भारत में सेवा की परंपरा केवल सहायता देने तक सीमित नहीं रही है। किसी जरूरतमंद को भोजन देना, किसी बच्चे को पढ़ाना, किसी बीमार व्यक्ति का उपचार कराना या किसी परिवार को अपने पैरों पर खड़ा करना-सेवा के इन सभी रूपों को समाज जीवन का हिस्सा माना गया है। इसी भाव को आधार बनाकर राष्ट्रीय सेवा भारती देश के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में काम कर रही है। राष्ट्रीय सेवा भारती का गठन 2003 में हुआ। यह अपने साथ काम करने वाली विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में काम करती है। इसका सेवा तंत्र देश के अलग-अलग प्रांतों में स्थानीय संस्थाओं और कार्यकर्ताओं के माध्यम से चलता है। वर्तमान में राष्ट्रीय सेवा भारती के 11 क्षेत्र, 45 प्रांत हैं, जो देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में हैं। सेवा का यह विस्तार केवल संख्या भर नहीं है। इसके पीछे अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी आवश्यकताओं को समझकर काम करने की कोशिश है। कहीं शिक्षा सबसे बड़ी जरूरत है तो कहीं स्वास्थ्य। किसी क्षेत्र में रोजगार और कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता है तो किसी जगह छात्रावास और सामाजिक सहायता की।


शिक्षा सेवा
किसी भी समाज को लंबे समय में बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। सेवा भारती के काम में इसलिए शिक्षा का बड़ा स्थान है। ग्रामीण और वंचित बस्तियों में बच्चों को पढ़ाने से लेकर संस्कार केंद्र, पाठशाला, ट्यूशन केंद्र, बालवाड़ी और एकल विद्यालय तक अनेक प्रकार के प्रकल्प चल रहे हैं। इस समय शिक्षा क्षेत्र में 25,281 प्रकल्प चल रहे हैं। शिक्षा का मतलब केवल बच्चों को अक्षर ज्ञान देना नहीं है। कई स्थानों पर पढ़ाई के साथ संस्कार, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक चेतना पर भी ध्यान दिया जाता है। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास भी इस काम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। राष्ट्रीय सेवा भारती के अनुसार छात्रावासों का उद्देश्य ग्रामीण, जनजातीय और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा और मार्गदर्शन का वातावरण उपलब्ध कराना है। एकल विद्यालय भी इस विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
स्वास्थ्य सेवा
भारत के कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आज भी आसान नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता, ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता और चलित चिकित्सालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेवा भारती के स्वास्थ्य कार्यों में चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों के साथ चलित चिकित्सालय, स्वास्थ्य जागरण कार्यक्रम और गांवों में स्वास्थ्य सहायता जैसी गतिविधियां शामिल हैं। वर्तमान में स्वास्थ्य क्षेत्र में 9,098 से अधिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चल रहे हैं और इनकी पहुंच 5,000 से अधिक गांवों तक बताई जाती है। स्वास्थ्य सेवा का एक महत्वपूर्ण पक्ष जागरूकता भी है। बीमारी होने के बाद उपचार जरूरी है, लेकिन बीमारी से बचाव, स्वच्छता, पोषण और समय पर जांच की जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
स्वावलंबन सेवा
किसी परिवार को लंबे समय तक सहायता देते रहना एक रास्ता हो सकता है, लेकिन उसे अपने पैरों पर खड़ा करना उससे आगे की बात है। इसी सोच के साथ स्वावलंबन सेवा भारती के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल है। सिलाई प्रशिक्षण, हस्तशिल्प, कंप्यूटर प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूह, रोजगार आधारित प्रशिक्षण और छोटे उद्यमों के लिए मार्गदर्शन जैसे काम इसी दिशा में आते हैं। इस समय स्वावलंबन के 9,720 प्रकल्प चल रहे हैं।
महिलाओं के लिए चलाए जा रहे कौशल और आजीविका कार्यक्रम इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। राष्ट्रीय सेवा भारती के ‘वैभवश्री’ कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को कौशल, आजीविका, छोटे उद्यम और नेतृत्व के अवसरों से जोड़ना है। इसी तरह किशोरी विकास कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, जीवन कौशल, व्यक्तित्व विकास और स्वावलंबन पर ध्यान दिया जाता है। यानी सेवा का लक्ष्य केवल यह नहीं कि किसी जरूरतमंद के हाथ में आज कुछ पहुंच जाए। प्रयास यह भी है कि कल उसके हाथ में अपना काम हो।
सामाजिक सेवा
शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के अलावा सामाजिक सेवा का क्षेत्र बहुत बड़ा है। जरूरतमंद परिवारों की सहायता, बाल सेवा, महिला केंद्र, वृद्धजन सेवा, पुस्तकालय, परामर्श केंद्र और अन्य सामाजिक गतिविधियां इसके अंतर्गत आती हैं। वर्तमान में सामाजिक सेवा के 10,481 कार्य हैं। इस काम का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक समरसता है। अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों तक पहुंचना, उन्हें साथ जोड़ना और जरूरत के समय सहयोग देना सेवा कार्यों का हिस्सा है। राष्ट्रीय सेवा भारती अपने उद्देश्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक सेवा के माध्यम से वंचित तथा जरूरतमंद वर्गों के समग्र विकास की बात करती है।

