अहमदाबाद में आयोजित ‘साबरमती संवाद 2026’ में भारत की आर्थिक प्रगति, वैश्विक भूमिका और गुजरात के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी क्रम में गुजरात मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार एवं GMDC के अध्यक्ष डॉ. हसमुख अधिया जी ने वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा जी से विशेष बातचीत की। उन्होंने ब्रिक्स में भारत की भूमिका, गुजरात की आर्थिक उपलब्धियों, डबल इंजन सरकार और 2047 तक विकसित गुजरात के लक्ष्य पर अपनी बात रखी।
प्रश्न: ब्रिक्स में भारत की भूमिका और देश की आर्थिक रेजिलिएंस को आप किस तरह देखते हैं?
उत्तर: कल ब्रिक्स की बैठक में जिस तरह अंतिम घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, वह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आमतौर पर ऐसे बहुपक्षीय सम्मेलनों में अंतिम घोषणा-पत्र को लेकर आखिरी समय तक बातचीत और मतभेद चलते रहते हैं। कई बार किसी एक शब्द या मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाती। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को घोषणा-पत्र को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। यह भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है।आज पूरी दुनिया कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। अलग-अलग हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और कई देश अपने-अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यहां तक कि कई विकसित देश भी संरक्षणवादी नीतियों की ओर बढ़ रहे हैं।
ऐसे माहौल में ब्रिक्स जैसे विकासशील देशों के समूह को आगे बढ़ाना और विकासशील देशों का दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखना बेहद महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स में शामिल देशों की संख्या भले ही सीमित हो, लेकिन ये देश विश्व की लगभग 40 प्रतिशत जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए यह कोई छोटा समूह नहीं है। ब्रिक्स के माध्यम से विकासशील देशों के हितों की रक्षा करना, आपसी सहयोग बढ़ाना और व्यापार तथा आर्थिक अवसरों को मजबूत करना भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न: ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ते सहयोग का गुजरात जैसे औद्योगिक राज्य को किस तरह लाभ मिल सकता है?
उत्तर: ब्रिक्स देशों के बीच जिस तरह आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बढ़ रहा है, उसका निश्चित रूप से राज्यों को भी लाभ मिलेगा और गुजरात इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गुजरात मूल रूप से एक मैन्युफैक्चरिंग स्टेट है। राज्य की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 36 प्रतिशत है। वहीं, देश में होने वाले कुल मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में गुजरात की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है। ऐसे में जब ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निर्यात के अवसर बढ़ेंगे, नई तकनीक आएगी और निवेश बढ़ेगा, तो गुजरात को इसका सीधा फायदा मिलने की पूरी संभावना है। अगर सेमीकंडक्टर, इनोवेशन, नई तकनीक और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ता है, तो गुजरात उसके लिए पूरी तरह तैयार रहने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रश्न: गुजरात को देश के ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जाता है। इसकी वर्तमान आर्थिक स्थिति और भविष्य की क्षमता को आप किस तरह देखते हैं?
उत्तर: गुजरात की स्थिति को समझने के लिए कुछ आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। देश की कुल आबादी में गुजरात की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत है और क्षेत्रफल के लिहाज से गुजरात करीब 6 प्रतिशत है। लेकिन देश की कुल जीडीपी में गुजरात का योगदान लगभग 8.3 प्रतिशत है। इस लिहाज से गुजरात को भारत का एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन कहा जा सकता है। गुजरात के लिए यह सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। वर्ष 2001 से 2014 तक उन्होंने गुजरात का नेतृत्व किया और उस दौरान जो विकास की गति बनी, उसका लाभ आज भी राज्य को मिल रहा है। अगर हम आर्थिक आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2001 में गुजरात की जीडीपी एक अलग स्तर पर थी, जबकि 2025-26 में राज्य की जीडीपी लगभग 29 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। यानी पिछले करीब 25 वर्षों में गुजरात की जीडीपी लगभग 20 गुना बढ़ी है।
यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है। आज जब हम विकसित भारत और विकसित गुजरात की बात कर रहे हैं, तो हमारा लक्ष्य बहुत स्पष्ट है। अगर गुजरात को 2047 तक विकसित राज्य बनाना है तो हमें लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनानी होगी। वर्तमान में गुजरात की अर्थव्यवस्था लगभग 350 बिलियन डॉलर के आसपास है। यानी हमें इसे लगभग 10 गुना बढ़ाना होगा। अगर हम पिछले 25 वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था को 20 गुना बढ़ा सकते हैं, तो आने वाले 20 वर्षों में इसे 10 गुना बढ़ाना निश्चित रूप से संभव है। मुझे पूरा विश्वास है कि गुजरात इस लक्ष्य को हासिल करेगा और एक विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
प्रश्न: गुजरात मॉडल की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होती रही है। ऐसे में डबल इंजन सरकार की अवधारणा को आप एक अर्थशास्त्री के तौर पर किस तरह देखते हैं?
