2014 के बाद भारत में कैसे बदली रोजगार की तस्वीर? पढ़ें चौंकाने वाले आंकड़े
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होम भारत

2014 के बाद भारत में कैसे बदली रोजगार की तस्वीर? पढ़ें चौंकाने वाले आंकड़े

करोड़ों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना शुरू से ही हर सरकार के लिए एक कठिन कार्य रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में केंद्र की योजनाओं और औद्योगिक नीतियों ने इस कठिनाई को अवसर में बदल दिया है।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी — edited by Mahak Singh
Sep 1, 2025, 10:53 am IST
in भारत
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में नई सरकार बनी, तब से लेकर 2025 तक देश का जनसंख्या घनत्व लगातार बढ़ता ही गया है। अधिक जनसंख्या का सीधा मतलब है अधिक मानव संसाधन और ऐसे में हर हाथ को काम देना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। करोड़ों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना शुरू से ही हर सरकार के लिए एक कठिन कार्य रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में केंद्र की योजनाओं और औद्योगिक नीतियों ने इस कठिनाई को अवसर में बदल दिया है।

यही कारण है कि देश न केवल “विकसित भारत” के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है, बल्कि उद्योगों के माध्यम से पर्याप्त रोजगार भी सृजित कर रहा है। आज इन नौकरियों से देश के करोड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। इस दिशा में हाल ही में जारी वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई) 2023-24 के आंकड़े सरकार के इस दावे को मजबूत करते नजर आते हैं।

सर्वेक्षण का महत्व

दरअसल, वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण महज आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा दर्पण है जिसमें भारत की औद्योगिक तस्वीर साफ दिखाई देती है। इसका उद्देश्य उत्पादन, मूल्य संवर्धन, रोजगार, पूंजी निर्माण और उद्योगों की संरचना में हो रहे परिवर्तनों को दर्ज करना है। इस बार फील्ड वर्क अक्टूबर 2024 और जून 2025 के बीच हुआ। रिपोर्ट राज्य और प्रमुख उद्योग स्तर पर तैयार की गई है और राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करती है।

औद्योगिक विकास की रफ्तार

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए ASI रिपोर्ट जारी की है। इसमें साफ दिखता है कि भारतीय उद्योग अब वैश्विक सुस्ती को पीछे छोड़ कर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में पिछले वर्ष की तुलना में 11.89 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यानी कंपनियां न केवल उत्पादन कर रही हैं बल्कि अपने उत्पादों में वैल्यू एडिशन भी तेजी से बढ़ा रही हैं। इतना ही नहीं, औद्योगिक उत्पादन में भी 5.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो दर्शाता है कि देश के विनिर्माण क्षेत्र ने गति पकड़ी है।

रोजगार सृजन की मजबूत तस्वीर

भारत जैसे विशाल देश के लिए रोजगार सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह एएसआई रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 में औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार में 5.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में करीब 1.8 करोड़ लोग उद्योगों से जुड़े थे, जबकि अब यह आंकड़ा 1.9 करोड़ से भी अधिक हो गया है। इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ एक वर्ष में ही लाखों लोगों को नए अवसर मिले।

पिछले एक दशक की तस्वीर और भी उत्साहजनक है। 2014-15 से लेकर 2023-24 तक, यानी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल से अब तक, औद्योगिक क्षेत्र में करीब 57 लाख नई नौकरियां जुड़ी हैं। दरअसल,यह उपलब्धि साधारण नहीं है। जिस दौर में दुनिया के कई देशों में बेरोजगारी बड़ी चुनौती बनी हुई है, भारत ने उद्योगों को मज़बूत कर रोजगार का एक नया परिदृश्य तैयार किया है।

पूंजी निवेश का उछाल

एएसआई रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि उद्योगों में निवेश का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। 2023-24 में कुल कैपिटल इन्वेस्टमेंट 68 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2022-23 के 61 लाख करोड़ रुपये से कहीं अधिक है। यह वृद्धि बताती है कि उद्योगपति और कंपनियां न केवल भारत को भविष्य का बाज़ार मान रहे हैं बल्कि यहां अपनी पूंजी सुरक्षित और लाभकारी भी मानते हैं। इस निवेश से तकनीकी विकास, नई फैक्ट्रियों की स्थापना और आधुनिक उपकरणों की खरीद संभव हुई है। परिणामस्वरूप, आने वाले समय में और अधिक रोजगार सृजित होंगे।

ये सेक्टर बने रोजगार के स्तंभ!

