बड़ी खबर: ट्रंप देने जा रहे इस्तीफा! टैरिफ विवाद के बीच मंत्री बेसेंट ने कहा, रूसी तेल खरीदना भारत के राष्ट्रीय हित में
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बड़ी खबर: ट्रंप देने जा रहे इस्तीफा! टैरिफ विवाद के बीच मंत्री बेसेंट ने कहा, रूसी तेल खरीदना भारत के राष्ट्रीय हित में

अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा है कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और वह अपने राष्ट्रीय हित को देखते हुए व्यापार में साथी चुनने को स्वतंत्र है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और अमेरिका जल्दी ही अपने मतभेदों को सुलझा लेंगे

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 3, 2025, 12:20 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेता है और किसी भी देश से तेल खरीदने का अधिकार रखता है

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेता है और किसी भी देश से तेल खरीदने का अधिकार रखता है

अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में इस वक्त स्थितियों में तेजी से उतार—चढ़ाव होता देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ दांव के चीन में संपन्न एससीओ बैठक में करारी हार के बाद वाशिंगटन में बेचैनी बढ़ रही है। ट्रंप की भारत को दबाव में लेकर घेरने की नीति अब उनके गले की फांस बन चुकी है। न सिर्फ उनके अपने मंत्रालय के साथियों ने, बल्कि रिपब्लिकन सांसद, नीतिकार और अदालतों तक ने ट्रंप के टैरिफों को अनुचित ठहराया है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने तो खुलकर कहा है कि भारत को अपने राष्ट्रीय हित को देखते हुए पूरा अधिकार है कि जिससे चाहे व्यापार करे। चीन के तिआनजिन में एससीओ बैठक में भारत, रूस और चीन की बढ़ी निकटता ने अमेरिकी रणनीतिकारों और विशेषकर ट्रंप की पेशानी पर बल डाले हुए हैं। वहां से आ रहे संकेत बताते हैं कि संभव है ट्रंप कहीं जल्दी ही पद से इस्तीफा न दे दें। राजनीतिक गलियारों में दबी जबान में ‘ट्रंप के बाद कौन?’ को लेकर चर्चाएं चल निकली हैं।

वाशिंगटन से आ रही खबरों को देखें तो बेशक, राष्ट्रपति ट्रंप के इस्तीफे की अटकलों से पश्चिम जगत में भी बहस छिड़ गई है। क्योंकि अगर ऐसा होता है तो यह अमेरिका की विदेश नीति, खासकर भारत के साथ संबंधों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। ट्रंप प्रशासन ने पिछले कुछ समय से भारत पर कई व्यापारिक दबाव बनाए हैं, जिनमें टैरिफ बढ़ाना और रूस से तेल खरीद पर आलोचना शामिल है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर तीखी टिप्पणी की ही है। उन्होंने कहा कि भारत रूसी तेल खरीदकर उसे शुद्ध करके आगे बेच रहा है। लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और वह अपने राष्ट्रीय हित को देखते हुए व्यापार में साथी चुनने को स्वतंत्र है, लेकिन उसके मूल्य अमेरिका के करीब हैं। बेसेंट ने उम्मीद जताई कि भारत और अमेरिका जल्दी ही अपने मतभेदों को सुलझा लेंगे। बेसेंट ने इस मौके पर भारत की ही बात की, लेकिन चीन द्वारा रूस से दोगुना तेल खरीद पर चुप्पी साध ली।

“यूक्रेन में संघर्ष पुतिन का युद्ध है, ‘मोदी का युद्ध’ नहीं है। जो कोई भी यह सोचता है कि टैरिफ का दबाव नई दिल्ली पर हमारी धमक बढ़ा देगा, वह भ्रम में जी रहा है। इस वक्त तो यह सब तहस-नहस कर देने जैसा है।
                                                                  —इवान फेगेनबाम, पूर्व अधिकारी, अमेरिकी विदेश विभाग

“अमेरिका द्वारा भारत को अपने से अलग जाने देना एक गंभीर भूल है। भारत के लिए यह क्षण एक बड़ा अवसर है, एक महाशक्ति होने के उसके दावे की एक निर्णायक परीक्षा की घड़ी है।” —द इकोनॉमिस्ट

“भारत अब अपने निर्यात अमेरिका को नहीं, बल्कि ब्रिक्स के देशों को बेचेगा। ट्रंप हॉटहाउस शैली में जो कर रहे हैं, उससे ब्रिक्स पश्चिम से एक और बड़े, अधिक एकजुट और सफल आर्थिक विकल्प के रूप में विकसित होगा।”
                                                                           —रिचर्ड वोल्फ, अमेरिका के एक वामपंथी अर्थशास्त्री

27 अगस्त 2025 से ट्रंप प्रशासन ने भारत से 86.5 अरब डॉलर के निर्यात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। इसमें रूसी तेल पर 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल है। यह कदम भारत की रूस से तेल खरीद के जवाब में उठाया गया था। भारत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे अनुचित बताया और किसी दबाव में आए बिना कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जो जरूरी होगा वह करेगा। भारत ने रूस से तेल खरीदकर लगभग 26 लाख करोड़ रुपए की बचत की है, जिससे महंगाई दर 10–12 प्रतिशत से घटकर 4–5 प्रतिशत तक आ गई है।

भारत और अमेरिका के बीच गत दिनों 2+2 व्यापार वार्ता हुई थी जिसमें व्यापार, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का अब कहना है कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है और नवंबर तक इसका समाधान होने की उम्मीद है।

भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, उनकी चिंता मुख्यतः यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद से जुड़ी है। लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेता है और किसी भी देश से तेल खरीदने का अधिकार रखता है। भारत की नीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित है, जिसमें वह वैश्विक दबावों को नकारकर अपने हितों को प्राथमिकता देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसी अटकलें चल रही हैं उनके अनुसार अगर ट्रंप इस्तीफा देते हैं ​तो इससे भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा मिल सकती है। अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका भारत पर दबाव तो बना रहा है, लेकिन उन्होंने जल्दी ही समाधान होने की उम्मीद भी जताई है। टैरिफ विवाद ने भारत—अमेरिका व्यापारिक संबंधों को प्रभावित तो किया है, लेकिन द्विपक्षीय वार्ताएं जारी हैं।

भारत और अमेरिका के संबंधों में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम में यह स्पष्ट है कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप के नीतिकार और प्रबुद्धजन खुद कह रहे हैं कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत से दूरी बनाना अमेरिका के हित में नहीं है। अमेरिका के बड़े मीडिया समूह भी मान रहे हैं कि ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को गहराने के गत 25 वर्ष के प्रयासों को पलीता लगा दिया है। अपने कैबिनेट, सांसदों और विशेषज्ञों से इस प्रकार की प्रतिक्रियाएं देखकर अगर ट्रंप इस्तीफा दे दें तो इसमें आश्चर्य नहीं होगा।

इस सबके बीच भारत अपनी नीति पर अडिग रहते हुए आगे बढ़ा है और वैश्विक मंच पर संतुलन बैठाते हुए नए राजनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों पर गंभीरता से काम में जुट गया है। भारत की मोदी सरकार सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के साथ आम जन के स्तर पर प्रगाढ़ संबंध बनाने की पक्षधर रही है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुआई में उस दिशा में बढ़ा भी जा रहा है। चीन में संपन्न हुई एससीओ बैठक तो उसकी एक झलक भर थी।

Topics: मोदीटैरिफभारतamerica tariif warचीनअमेरिकाModirussiaIndiaputinChinatrumpएससीओSCO summit
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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