महाराष्ट्र में ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ लागू हो गया है। इसके तहत जबरन, धोखाधड़ी, लालच या शादी का झांसा देकर कन्वर्जन करवाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कानून में सात साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। बार-बार अपराध करने वाले को 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माना देना होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने और 30 जुलाई को आधिकारिक गैजेट में प्रकाशित होने के बाद ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ राज्य में लागू हो गया है।
क्या हैं नए कानून के प्रावधान
कानून के तहत प्रलोभन, दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, बलपूर्वक या शादी का झांसा देकर कराए गए कन्वर्जन को दंडनीय अपराध बनाया गया है। अगर कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से दूसरा धर्म अपनाना चाहता है, तो उसे कन्वर्जन से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी। इसके साथ ही कन्वर्जन के बाद की तय प्रक्रियाओं का पालन करना भी अनिवार्य किया गया है। पहली बार अपराध करने पर आरोपी को सात साल तक की जेल होगी। दोबारा अपराध करने पर सजा को बढ़ाकर 10 साल तक किया जा सकता है। कन्वर्जन में शामिल संस्थानों पर प्रतिबंध और 5 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है। कानून में पीड़ित व्यक्ति के अलावा उसके माता-पिता, भाई-बहन और दूसरे रिश्तेदारों को भी शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया गया है।
विपक्ष ने किया विरोध कहा- कानून गैर-संवैधानिक
देवेंद्र फडणवीस सरकार ने विधानमंडल के बजट सत्र 2026-27 में ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक, 2026’ पारित किया था। कांग्रेस, एनसीपी शरद पवार गुट, समाजवादी पार्टी और CPI (M) ने इस विधेयक विरोध किया था, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने समर्थन किया था। विधानसभा में बहस के दौरान कांग्रेस के विधायकों ने दावा किया था कि यह कानून गैर-संवैधानिक है और नागरिकों के निजता के अधिकार पर असर डालने वाला है। समाजवादी पार्टी ने कहा कि यह कानून एक खास समुदाय को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया है कि कानून का मुख्य ध्येय जबरदस्ती, धोखाधड़ी या लालच देकर किए गए कन्वर्जन को रोकना है। अपनी इच्छा से धर्म बदलने या दूसरे धर्म में शादी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। धर्मांतरण विरोधी कानून राज्य में लागू होने पर महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने कहा कि इस कानून से संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को कोई ठेस नहीं पहुंचती है और न ही किसी धर्म को विशेष रूप से टारगेट किया गया है।
कानून लागू करने वाला महाराष्ट्र 12वां राज्य बना
महाराष्ट्र कन्वर्जन विरोधी कानून लागू करने वाला देश का 12वां राज्य बन गया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश में यह कानून पहले से लागू है।
नए कानून से अपराधियों के हौसले पस्त होंगे
बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज कंपनी में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और जबरन कन्वर्जन का मामला पिछले कई महीनों से सुर्खियों में रहा है। लेकिन इस मामले में मुख्य आरोपी निदा खान के बाद अब रजा मेमन, आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और तौसिफ अतार को जमानत दे दी गई है। इन पर कंपनी के बीपीओ में काम करने वाली कई हिंदू महिलाओं का जबरन कन्वर्जन कराने, उन्हें लव जिहाद के जाल में फंसाने और उनकी धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप लगे थे। निदा पर यह भी आरोप है कि उसने ब्रेनवॉश के लिए 171 इस्लामिक लिंक्स पीड़िता को भेजे थे। ऐसे में यह कानून जबरन कन्वर्जन कराने वालों पर नकेल कसेगा और इससे अपराधियों के हौसले पस्त होंगे।
















