अमेरिका ने कैरिबियन सागर में ड्रग तस्करी के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज करने का फैसला किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस बारे में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के स्पीकर माइक जॉनसन और सीनेट के अंतरिम चेयरमैन चक ग्रासली को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने 2 सितंबर, 2025 को हुई सैन्य कार्रवाई और भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों की संभावना के बारे में बताया। यह खबर सीएनएन की पत्रकार अलायना ट्रीन ने शनिवार को सार्वजनिक की।
पत्र में क्या कहा गया?
4 सितंबर को लिखे गए ट्रंप के पत्र में बताया गया कि 2 सितंबर को कैरिबियन सागर में अमेरिकी सेना ने ड्रग तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की। ट्रंप ने लिखा कि अभी यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि ऐसी कार्रवाइयों का दायरा और अवधि कितनी होगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिकी सेना भविष्य में भी ऐसी कार्रवाइयों के लिए तैयार है। इसका मतलब है कि ड्रग तस्करी को रोकने के लिए अमेरिका और सख्त कदम उठा सकता है।
2 सितंबर की कार्रवाई
राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि 2 सितंबर को कैरिबियन सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी सेना ने एक वेनेजुएलाई ड्रग कार्टेल के 11 सदस्यों को मार गिराया। ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला की सरकार ड्रग तस्करी रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही। इस वजह से अमेरिका को खुद हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। यह कार्रवाई ड्रग तस्करी के खिलाफ अमेरिका की बढ़ती सख्ती को दर्शाती है।
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अमेरिकी सेना की तैनाती
रॉयटर्स के मुताबिक, 19 अगस्त को अमेरिकी नौसेना ने तीन डिस्ट्रॉयर जहाज—यूएसएस ग्रेवली, यूएसएस जेसन डनहम और यूएसएस सैम्पसन—को वेनेजुएला के दक्षिणी कैरिबियन तट की ओर भेजा था। इसके अलावा, न्यूक्लियर सबमरीन यूएसएस न्यूपोर्ट न्यूज, मिसाइल क्रूजर यूएसएस लेक एरी, एम्फीबियस जहाज और करीब 4,500 सैनिकों को भी वहां तैनात किया गया। इतनी बड़ी सैन्य तैनाती से साफ है कि अमेरिका इस मिशन को लेकर कितना गंभीर है।
वेनेजुएला और रूस की प्रतिक्रिया
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इस सैन्य कार्रवाई को देश के लिए पिछले 100 सालों में सबसे बड़ा खतरा बताया। उनका कहना है कि यह अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर हमले की धमकी है। दूसरी ओर, रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने भी इस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला पर पश्चिमी देशों का खुला दबाव और तनाव बढ़ाने का यह तरीका पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
















