कुछ लोग अपना जीवन जीते हैं, तो कुछ लोग अपना जीवन किसी बड़े विचार को समर्पित कर देते हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में जन्मे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन संघर्षों की भट्ठी में तपकर राष्ट्रसेवा की मिसाल बना। कम उम्र में माता-पिता का साया उठने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अपना पूरा जीवन देश को सौंप दिया। उनके ‘एकात्म मानव दर्शन’ और ‘अंत्योदय’ का विचार आज भी समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की सबसे बड़ी कसौटी है। ‘पाञ्चजन्य’ और ‘राष्ट्रधर्म’ जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से उन्होंने वैचारिक पत्रकारिता को नई दिशा दी। आइए, इस वीडियो पैकेज के जरिए गहराई से जानते हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, उनके संघर्षों और उनके अमर दर्शन से जुड़ी खास बातें-
















