पाञ्चजन्य का 4 अक्टूबर का अंक सेवा भाव को केंद्र में रखता है-“सेवा संकल्प, जीवन का स्वभाव”। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, संस्कार से लेकर आपदा और संकट के समय सहायता तक, सेवा कार्यों की इस परंपरा को इस अंक की कवर स्टोरी में विस्तार से समझाया गया है। भोपाल में RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हुए विशाल स्वयंसेवक एकत्रीकरण में सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने समाज के साथ प्रतिदिन कुछ समय बिताने और “एक घंटा समाज के नाम” का आह्वान किया। युवाओं के साथ संवाद में मानसिक स्वतंत्रता, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग, तर्क-सत्य-अध्ययन, नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण जैसे विषय भी प्रमुख रहे। इस अंक में पढ़िए-
🔹 शिव भाव से जीव सेवा – सेवा को भारतीय दर्शन और साधना के भाव से समझने वाला लेख
🔹 सेवा संकल्प से राष्ट्र निर्माण – शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सामाजिक सेवा और आपदा सेवा की यात्रा
🔹 ग्लोबल साउथ – संकटों की पहली पंक्ति और फैसलों की आखिरी पंक्ति में अंतर क्यों?
🔹 टैरिफ का जवाब आत्मनिर्भरता – रूस से तेल, अमेरिकी दबाव और भारत के आर्थिक हित
🔹 संहिता का समय – समान नागरिक संहिता के कानूनी पहलुओं पर विशेष लेख
🔹 भोजशाला से भरूच तक – विरासत और संरक्षण से जुड़े सवाल
🔹 जीत बड़ी, जिम्मेदारी बढ़ी – छात्रसंघ चुनावों में ABVP के प्रदर्शन और विजेता पदाधिकारियों से बातचीत
🔹 आस्था और तकनीक का संगम – अयोध्या में रामकथा का नया स्वरूप
🔹 हरिपुर: विरासत का पुनरुत्थान -यमुना तट के प्राचीन तीर्थ की कहानी
🔹 श्री अशोक सिंहल जन्मशताब्दी विशेष
🔹 जड़ों की ओर लौटता सिनेमा 4 अक्टूबर का पाञ्चजन्य अंक पढ़िए और जानिए-सेवा का संकल्प कैसे व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण तक पहुंचता है।
पाञ्चजन्य – बात भारत की।
