उत्तर: निश्चित रूप से डबल इंजन सरकार का फायदा होता है। किसी भी देश या राज्य की प्रगति के लिए शासन की स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण होती है। अगर केंद्र और राज्य में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकार हो तो कई बार नीतियों और योजनाओं को लेकर मतभेद सामने आते हैं। केंद्र की योजनाओं को राज्य सरकार लागू नहीं करती या योजना के नाम और स्वरूप को लेकर विवाद हो जाता है। इसका नुकसान अंततः आम जनता को होता है। आपने हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल का उदाहरण भी देखा होगा, जहां कुछ केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर विवाद रहा है। ऐसी परिस्थितियों में राज्य की जनता उन योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकती है। गुजरात सौभाग्यशाली रहा है कि यहां लंबे समय से केंद्र और राज्य में एक ही राजनीतिक दल की सरकार रही है। इससे नीतियों में निरंतरता बनी रहती है, योजनाओं को लागू करने में समन्वय रहता है और विकास की गति को बनाए रखने में मदद मिलती है। इसलिए डबल इंजन सरकार का सबसे बड़ा लाभ नीति, प्रशासन और विकास के स्तर पर बेहतर समन्वय है।
प्रश्न: गुजरात में अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत जैसे क्षेत्र तेजी से विकसित हुए हैं, लेकिन बनासकांठा, कच्छ और अन्य क्षेत्रों के विकास को लेकर भी सवाल उठते हैं। अगले 20 वर्षों के लिए क्षेत्रीय विकास की क्या रणनीति है?
उत्तर: पूरे प्रदेश के संतुलित विकास के लिए सबसे पहली आवश्यकता है कि राज्य का हर क्षेत्र अच्छी तरह से कनेक्टेड हो। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी काम किया गया है। आज गुजरात के किसी भी हिस्से में जाएं, सड़कों की स्थिति काफी बेहतर है। यहां तक कि सीमावर्ती क्षेत्रों तक भी अच्छी सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध है। दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र है- पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर। गुजरात की भौगोलिक स्थिति और लंबे समुद्री तट का राज्य को बड़ा फायदा मिलता है।
जहां तक कच्छ की बात है, तो वर्ष 2001 के भूकंप के बाद का कच्छ और आज का कच्छ पूरी तरह अलग है। आज कच्छ में बड़े-बड़े उद्योग स्थापित हो चुके हैं और जिला स्तर पर भी कच्छ का आर्थिक योगदान काफी बढ़ा है। कच्छ से गुजरात की कुल जीडीपी में लगभग 5 से 6 प्रतिशत का योगदान आता है। वहां बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित हुई हैं। उदाहरण के तौर पर वेल्सपन जैसी कंपनियां कच्छ में अत्याधुनिक उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। यह दिखाता है कि कच्छ अब विकास की मुख्यधारा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
प्रश्न: क्षेत्रीय असमानता को कम करने और छोटे शहरों तथा जिलों में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार की क्या रणनीति है?
उत्तर: क्षेत्रीय विकास के लिए हमारी रणनीति केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गुजरात में हर दो वर्ष में वाइब्रेंट गुजरात समिट का आयोजन किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यह विचार सामने आया कि केवल राज्य स्तर पर एक बड़ी समिट करने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में भी इस तरह के आयोजन किए जाने चाहिए। इस बार पांच क्षेत्रीय वाइब्रेंट गुजरात समिट आयोजित की गईं। वडोदरा, राजकोट, मेहसाणा, सूरत सहित अलग-अलग क्षेत्रों में उद्यमियों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को नई संभावनाओं और निवेश के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसका उद्देश्य यह है कि विकास केवल अहमदाबाद और गांधीनगर तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में नए उद्योग, स्टार्टअप और रोजगार के अवसर पैदा हों। क्षेत्रीय स्तर पर उद्यमियों को अवसर और जानकारी मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
प्रश्न: शिक्षा के क्षेत्र में भी क्या क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है?
उत्तर: शिक्षा के क्षेत्र में भी हमारा प्रयास है कि विकास केवल अहमदाबाद और गांधीनगर केंद्रित न हो। जहां भी नई यूनिवर्सिटी या उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित करने की योजना बनती है, वहां क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखा जाता है। उदाहरण के तौर पर गुजरात को मिली सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए वडोदरा को चुना गया है। इसी तरह ट्रिपल आईटी जैसे संस्थानों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित करने का प्रयास किया गया है। जब उच्च शिक्षा के संस्थान अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों में पहुंचेंगे, तो वहां केवल शिक्षा का विकास नहीं होगा, बल्कि उसके साथ रोजगार, उद्योग, स्टार्टअप और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इसलिए आने वाले वर्षों में गुजरात की रणनीति स्पष्ट है- विकास को बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय पूरे राज्य में फैलाना और हर क्षेत्र को आर्थिक तथा शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाना।















