ताइवान स्ट्रेट में हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के युद्धपोतों की मौजूदगी ने तनाव बढ़ा दिया है। चीन की सेना ने इन जहाजों पर नजर रखी और उन्हें “उकसावे” का आरोप लगाया। यह घटना उस क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जहां चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि कई देश इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं।
क्या हुआ?
6 सितंबर, 2025 को कनाडा का युद्धपोत विल डी क्यूबेक और ऑस्ट्रेलिया का गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर ब्रिस्बेन ताइवान स्ट्रेट से गुजरे। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने इन जहाजों की निगरानी की और चेतावनी जारी की। PLA के प्रवक्ता सीनियर कर्नल शी यी ने कहा कि इन देशों की हरकतें “गलत संदेश” दे रही हैं और क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ा रही हैं। चीन ने अपनी नौसेना और वायुसेना को इन जहाजों पर नजर रखने और “प्रभावी जवाब” देने के लिए तैनात किया।
ताइवान का रुख
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वे स्ट्रेट में हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखते हैं। उन्होंने अपनी वायु और नौसेना को तैनात कर जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित की। ताइवान, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देश इस स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं, जबकि चीन इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता है। ताइवान ने चीन के क्षेत्रीय दावों को खारिज किया है।
इसे भी पढ़ें: कैरिबियन सागर में अमेरिका की नौसेना तैनाती, ड्रग तस्करी पर नकेल
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
अमेरिकी नौसेना और उसके सहयोगी देशों (कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस) के जहाज हर महीने इस स्ट्रेट से गुजरते हैं, इसे आजादी से नेविगेशन का अधिकार मानते हुए। पिछले पांच सालों में चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य दबाव बढ़ाया है, जिसमें युद्धाभ्यास और मिसाइल परीक्षण शामिल हैं।
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की स्थिति
कनाडा ने कहा कि विल डी क्यूबेक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए “ऑपरेशन होराइजन” का हिस्सा है। ऑस्ट्रेलियाई सेना ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। यह घटना हाल ही में चीन के सैन्य परेड के बाद हुई, जिसमें उसने ताइवान और पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पश्चिमी देशों की ओर से चीन को जवाब हो सकता है।

















