ब्रिटेन का नौवां सबसे अमीर व्यक्ति देश छोड़ दुबई शिफ्ट हुआ, कहा- 'ब्रिटेन हो गया बर्बाद'
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ब्रिटेन का नौवां सबसे अमीर व्यक्ति देश छोड़ दुबई शिफ्ट हुआ, कहा- ‘ब्रिटेन हो गया बर्बाद’

ब्रिटेन की लेबर सरकार की कर नीतियों के कारण अरबपति जॉन फ्रेडरिक्सन सहित कई करोड़पति देश छोड़ रहे हैं। जानें कैसे नॉन-डोम स्टेटस और विरासत कर ने बदला ब्रिटेन का परिदृश्य।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Jul 24, 2025, 02:46 pm IST
inविश्व
John Fredrcson left UK

जॉन फ्रेडरिक्सन

पिछले दिनों ब्रिटेन की मीडिया के हवाले से पांञ्चजन्य ने यह बताया था कि कैसे वहाँ से धीरे-धीरे करके अमीर लोग अपना बोरिया बिस्तर पैक करके दूसरे देशों में जा रहे हैं। इसी क्रम में अब ब्रिटेन के नौवें सबसे अमीर व्यक्ति जॉन फ्रेडरिक्सन ने भी यह कहते हुए ब्रिटेन को टाटा बाय बाय बोल दिया है कि ब्रिटेन बर्बाद हो चुका है। जॉन मूलतः नॉर्वे के हैं और वे वहाँ के सबसे अमीर व्यक्ति माने जाते हैं, जो लंदन में रह रहे थे और अब वे दुबई जा रहे हैं।

17.3 बिलियन डॉलर्स के मालिक हैं जॉन

वे भी अब उन लोगों में शामिल हो गए हैं, जो लेबर सरकार की कर नीति के शिकार हुए हैं। वे शिपिंग व्यापार में हैं और फोर्ब्स के अनुसार उनकी संपत्ति 17.3 बिलियन डॉलर्स है। चेल्सी में उनकी 30,000 वर्ग फुट की संपत्ति, द ओल्ड रेक्टरी, जिसकी अनुमानित कीमत 2,800 करोड़ है, ब्रिटेन के सबसे महंगे निजी घरों में से एक है, जिसमें 10 बेडरूम, एक बॉलरूम और दो एकड़ का हरा-भरा बगीचा है, जो कथित तौर पर लंदन का तीसरा सबसे बड़ा निजी बगीचा है।

उन्होंने उस संपत्ति को भी बेचने के लिए लगा दिया है और टेलीग्राफ के अनुसार, ब्रिटेन के नौवें सबसे अमीर व्यक्ति जॉन ने 2001 में यह संपत्ति लगभग 40 मिलियन पाउंड में खरीदी थी। उन्होंने पिछले महीने ही यह कहा था कि मिस रीव्स की कर छापेमारी ने उन्हें यूके छोड़ने और यूएई में जाने के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा, “पूरा पश्चिमी जगत पतन की ओर अग्रसर है, जबकि ब्रिटेन मुझे नॉर्वे की याद दिलाता जा रहा है। ब्रिटेन भी नॉर्वे की तरह नरक में जा चुका है।”

विरासत कर

दरअसल, पिछले वर्ष ब्रिटेन में नॉन-डोम स्टेटस को हटा दिया गया था और इसके साथ ही विरासत कर कानूनों को सख्त कर दिया था। नॉन-डोम नियम विदेशियों को यह अनुमति देते थे कि वे केवल यूके में ही अपनी संपत्ति पर सरकार को कर दें, और विदेशों में उनकी संपत्ति पर कर नहीं लगता था। मगर जब ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति ने यह स्टेटस हासिल कर लिया था, तो इसे लेकर काफी हंगामा हुआ था और यह मांग उठाई गई थी कि विदेशियों के लिए यह स्थिति न हो।