सेवा के क्षेत्र लगातार नए विषयों तक भी बढ़ रहे हैं। पोषण इसका एक उदाहरण है। राष्ट्रीय सेवा भारती ने ‘सुपोषित भारत’ अभियान के तहत किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के पोषण पर केंद्रित कार्यक्रम चलाए हैं। सितंबर में देशभर में सुपोषण जागरण सप्ताह भी मनाया जाता है।
किशोरी विकास इसी व्यापक सोच का दूसरा हिस्सा है। किशोरियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन कौशल और आत्मविश्वास को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य आगे चलकर परिवार और समाज में उनकी सक्रिय भूमिका को मजबूत करना है।
आपदा में सेवा
सेवा का असली महत्व संकट के समय सामने आता है। बाढ़, भूकंप, महामारी या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और सहायता पहुंचाने का काम भी सेवा भारती से जुड़े संगठनों और कार्यकर्ताओं के काम का हिस्सा रहा है। राष्ट्रीय सेवा भारती अपनी कार्यप्रणाली में आपदा राहत को भी शामिल करती है। इसके प्रशिक्षण और सहयोग कार्यक्रमों में आपदा प्रबंधन तथा आपातकालीन सहायता का उल्लेख है। यहां सेवा का अर्थ केवल राहत सामग्री पहुंचाना नहीं है। प्रभावित लोगों तक भोजन, स्वास्थ्य सहायता, आवश्यक वस्तुएं और जरूरत के अनुसार अन्य सहयोग पहुंचाना भी इसका हिस्सा बनता है।
45 प्रांतों में फैला सेवा तंत्र
राष्ट्रीय स्तर पर सेवा भारती का ढांचा 11 क्षेत्रों और 45 प्रांतों में विभाजित है। इसमें असम से लेकर तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान तक के क्षेत्र शामिल हैं। असम क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश, दक्षिण असम, मणिपुर, त्रिपुरा और उत्तर असम आते हैं। दक्षिण क्षेत्र में दक्षिण तमिलनाडु, केरलम् और उत्तर तमिलनाडु हैं। दक्षिण मध्य क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, दक्षिण कर्नाटक और उत्तर तेलंगाना शामिल हैं। मध्य क्षेत्र में छत्तीसगढ़, मध्य भारत, महाकौशल और मालवा आते हैं। पश्चिम क्षेत्र में देवगिरि, गुजरात, कोंकण, पश्चिम महाराष्ट्र, सौराष्ट्र और विदर्भ शामिल हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र में ब्रज, मेरठ और उत्तराखंड आते हैं। पूर्व क्षेत्र में दक्षिण बंग, मध्य बंग, ओडिशा, पश्चिम ओडिशा और पूर्वोत्तर बंग हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में अवध, गोरक्ष, कानपुर और काशी शामिल हैं। उत्तर क्षेत्र में दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब आते हैं। उत्तर पश्चिम क्षेत्र में चित्तौड़, जयपुर और जोधपुर तथा उत्तर पूर्व क्षेत्र में दक्षिण बिहार, झारखंड और उत्तर बिहार शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सेवा का स्वरूप स्थानीय जरूरत के अनुसार बदलता है।
संगठन से अधिक एक सेवा-व्यवस्था
राष्ट्रीय सेवा भारती का काम केवल अपने नाम से चलने वाले प्रकल्पों तक सीमित नहीं है। उसका एक बड़ा काम सेवा क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं को सहयोग, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देना भी है। राष्ट्रीय सेवा भारती अपनी कार्यप्रणाली के चार आधार-जागरण, सहयोग, प्रशिक्षण और अध्ययन-बताती है। इससे जुड़े संगठनों को प्रकल्प संचालन, प्रशिक्षण, दस्तावेजीकरण, सरकारी योजनाओं, आपदा राहत और अन्य प्रशासनिक विषयों में सहयोग दिया जाता है। संगठन के अनुसार वह देशभर में 1,000 से अधिक संस्थाओं को सहयोग देता है और प्रतिवर्ष 500 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय सेवा भारती के काम को केवल कुछ संस्थानों या कुछ शहरों तक सीमित गतिविधि के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। इसका ढांचा स्थानीय संस्थाओं, कार्यकर्ताओं और सेवा प्रकल्पों के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में काम करता है।
सेवा का अर्थ केवल सहायता नहीं
सेवा भारती के काम को एक साथ देखें तो इसकी चार प्रमुख धाराएं सामने आती हैं-शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक सेवा। इनके भीतर छात्रावास, एकल विद्यालय, स्वास्थ्य शिविर, चलित चिकित्सा, कौशल प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूह, महिला सशक्तीकरण, किशोरी विकास, पोषण और आपदा राहत जैसे अनेक काम जुड़े हुए हैं।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात संख्या नहीं, बल्कि सेवा की दिशा है। शिक्षा किसी बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर देती है। स्वास्थ्य जीवन को सुरक्षित बनाता है। स्वावलंबन व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़ा करता है और सामाजिक सेवा जरूरत के समय समाज का हाथ थामती है। यही चारों मिलकर सेवा को सहायता से आगे सामर्थ्य निर्माण का माध्यम बनाते हैं। देश के किसी गांव में चल रही छोटी-सी पाठशाला हो, किसी दूरस्थ क्षेत्र में पहुंचता चलित चिकित्सालय, किसी महिला के हाथ में रोजगार का हुनर देने वाला प्रशिक्षण केंद्र या किसी आपदा में राहत पहुंचाता कार्यकर्ता-इन सबके पीछे एक ही विचार दिखाई देता है कि समाज की अंतिम पंक्ति तक पहुंचकर उसके जीवन में स्थायी बदलाव का रास्ता बनाया जाए।
सेवा का यह विस्तार अंततः एक विचार को सामने रखता है- समाज की जरूरत को समझना, वहां पहुंचना और व्यक्ति को सहायता के साथ सामर्थ्य देना। यही सेवा से समाज निर्माण की दिशा है।


