इस रिपोर्ट की मानें तो यह साफ तौर पर सामने आया है कि रोजगार देने के मामले में कुछ सेक्टरों ने बहुत अच्‍छा कार्य किया है और सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार दिया। जिसमें कि फूड प्रोडक्ट्स इंडस्ट्री में करीब 21.67 लाख लोग काम कर रहे हैं। यह कुल रोजगार में 11.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। साथ ही देश भर में सबसे ज्यादा यानी 16 प्रतिशत कारखाने इसी सेक्टर में संचालित हैं।

इसी तरह से टेक्सटाइल इंडस्ट्री में लगभग 17.14 लाख लोगों को रोजगार मिला है। 8.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ यह दूसरा सबसे बड़ा रोजगारदाता बना। इसके बाद नंबर आता है, बेसिक मेटल इंडस्ट्री का। आंकड़े बता रहे हैं कि देश में 15.23 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं और यह 7.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है।

ऑटोमोबाइल और ट्रेलर मैन्युफैक्चरिंग और गारमेंट इंडस्ट्री में भी लाखों लोगों को नए रोजगार प्राप्‍त हुए हैं। ऑटोमोबाइल-ट्रेलर मैन्युफैक्चरिंग में करीब 13.74 लाख लोगों को नौकरी मिली है। वहीं, गारमेंट इंडस्ट्री में 13.39 लाख लोगों को रोजगार मिला है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पारंपरिक उद्योगों जैसे खाद्य और वस्त्र से लेकर आधुनिक क्षेत्रों जैसे ऑटोमोबाइल तक, हर सेक्टर ने रोजगार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

ये राज्‍य रहे सबसे आगे और बने रोजगार के हब

रोजगार सृजन में राज्यों की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक रोजगार के मामले में शीर्ष पांच राज्य हैं। यहां सीधे तौर पर तमिलनाडु की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है, गुजरात और महाराष्ट्र दोनों की 13-13 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश 8 प्रतिशत और कर्नाटक 6 प्रतिशत की दर से रोजगार देने में देश में सबसे आगे रहे हैं। इनके अलावा शेष अन्य राज्य मिलकर 45 प्रतिशत रोजगार का हिस्सा रखते हैं। यह तस्वीर बताती है कि दक्षिण और पश्चिम भारत औद्योगिक विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। खासकर तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्य विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनकर उभरे हैं।

जीवीए में शीर्ष उद्योग यह हैं

सकल मूल्य वर्धन की दृष्टि से शीर्ष पांच उद्योग हैं; मूल धातु, मोटर वाहन, रसायन और रासायनिक उत्पाद, खाद्य उत्पाद और दवा उत्पाद। ये उद्योग न केवल रोजगार दे रहे हैं बल्कि भारत की निर्यात क्षमता को भी मजबूत बना रहे हैं। फार्मा सेक्टर ने कोविड के बाद से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, जबकि ऑटोमोबाइल सेक्टर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की वजह से नई उड़ान भर रहा है।
भारत अब एक औद्योगिक महाशक्ति बनने की दिशा में कदमताल कर रहा

यहां ये एएसआई 2023-24 यह बताता है कि भारत ने बीते दशक में औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है। बढ़ती जनसंख्या के बीच रोजगार सृजन की चुनौती को अवसर में बदलना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। रोजगार में 5.9 प्रतिशत की वृद्धि, निवेश में नई ऊँचाई और उत्पादन में तेजी यह दिखाते हैं कि भारत अब एक औद्योगिक महाशक्ति बनने की दिशा में कदमताल कर रहा है।

वर्ष 2014 के बाद से लेकर अब तक देश ने जिस गति से रोजगार और उद्योग को बढ़ावा दिया है, वह आने वाले वर्षों में “विकसित भारत” के लक्ष्य को और मजबूत करेगा। औद्योगिक उत्पादन, रोजगार और निवेश की यह त्रिमूर्ति भारत की आर्थिक यात्रा को नई दिशा देती है और यह साबित करती है कि चुनौतियों के बीच भी भारत अवसर गढ़ना जानता है।

Topics: Industrial development Indiaemployment generation Indiaemployment achievementDeveloped India 2047 targetfood product industry employmentPM ModiModi government
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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