इस साल ब्रिटेन में 16,500 करोड़पति कम हुए

लेबर ने इस मुद्दे को उठाया था और सरकार बनने के बाद इसे समाप्त कर दिया था। इसको समाप्त करने के बाद ब्रिटेन से ऐसे लोगों ने हाथ खींचने आरंभ कर दिए जो वहाँ पर व्यापार कर रहे थे। ब्रिटेन में ग्लोबल अमीरों पर अधिक शिकंजा कसा है। हेनली एंड पार्टनर्स के हवाले से टेलीग्राफ ने बताया कि इन बदलावों के कारण इस साल ब्रिटेन में 16,500 करोड़पति कम हो जाएँगे, जबकि पिछले साल यह संख्या 10,800 थी।

जो लोग ब्रिटेन छोड़ चुके हैं या छोड़ने वाले हैं, उनमें लंदन के सबसे प्रसिद्ध बैंकरों में से एक रिचर्ड ग्नोडे, जो जनवरी में गोल्डमैन के उपाध्यक्ष बने थे, के साथ-साथ स्टील उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल और प्रॉपर्टी टाइकून भाई इयान और रिचर्ड लिविंगस्टोन भी शामिल हैं।

ब्रिटेन की लेबर सरकार की हो रही आलोचना

इस कदम के कारण सोशल मीडिया पर भी ब्रिटेन की लेबर सरकार की काफी आलोचना हो रही है। Jim Ferguson ने एक्स पर लिखा कि अरबपति शिपिंग टाइकून जॉन फ्रेडरिक्सन की संपत्ति 14 अरब पाउंड से ज़्यादा है। उन्होंने हाल ही में अपना लंदन मुख्यालय बंद किया और यूएई भाग गए। अरबपति शिपिंग टाइकून जॉन फ्रेडरिक्सन की संपत्ति 14 अरब पाउंड से ज़्यादा है। उन्होंने हाल ही में अपना लंदन मुख्यालय बंद किया और यूएई भाग गए। इसका कारण टैक्स की अराजकता। सांस्कृतिक पतन। राजनीतिक विश्वासघात। उनका कहना है कि नॉर्वे भी बेहतर दिखता है- और उन्हें नॉर्वे से नफ़रत है।

81 वर्षीय जॉन ने अपने घर के लगभग एक दर्जन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है और वे प्रॉपर्टी का मूल्यांकन करवा रहे हैं और जो उनके देश छोड़कर जाने की पुष्टि है। उन्होंने नॉर्वे के ई24 से बात करते हुए कहा कि पूरा पश्चिमी जगत गर्त में जा रहा है।

करोड़पतियों के मामले में पांचवे नंबर पर है ब्रिटेन

यह गौरतलब है कि करोड़पति आबादी के मामले में ब्रिटेन अभी भी दुनिया भर में पाँचवें स्थान पर है, और पिछले एक दशक में करोड़पतियों की संख्या में नकारात्मक वृद्धि देखने वाले शीर्ष 10 सबसे धनी देशों में से यह एकमात्र देश है। हाल ही में हुए कर नीतिगत बदलावों, जिनमें उच्च उत्तराधिकार कर, निजी स्कूलों की फीस पर 15 प्रतिशत वैट और निवास-आधारित करों में परिवर्तन के कारण ब्रिटेन को अमीर व्यक्तियों के लिए लगातार अनाकर्षक बना दिया है।

मगर इसके साथ ही यह भी गौरतलब है कि संयुक्त अरब अमीरात तेजी से करोड़पतियों के प्रवास के लिए दुनिया का शीर्ष स्थान बनता जा रहा है – 2025 में 9,800 करोड़पतियों के वहां जाने की उम्मीद है, जो अपने साथ 63 बिलियन डॉलर (5.23 लाख करोड़) की संयुक्त संपत्ति लेकर आएंगे।

सोशल मीडिया पर लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर लेबर सरकार ऐसा क्यों कर रही है? पूंजी का सृजन करने वाले व्यापारियों के लिए राहें कठिन बना रही है और अवैध आप्रवासियों के स्वागत में रेड कार्पेट बिछा रही है?

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