory के तहत कोई नेता खुद को अप्रत्याशित, गुस्सैल या ‘पागल’ जैसा प्रस्तुत करता है। इसका मकसद विरोधी को यह विश्वास दिलाना होता है कि वह किसी भी हद तक जा सकता है, यहां तक कि परमाणु युद्ध भी कर सकता है। इससे सामने वाला पक्ष डरकर झुक सकता है या समझौते की राह चुन सकता है।
रिचर्ड निक्सन से जुड़ी है यह रणनीति
इस Richard Nixon Madman Theory की जड़ें वियतनाम युद्ध के समय तक जाती हैं, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इस रणनीति का इस्तेमाल किया था। उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा था कि दुश्मन को यह संदेश दिया जाए कि वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसका मकसद था दुश्मन में भय और अनिश्चितता पैदा करना, ताकि वह दबाव में आ जाए।
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ईरान के खिलाफ ट्रंप की बदलती रणनीति
इसी Trump Iran war strategy के तहत ट्रंप के बयानों में लगातार बदलाव देखने को मिला। कभी उन्होंने ईरान को “पाषाण युग में भेजने” और “सभ्यता खत्म करने” की धमकी दी, तो कुछ ही घंटों बाद बातचीत और सीजफायर की बात भी की। इस तरह के विरोधाभासी रुख ने ट्रंप की छवि एक अप्रत्याशित नेता के रूप में पेश की।
‘गुड कॉप, बैड कॉप’ जैसी नीति
बता दें कि इस रणनीति को Good cop bad cop diplomacy के रूप में भी देखा जा रहा है। ट्रंप कभी सख्त और आक्रामक रुख अपनाते हैं, तो कभी नरम पड़कर बातचीत की पेशकश करते हैं। इससे विरोधी पक्ष के लिए उनकी अगली चाल का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है, जो मैडमैन थ्योरी का मुख्य उद्देश्य है।
वैश्विक राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
इसे Global geopolitics impact के नजरिए से देखें तो इस तरह की रणनीति अल्पकालिक दबाव बनाने में कारगर हो सकती है, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम खतरनाक भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी भाषा और रणनीति से तनाव बढ़ सकता है और कूटनीतिक संबंधों में अस्थिरता आ सकती है।

















