उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार पूरी मस्जिद गिरा रही है। असल में मामला ऐसा नहीं है। उज्जैन नगर निगम और सरकार सिर्फ सड़क चौड़ी करने के लिए मस्जिद का वह हिस्सा हटा रही है, जो 15 मीटर चौड़ी प्रस्तावित सड़क में आ रहा है। यह काम उज्जैन डेवलपमेंट प्लान 2035 और 2028 के सिंहस्थ मेले की तैयारियों से जुड़ा है।
नोटिस और कोर्ट का मामला
उज्जैन नगर निगम ने 14 अगस्त, 25 अगस्त और 27 अगस्त 2026 को नोटिस जारी किए। उसके बाद 1 सितंबर को अंतिम आदेश दिया। इसमें छत्री चौक पर सड़क चौड़ी करने के लिए मस्जिद के अड़चन वाले हिस्से को हटाने की बात कही गई। मस्जिद प्रबंधन ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर किसी भी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
9 सितंबर को इंदौर बेंच के जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने पूरी मस्जिद गिराने का कोई आदेश नहीं दिया। सिर्फ यह कहा कि नगर निगम की कार्रवाई में दखल नहीं दिया जा सकता।
क्या हिस्सा प्रभावित हो रहा है?
मस्जिद प्रबंधन ने कोर्ट में बताया कि प्रार्थना हॉल का कुछ हिस्सा, करीब 120 फुट ऊंचा मीनार और मजहर चौक शाही प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि यह वक्फ संपत्ति है और सड़क के लिए दूसरी जगह इस्तेमाल की जा सकती है। कोर्ट ने इन दलीलों को नहीं माना। कोर्ट ने नोट किया कि नगर निगम ने कानूनी प्रक्रिया पूरी की और आपत्ति सुनने का मौका भी दिया।
हाई कोर्ट ने सड़क चौड़ी करने का समर्थन क्यों किया?
कोर्ट ने उज्जैन डेवलपमेंट प्लान 2035, मस्जिद की लोकेशन और 2028 के सिंहस्थ में आने वाली भीड़ को ध्यान में रखा। मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के लगभग सामने और क्षिप्रा नदी के पास है। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में भक्तों के आने पर ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाएं जरूरी हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि धार्मिक ढांचे को सड़क चौड़ी करने में कोई खास छूट नहीं दी जा सकती। इसी सड़क पर पहले ही 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से हटाए जा चुके हैं। शहर में करीब 80 धार्मिक ढांचों पर कार्रवाई हुई है।
सड़क क्यों चौड़ी हो रही है?
यह काम शहर की लंबी अवधि की विकास योजना और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़ा है। उस समय उज्जैन में बहुत बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आने वाले हैं। शाही मस्जिद व्यस्त इलाके में है, इसलिए सड़क चौड़ी करना जरूरी माना गया। कोर्ट ने ट्रैफिक और सुरक्षा को मुख्य वजह बताया।
मस्जिद पर धरना
28 सितंबर को कुछ लोग शाही मस्जिद के अंदर और आसपास इकट्ठा हुए। उन्होंने सड़क में आने वाले हिस्से को हटाने का विरोध किया। कुछ लोग रात भर रुके, कुछ बारी-बारी से आए। इलाके में पुलिस की कई कंपनियां तैनात की गईं। उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि प्रशासन बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश कर रहा है और फिलहाल तोड़फोड़ नहीं की गई।
मस्जिद की उम्र को लेकर विवाद
कुछ रिपोर्ट्स में मस्जिद को सौ साल से ज्यादा पुरानी बताया गया है। समुदाय के कुछ लोग इसे 1390 या 600 साल से ज्यादा पुरानी बताते हैं। हाल की रिपोर्ट्स में 636 साल का दावा भी आया है। हाई कोर्ट ने विरासत की बजाय सिर्फ नगर निगम के नोटिस और सड़क चौड़ी करने की कानूनी वैधता पर फैसला दिया।












