राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया, युवाओं को सशक्त बनाने पर दिया जोर
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया, युवाओं को सशक्त बनाने पर दिया जोर

राष्ट्रपति ने ओडिशा को ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्मिकता और सेवा की समृद्ध परंपरा वाली भूमि बताया

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद
Aug 3, 2026, 11:20 pm IST
inओडिशा
कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपटि, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी , स्वामी मुकुंदानंद।

कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपटि, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी , स्वामी मुकुंदानंद।

भुवनेश्वर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु  ने सोमवार को ओडिशा के कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र निर्माण में मूल्य आधारित शिक्षा और युवाओं के सशक्तिकरण के महत्व को रेखांकित किया। समारोह में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपटि, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी , स्वामी मुकुंदानंद, मंत्रियों, शिक्षाविदों तथा अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख

संबोधन में राष्ट्रपति ने ओडिशा को ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्मिकता और सेवा की समृद्ध परंपरा वाली भूमि बताया। उन्होंने कहा कि महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की यह पवित्र भूमि सदियों से समावेशिता, करुणा और मानव कल्याण का संदेश देती आई है।

उन्होंने कटक के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र ‘उत्कल गौरव’ मधुसूदन दास, ‘कर्मवीर’ गौरीशंकर राय, सुभाष चंद्र बोस  और बीजू पटनायक जैसे महान व्यक्तित्वों की जन्मभूमि रहा है। साथ ही यह ‘उत्कलमणि’ पंडित गोपबंधु दास और ‘उत्कल केसरी’ डॉ. हरेकृष्ण महताब की कर्मभूमि भी रहा है। उन्होंने कहा कि जनसेवा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्रों में कटक का योगदान अत्यंत प्रेरणादायक रहा है।

परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय, इस गौरवशाली क्षेत्र में स्थापित होकर, भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ते हुए समाज और राष्ट्र की सेवा का एक सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक संतुलित और समग्र शिक्षण वातावरण प्रदान करेगा।

युवा सशक्तिकरण और मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और युवा हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां युवा अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सकें और अपने सपनों व आकांक्षाओं को साकार कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को मूल्य आधारित शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे नागरिक तैयार करें जो सत्यनिष्ठा, अनुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित हों। उन्होंने कहा कि युवाओं का ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब वह मानवता की सेवा, समाज के कल्याण और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे।

‘विकसित भारत’ के निर्माण में विश्वविद्यालयों की भूमिका

राष्ट्रपति ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान इस उद्देश्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे ऐसे ज्ञान केंद्र बनें, जहां विकसित विचार और तकनीकें समाज की आवश्यकताओं को पूरा करें।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक ज्ञान को अपनाते हुए छात्रों को नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देगा, साथ ही छात्रों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास पर भी ध्यान देगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह विश्वविद्यालय कुशल मानव संसाधन, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को तैयार करेगा, जो ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों को साकार करने में योगदान देंगे।

राज्यपाल ने बताया ऐतिहासिक मील का पत्थर

इस अवसर पर ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपटि  ने कहा कि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय की स्थापना राज्य के शैक्षणिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ नवाचार और नेतृत्व क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने समग्र शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय अकादमिक उत्कृष्टता और नैतिक मूल्यों का समन्वय करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्थान एक कुशल, जिम्मेदार और भविष्य के लिए तैयार पीढ़ी का निर्माण करेगा, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकेगी।

मुख्यमंत्री ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहल ओडिशा को शिक्षा, अनुसंधान और नैतिक शिक्षण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राष्ट्रपति का राज्य के 4.5 करोड़ लोगों की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति ने राज्यवासियों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है।

उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय मूल्यों पर आधारित एक दूरदर्शी पहल है, जो आधुनिक ज्ञान प्रणाली के साथ संतुलन स्थापित करेगी।

नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक दायित्व पर फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, कंप्यूटर विज्ञान, प्रबंधन और स्वास्थ्य विज्ञान जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे। साथ ही मानव मूल्यों, योग और मानसिक संतुलन को बढ़ावा देने के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

उन्होंने सामाजिक दायित्व के तहत स्वास्थ्य सेवाएं, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, तथा ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों की भी जानकारी दी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और औद्योगिक विकास के साथ तालमेल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कौशल विकास, नवाचार और युवा सशक्तिकरण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुणवत्ता युक्त शिक्षा पर दिए गए जोर का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नीतियां बना रही है, जिससे भविष्य के लिए सक्षम कार्यबल तैयार किया जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा में किंडरगार्टन से पोस्ट ग्रेजुएशन तक शिक्षा को निःशुल्क किया गया है और आईटी, सेमीकंडक्टर, परिधान और पेट्रोकेमिकल जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है।

‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ की दिशा में कदम

सभी गणमान्य व्यक्तियों ने विश्वास व्यक्त किया कि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। यह संस्थान एक कुशल, मूल्य आधारित और जिम्मेदार पीढ़ी का निर्माण करेगा, जो ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

Topics: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मूकटकजगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय
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