आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि अब दुनियाभर की सरकारों को इसके लिए अलग से नीतियां और विशेष पद बनाने पड़ रहे हैं। इसी सिलसिले में ब्रिटेन की सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। ब्रिटेन के नवनिर्वाचित पीएम एंडी बर्नहैम ने अपनी कैबिनेट का पुनर्गठन करते हुए भारतीय मूल के युवा नेता कनिष्क नारायण को देश का पहला कैबिनेट स्तर का AI मंत्री बनाया है।
ब्रिटेन के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े विभाग को सीधे प्रधानमंत्री की मुख्य कैबिनेट में शामिल किया गया है। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में इंग्लैंड में एआई, डेटा और तकनीक से जुड़े जितने भी बड़े और नीतिगत फैसले होंगे, उनमें कनिष्क नारायण की मुख्य भूमिका होगी।
कौन हैं कनिष्क नारायण?
कनिष्क नारायण भारतीय मूल के एक उभरते हुए और प्रभावशाली ब्रिटिश राजनेता हैं। उनका जन्म बिहार के मुज्जफरनगर में हुआ था, जब वह 12 साल के थे तब उनका परिवार इंग्लैंड चला गया था। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से फिलॉसिपी, पॉलिटिक्स और इकोनॉमी में ग्रेजुएट कनिष्क नारायण ने सटैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। वो ब्रिटेन की लेबर पार्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2024 में हुए आम चुनावों से की। तब कनिष्क नारायण ने वेल्स की वेल ऑफ ग्लेमॉर्गन सीट से जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी।
कनिष्क पहले भी एआई और ऑनलाइन सेफ्टी राज्य मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री बर्नहैम ने उनकी प्रतिभा और एआई की बढ़ती जरूरत को देखते हुए उन्हें प्रमोट कर सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया है।
ब्रिटेन की सरकार में हुए कई अहम बदलाव
ब्रिटेन सरकार ने AI मिनिस्टर को कैबिनेट में जगह देने के साथ-साथ मंत्रालयों के ढांचे में भी एक बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल किया है। सरकार ने डिपार्टमेंट ऑफ साइंस, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (DSIT) को स्वतंत्र मंत्रालय के रूप में बंद कर दिया है और इसे बिजनेस एंड ट्रेड डिपार्टमेंट (व्यापार और उद्योग मंत्रालय) में मिला दिया है। प्रशासन का कहना है कि एआई और व्यापार को एक ही छत के नीचे लाने से फैसले ज्यादा तेजी से लिए जा सकेंगे और नए इनोवेशन को व्यापारिक रूप देने में मदद मिलेगी। हालांकि, यह विभाग व्यापार मंत्रालय का हिस्सा बन गया है, लेकिन एआई से जुड़ी पूरी कमान और निर्णय लेने का अधिकार कनिष्क नारायण के पास ही रहेगा।
सरकार के इस फैसले से ब्रिटेन का टेक जगत दो हिस्सों में बंट गया है। कई टेक एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों ने इस विलय की आलोचना की है। उनका मानना है कि एआई और टेक्नोलॉजी को एक अलग मंत्रालय के तहत ही काम करना चाहिए था। व्यापार मंत्रालय में मिलाने से रिसर्च और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान कम हो सकता है। इसके बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि एआई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बना रहेगा।
ब्रिटेन को ग्लोबल एआई हब बनाने का है प्लान
मौजूदा समय में अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एआई टेक्नोलॉजी को लेकर कॉम्पटिशन जारी है। ब्रिटेन भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। लंदन और ब्रिटेन के अन्य शहर पहले से ही गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) जैसी दुनिया की टॉप एआई कंपनियों का गढ़ रहे हैं। ब्रिटिश सरकार लगातार एआई रिसर्च, नए स्टार्टअप्स और बड़े डेटा सेंटर्स के निर्माण में अरबों पाउंड्स का निवेश कर रही है। ब्रिटेन सॉवरेन एआई फंड और एआई ग्रोथ जोन्स जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन अपनी अलग पहचान बना सके। साथ ही ब्रिटेन को ग्लोबल एआई हब बनया जा सके। जानकारों का कहना है कि ब्रिटेन एआई की दुनिया में अपना खुद की टेक्नोलॉजी लाना चाहता ताकि उसकी अमेरिकन एआई कंपनियों पर निर्भरता शून्य हो सके।

















